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सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए चक्कर काट रहे फरियादी

Thu, 25 Nov 2021 01:30 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 25 Nov 2021 01:30 AM IST
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The complainants are circling to take advantage of government schemes
झांसी । आम आदमी तक लाभ पहुंचाने के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर लाभपात्रों को अपना हक पाने के लिए अब भी सालों तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। तहसील और ब्लॉक स्तर पर होने वाले कार्यों के लिए भी जरूरतमंदों को जिला मुख्यालय आकर डीएम के पास गुहार लगानी पड़ती है। उसके बावजूद भी योजना का लाभ मिलने में देरी हो रही है। दूरदराज के क्षेत्र से लोग अलसुबह घर से निकलते हैं और दिनभर कार्यालयों के चक्कर काटते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों की कोई सुनवाई नहीं होती। थक हार कर लोग शाम को घर लौट जाते हैं और इस उम्मीद के साथ दोबारा जिला मुख्यालय पहुंचते हैं कि शायद काम बन जाएं। बुधवार को छुट्टी के बावजूद अधिकतर फरियादी जिला मुख्यालय पहुंचे। लेकिन कार्यालय बंद मिलने पर फरियादी मायूस होकर लौट गए।
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केस एक-
गांव छपरा निवासी एलिस के पास छह बच्चे हैं और पति की आठ साल पहले बीमारी के चलते मौत हो गई थी। परिवार में पति भगवानदास घर चलाने वाला एकमात्र सदस्य था। उसकी मौत के बाद गुजर बसर करने के लिए मजदूरी का काम शुरू किया। इसी दौरान विधवा पेंशन पाने के लिए एलिस ने आवेदन किया, लेकिन वह आठ साल से विधवा पेंशन के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रही है। कभी बड़ागांव तो कभी मऊरानीपुर के चक्कर काटे। यहां बात नहीं बनी तो एक साल से जिला मुख्यालय पर गुहार लगा रही है। पेंशन मिलने की आस में वह मजदूरी छोड़कर 20 किमी दूर से आती है और अधिकारियों को अपने कागजात सौंपती है। एलिस ने बताया कि उसे नहीं पता था कि बुधवार को सरकारी छुट्टी है। वह झांसी आने के लिए अपने एक परिचित के साथ आई तो यहां आकर छुट्टी के बारे में पता चला। ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं होने के कारण कर्मचारी और अधिकारी उसे इधर से उधर भेज देते हैं, लेकिन अब तक पेंशन की सुविधा नहीं मिली।
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केस दो-
मगरपुर निवासी ओमप्रकाश समेले चार महीने पहले बारिश में खराब हुई फसल का मुआवजा पाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। उसका गांव जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर है। ओमप्रकाश का दो महीने ऑपरेशन भी हुआ था। उसका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता है। उसके गांव में सभी किसानों को खराब फसल मुआवजा मिल चुका है, लेकिन उसे नहीं दिया गया। उसने बताया कि उसने पांच एकड़ में उड़द व मूंग की फसल लगाई थी। जो बारिश के चलते पूरी फसल खराब हो गई थी। जिसके बाद संबंधित विभाग के कर्मचारियों ने सर्वे भी किया था, लेकिन उसे मुआवजा नहीं दिया गया। पहले वह मऊरानीपुर में चक्कर काटते रहे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जिस पर उसे जिला मुख्यालय आना पड़ा। बुधवार को जिला उपायुक्त कार्यालय आने के बाद उसे छुट्टी का पता चला। करीब दो सौ रुपये खर्च करके वह झांसी आया है। अब फिर से आना पड़ेगा। तहसीलस्तर पर ही जरूरतमंदों की सुनवाई होनी चाहिए।
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