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सलमान खान को जो बीमारी थी, झांसी में हर साल उसके सौ मरीज मिलते
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झांसी। ट्राइजेमिनल न्यूरेल्जिया जैसी दुर्लभ और गंभीर बीमारी के झांसी में हर साल सौ मरीज मिलते हैं। फिल्म अभिनेता सलमान खान को भी यही बीमारी थी। बीमारी से पीड़ित मरीज को गर्म सुई चुभने जैसा असहनीय दर्द होता है। कई रोगियों के मन में आत्महत्या करने तक के ख्याल आने लगते हैं। तंबाकू, गुटखा, शराब का सेवन करने वालों और विटामिन डी, बी-12 की कमी या फिर बीपी, शुगर के रोगियों को ये बीमारी ज्यादा होती है।
ज्यादातर मरीज शुरूआत में इस बीमारी के दर्द को दांतों से जुड़ा दर्द मान लेते हैं। मगर असल में ये पूरे चेहरे का दर्द होता है। विशेषज्ञों ने बताया कि इस बीमारी में चेहरे के एक हिस्से पर कुछ सेकेंड से लेकर कई मिनटों तक दर्द होता रहता है। बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड हो तब इस बीमारी का दर्द बढ़ जाता है। इंजेक्शन और दवाओं के जरिए भी इस बीमारी का इलाज होता है। इंजेक्शन सौ प्रतिशत एलकोहल का लगाया जाता है। इससे मरीज को एक साल तक दर्द से आराम मिल जाता है। बीमारी गंभीर स्थिति में पहुंच जाने पर सर्जरी करानी पड़ती है। डॉक्टरों के मुताबिक इस बीमारी की शुरूआत में मरीज को हल्का दर्द या दर्द के झटके महसूस होते हैं। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ने लगती है, वैसे-वैसे दर्द के झटके बढ़ जाते हैं। ट्राइजेमिनल न्यूरेजिल्या बीमारी वैसे तो किसी भी उम्र में हो सकती है। मगर 50 साल से अधिक उम्र वालों को ये बीमारी होने की आशंका ज्यादा होती है।
ये हैं लक्षण
- खाने-पीने के दौरान दर्द महसूस होना
- जरा सा चेहरा छूने में तेज दर्द हो जाना
- शेविंग करने पर भी अत्यधिक पीड़ा होना
- बोलने, हंसने पर भी चेहरे में तेज दर्द होना
- ब्रश करने पर चेहरे में असहनीय दर्द हो जाना
ये बोले चिकित्सक
...........................
हर महीने पांच-छह मरीज ट्राइजेमिनल न्यूरेल्जिया के इलाज कराने के लिए आते हैं। इस बीमारी में गर्म सुई चुभने जैसा दर्द होता है, जिसे मरीज को सहन करना बहुत मुश्किल होता है। ये दर्द कुछ सेकेंड से लेकर कई मिनटों तक हो सकता है। दवाओं, इंजेक्शन से कई मरीजों को राहत भी मिलती है। - डॉ. विनोद कुमार मिसुरिया, वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ।
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ट्राइजेमिनल न्यूरेल्जिया के हर महीने तीन-चार मरीज आते हैं। जो लोग तंबाकू, गुटका, शराब का सेवन करता है या फिर शुगर या बीपी के मरीज हैं। जिनमें विटामिन डी और बी-12 की कमी होती है, उन्हें ये बीमारी ज्यादा होती है। दर्द इतना होता है कि कई मरीजों को आत्महत्या के ख्याल आते हैं। - डॉ. जेपी पुरोहित, वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ।
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ज्यादातर मरीज शुरूआत में इस बीमारी के दर्द को दांतों से जुड़ा दर्द मान लेते हैं। मगर असल में ये पूरे चेहरे का दर्द होता है। विशेषज्ञों ने बताया कि इस बीमारी में चेहरे के एक हिस्से पर कुछ सेकेंड से लेकर कई मिनटों तक दर्द होता रहता है। बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड हो तब इस बीमारी का दर्द बढ़ जाता है। इंजेक्शन और दवाओं के जरिए भी इस बीमारी का इलाज होता है। इंजेक्शन सौ प्रतिशत एलकोहल का लगाया जाता है। इससे मरीज को एक साल तक दर्द से आराम मिल जाता है। बीमारी गंभीर स्थिति में पहुंच जाने पर सर्जरी करानी पड़ती है। डॉक्टरों के मुताबिक इस बीमारी की शुरूआत में मरीज को हल्का दर्द या दर्द के झटके महसूस होते हैं। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ने लगती है, वैसे-वैसे दर्द के झटके बढ़ जाते हैं। ट्राइजेमिनल न्यूरेजिल्या बीमारी वैसे तो किसी भी उम्र में हो सकती है। मगर 50 साल से अधिक उम्र वालों को ये बीमारी होने की आशंका ज्यादा होती है।
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ये हैं लक्षण
- खाने-पीने के दौरान दर्द महसूस होना
- जरा सा चेहरा छूने में तेज दर्द हो जाना
- शेविंग करने पर भी अत्यधिक पीड़ा होना
- बोलने, हंसने पर भी चेहरे में तेज दर्द होना
- ब्रश करने पर चेहरे में असहनीय दर्द हो जाना
ये बोले चिकित्सक
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हर महीने पांच-छह मरीज ट्राइजेमिनल न्यूरेल्जिया के इलाज कराने के लिए आते हैं। इस बीमारी में गर्म सुई चुभने जैसा दर्द होता है, जिसे मरीज को सहन करना बहुत मुश्किल होता है। ये दर्द कुछ सेकेंड से लेकर कई मिनटों तक हो सकता है। दवाओं, इंजेक्शन से कई मरीजों को राहत भी मिलती है। - डॉ. विनोद कुमार मिसुरिया, वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ।
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ट्राइजेमिनल न्यूरेल्जिया के हर महीने तीन-चार मरीज आते हैं। जो लोग तंबाकू, गुटका, शराब का सेवन करता है या फिर शुगर या बीपी के मरीज हैं। जिनमें विटामिन डी और बी-12 की कमी होती है, उन्हें ये बीमारी ज्यादा होती है। दर्द इतना होता है कि कई मरीजों को आत्महत्या के ख्याल आते हैं। - डॉ. जेपी पुरोहित, वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ।