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Jhansi News: बच्चा खेत पर फसल काटने गया है... परीक्षा देने नहीं आएगा

Sat, 23 Mar 2024 04:35 PM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Updated Sat, 23 Mar 2024 04:35 PM IST
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The child has gone to the field to harvest the crop... will not come to take the exam
संवाद न्यूज एजेंसी
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झांसी। मास्टर साहब बच्चा स्कूल परीक्षा देने नहीं आ पाएगा, वह खेत पर फसल काटने के लिए गया है। इस समय फसल की कटाई जरूरी है, पढ़ाई तो साल भर होती रहेगी। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को कुछ ऐसे ही जवाब आज कल अभिभावकों से सुनने को मिल रहे हैं। अभिभावक यह तक कह रहे हैं कि परीक्षा से ज्यादा फसल की कटाई ज्यादा जरूरी है। परीक्षा बाद में करा ली जाए।
बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयाें में इन दिनों वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं। उधर खेतों में गेहूं की फसल की कटाई शुरू हो गई है। इसका सीधा असर परीक्षाओं पर पढ़ रहा है। आलम यह है कि गांवों के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे परीक्षा छोड़कर खेत पर फसल की कटाई कर रहे हैं। शिक्षक बच्चों के अभिभावकों को फोन और संपर्क करके बच्चे को परीक्षा देने के लिए स्कूल भेजने की बात कह रहे हैं, लेकिन अभिभावक भी इसमें रुचि नहीं ले रहे।
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बता दें जिले में 1452 परिषदीय विद्यालय हैं, जिसमें 1.31 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इनमें लगभग 15 प्रतिशत विद्यार्थी परीक्षा देने नहीं पहुंच रहे हैं।
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बिटिया खेत पर गई है नहीं आएगी स्कूल

बबीना ब्लॉक के एक विद्यालय में कक्षा छह के 13 विद्यार्थी परीक्षा देने नहीं पहुंचे, तो प्रधानाध्यापक ने विद्यार्थियाें के घर पर फोन किया। कई बार कॉल करने पर एक छात्रा की मां ने फोन उठाया। तो प्रधानाध्यापक ने बोला कि परीक्षा प्रारंभ हो गई है, छात्रा को जल्दी विद्यालय भेजें। इस पर छात्रा की मां ने जवाब दिया कि बिटिया खेत पर गई है। वह स्कूल परीक्षा देने नहीं आ पाएगी।
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पिता के साथ मजदूरी करने गया है बेटाबंगरा ब्लॉक के एक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि उनके विद्यालय के कक्षा आठ के चार विद्यार्थी परीक्षा देने नहीं पहुंचे। एक शिक्षक को बच्चों के घर भेजा, तो बच्चे की दादी ने बताया कि मां-बाप और बेटा तीनों मजदूरी पर निकल गए हैं। वह परीक्षा देने नहीं आएगा। मजदूरी करेंगे तो घर चलेगा। पढ़ाई में कुछ न रखा।
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तबीयत खराब होने का बनाया बहाना
बामौर ब्लॉक में शिक्षक बताते हैं कि उनके विद्यालय में एक छात्र परीक्षा देने नहीं पहुंचा। उसने घर पर बताया ही नहीं कि स्कूल में परीक्षा चल रही है। माता-पिता दोनों मजदूरी करते हैं। छात्र घर पर तबीयत खराब का बहाना कर घूम रहा था। शिक्षक के घर पहुंचे तो दादा ने छात्र को बुलाया और परीक्षा देने भेजा।

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मां-बाप मजदूरी करने गए हैं, बेटियों को साथ ले गए
मोंठ ब्लॉक की कक्षा एक और दो में पढ़ रहीं दो बहनें परीक्षा देने नहीं पहुंची। प्रधानाध्यापक ने जब एक शिक्षक को घर भेजकर पता करवाया तो पता चला कि मां-बाप दोनों ही मजदूरी पर निकल गए हैं। दोनों बच्चियां छोटी हैं, इसलिए उनको साथ लेकर गए हैं। इस कारण दोनों परीक्षा देने नहीं गईं।

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परीक्षा में नहीं पहुंच रहे बच्चों को बुलाने के लिए शिक्षकों को कहा गया है। शिक्षक अभिभावकों से बात करें कि वे बच्चों को परीक्षा देने भेजें। - नीलम यादव, बीएसए



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कम निकल रहे प्रश्नपत्र
वार्षिक परीक्षा के दौरान अव्यवस्थाएं भी सामने आ रही हैं। कई विद्यालयों से लिफाफे में प्रश्नपत्र कम निकलने की भी शिकायत शिक्षक कर रहे हैं। छात्र संख्या के सापेक्ष प्रश्नपत्र बहुत कम थे, जिस कारण दो-तीन बच्चों के बीच एक प्रश्नपत्र रखकर परीक्षा कराई गई थी। शिक्षकों का कहना है कि हर साल प्रश्नपत्रों के विषयवार और कक्षावार अलग-अलग लिफाफे भेजे जाते थे। लेकिन इस बार एक विषय के अलग-अलग कक्षा के प्रश्नपत्र एक ही लिफाफे में रखकर भेजे गए हैं। जिस कारण कई बार गलत प्रश्नपत्र भी वितरित हो गए।
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