फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   The first citizen of the metropolis has the right to spend only five thousand rupees

Jhansi News: महानगर के प्रथम नागरिक को महज पांच हजार रुपये ही खर्च करने का अधिकार

Sat, 29 Apr 2023 01:13 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 29 Apr 2023 01:13 AM IST
विज्ञापन
The first citizen of the metropolis has the right to spend only five thousand rupees
झांसी। नगर निकाय चुनाव का प्रचार अब अपने अंतिम दौर की ओर बढ़ रहा है। महापौर पद के उम्मीदवारों ने जीत के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है। प्रचार के दौरान उम्मीदवार पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। किसी भी कीमत पर प्रत्याशी चुनाव जीतने की कोशिश में जुटे हैं लेकिन, चुनाव जीतने के बाद जब वह नगर निगम पहुंचेंगे तब उनको विवेकाधिकार कोष से महज पांच हजार रुपये ही खर्च करने का अधिकार होगा। विधायक, सांसद की तरह वह अपने विवेक से करोड़ों रुपये की निधि खर्च नहीं कर सकते बल्कि हर काम की स्वीकृति के लिए उनको अफसरों की सहमति का इंतजार करना होगा।
विज्ञापन

नगर निगम अधिनियम-1959 में महापौर को कोई वित्तीय अधिकार नहीं दिया गया। अधिनियम सिर्फ महापौर को प्रत्येक वर्ष पांच हजार रुपये खर्च करने का अधिकार देता है, लेकिन इस रकम को खर्च करने में भी कई सारी तकनीकी बाधाएं होती हैं। इस वजह से यह रकम भी खर्च नहीं हो पाती। पिछले दो वित्तीय वर्ष के दौरान महापौर का विवेकाधीन कोष खर्च नहीं हो सका। महापौर के पास विधायक एवं सांसद की तरह कोई निधि नहीं होती हालांकि अवस्थापना निधि एवं केंद्रीय वित्त आयोग के कार्य महापौर की अध्यक्षता वाली कमेटी से कराए जाते हैं। इसमें भी महापौर की मर्जी नहीं चलती बल्कि कई सदस्य होते हैं। उनकी सहमति से ही यह कार्य तय होते हैं। नगर निगम अधिनियम के मुताबिक 10 लाख से अधिक के कार्यों में महापौर की सहमति अनिवार्य होती है लेकिन, महापौर अपनी इच्छा से कोई कार्य नहीं करा सकते।
विज्ञापन

वित्तीय ताकत न होने के साथ ही महापौर के पास कोई प्रशासनिक ताकत भी नहीं होती। महापौर किसी कर्मचारी के खिलाफ सीधी कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। अधिकतम किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर सकते हैं। प्रशासनिक ताकत न होने से ही अक्सर नगर निगम अफसरों से महापौर के तकरार की बात सामने आती रहती है। हालांकि महापौर को प्रोटोकॉल के लिहाज से महानगर का प्रथम नागरिक माना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


74 वां संविधान संशोधन लागू होने का इंतजार

सरकार ने पंचायती राज की तरह नगर निकायों को मजबूत करने के लिए 74वां संविधान संशोधन स्वीकार तो कर लिया लेकिन, उसकी सिफारिशों को आज तक लागू नहीं किया गया। इन सिफारिशों के लागू होने से ही महापौर एवं पार्षदों को वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार मिल सकेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed