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आठ माह पहले खत्म हो गई डेडलाइन, फिर भी ट्रैफिक प्लान लापता
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झांसी। नगर निगम ने महानगर का ट्रैफिक प्लान तैयार करने के लिए सर्वे आरंभ कराया लेकिन समय सीमा खत्म होने के आठ माह बाद भी यह काम पूरा नहीं हुआ। अब निगम अफसर कार्यदायी एजेंसी पर इसका ठीकरा फोड़ रहे हैं। अफसरों का कहना है भुगतान न होने की वजह से एजेंसी ने काम ठप कर दिया है।
समय के साथ महानगर का दायरा बढ़ रहा है। इसके साथ ट्रैफिक व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। इसको देखते हुए सरकार ने अगले बीस साल के ट्रैफिक के लिए मोबिलिटी प्लान तैयार कराने को कहा था। पिछले साल सितंबर में राइटस ने यह काम शुरू किया। जनवरी तक इसकी रिपोर्ट सौंपी जानी थी लेकिन, कंपनी ने सिर्फ शुरूआती रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद उसने काम बंद कर दिया। अब पिछले आठ महीने से इस मोबिलिटी प्लान का कुछ अता-पता नहीं है। नगर निगम कंपनी को करीब पांच लाख रुपये का भुगतान भी कर चुका। अधिशासी अभियंता एमके सिंह का कहना है कि भुगतान न होने की वजह से यह काम पूरा नहीं हो सका है।
इंदौर की तर्ज पर तैयार होना था ट्रैफिक प्लान
देश के सभी स्मार्ट सिटी में यह मोबेलिटी प्लान तैयार किए जाने थे। झांसी में भी इंदौर, भोपाल जैसे बड़े शहरों की तर्ज पर इसकी मदद से ट्रैफिक प्लान तैयार होना था लेकिन, सर्वे पूरा न होने से यह अभी तक हवा में है। वहीं, लखनऊ, प्रयागराज, बनारस जैसे निगमों में दो साल पहले ही यह प्लान तैयार कर लिए गए। मोबेलिटी प्लान के जरिए सर्वाधिक व्यस्त चौराहे एवं सड़क मार्ग चिन्हित किए जाने थे।
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समय के साथ महानगर का दायरा बढ़ रहा है। इसके साथ ट्रैफिक व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। इसको देखते हुए सरकार ने अगले बीस साल के ट्रैफिक के लिए मोबिलिटी प्लान तैयार कराने को कहा था। पिछले साल सितंबर में राइटस ने यह काम शुरू किया। जनवरी तक इसकी रिपोर्ट सौंपी जानी थी लेकिन, कंपनी ने सिर्फ शुरूआती रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद उसने काम बंद कर दिया। अब पिछले आठ महीने से इस मोबिलिटी प्लान का कुछ अता-पता नहीं है। नगर निगम कंपनी को करीब पांच लाख रुपये का भुगतान भी कर चुका। अधिशासी अभियंता एमके सिंह का कहना है कि भुगतान न होने की वजह से यह काम पूरा नहीं हो सका है।
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इंदौर की तर्ज पर तैयार होना था ट्रैफिक प्लान
देश के सभी स्मार्ट सिटी में यह मोबेलिटी प्लान तैयार किए जाने थे। झांसी में भी इंदौर, भोपाल जैसे बड़े शहरों की तर्ज पर इसकी मदद से ट्रैफिक प्लान तैयार होना था लेकिन, सर्वे पूरा न होने से यह अभी तक हवा में है। वहीं, लखनऊ, प्रयागराज, बनारस जैसे निगमों में दो साल पहले ही यह प्लान तैयार कर लिए गए। मोबेलिटी प्लान के जरिए सर्वाधिक व्यस्त चौराहे एवं सड़क मार्ग चिन्हित किए जाने थे।
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