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Jhansi News: कॉल सेंटर वाली ‘दुल्हनिया’ ने दिल नहीं... जेबें लूटीं
Fri, 10 Jul 2026 02:36 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Fri, 10 Jul 2026 02:36 AM IST
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झांसी। एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार की गई खूबसूरत युवतियों की तस्वीरों का इस्तेमाल कर शादी का झांसा देने वाले संगठित साइबर ठगी गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। राय कॉलोनी में किराये के मकान से संचालित इस फर्जी मैरिज ब्यूरो के जरिये एक हजार से अधिक लोगों को निशाना बनाया गया। पुलिस जांच में गिरोह के बैंक खातों में 41 लाख रुपये के लेनदेन का रिकॉर्ड मिला है। मामले में छत्तीसगढ़ निवासी मास्टरमाइंड हलधर साहू समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया।
एसीपी अरीबा नोमान ने बृहस्पतिवार को बताया कि गिरोह सोशल मीडिया, मैट्रिमोनियल वेबसाइटों और अखबारों में प्रकाशित वैवाहिक विज्ञापनों से मोबाइल नंबर जुटाता था। इसके बाद कॉल सेंटर में कार्यरत युवतियां खुद को मैरिज काउंसलर या रिलेशनशिप एडवाइजर बताकर अविवाहित और विशेष रूप से 40 से 48 वर्ष आयु वर्ग के नौकरीपेशा लोगों से संपर्क करती थीं। उनकी आर्थिक स्थिति का आकलन करने के बाद उन्हें एआई से तैयार की गई युवतियों की तस्वीरें और फर्जी प्रोफाइल भेजकर विश्वास में लिया जाता था।
इसके बाद दूसरी युवती खुद को विवाह की इच्छुक बताकर बातचीत करती और जल्द शादी का भरोसा दिलाती थी। पीड़ितों को गोल्ड, सिल्वर और प्लेटिनम सदस्यता के नाम पर 5,000 से 20,000 रुपये तक के पैकेज बेचे जाते थे। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन, प्रोफाइल निर्माण, मैचिंग, संपर्क और पारिवारिक सहमति शुल्क जैसे अलग-अलग बहानों से भी रकम वसूली जाती थी। यदि कोई व्यक्ति भुगतान से इन्कार करता तो उससे हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट दिखाकर ब्लैकमेल किया जाता था।
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कॉलिंग और वसूली के आधार पर मिलता था कमीशन
पुलिस के अनुसार कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियों को छह हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था। उन्हें प्रतिदिन 20 से 25 लोगों से संपर्क करने का लक्ष्य दिया गया था। कॉलिंग और ठगी गई रकम के आधार पर अलग से कमीशन भी मिलता था। कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिए दो महिलाओं को विशेष रूप से रखा गया था। गिरफ्तार नौ युवतियां झांसी शहर के विभिन्न क्षेत्रों की रहने वाली हैं और इंटर से लेकर स्नातक तक शिक्षित हैं। पुलिस के अनुसार रोजगार के अभाव में वे इस कॉल सेंटर में काम कर रही थीं।
कानपुर और छत्तीसगढ़ कनेक्शन की जांच
पुलिस इस गिरोह के दूसरे राज्यों से जुड़े नेटवर्क की भी जांच कर रही है। कुछ समय पहले झांसी के सरयू विहार और कानपुर में भी इसी तरह के फर्जी मैरिज ब्यूरो का खुलासा हुआ था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वहां सक्रिय गिरोहों का मास्टरमाइंड भी छत्तीसगढ़ से जुड़ा था। गिरफ्तार हलधर साहू और उसके साथी ने पूछताछ में बताया कि पहले वे ऐसे ही गिरोह में काम करते थे और बाद में उसी तरीके से अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया।
30 हजार लोगों का डेटा मिला, साइबर पोर्टल की शिकायतों से खुला राज
पुलिस के अनुसार गिरोह के पास करीब 30 हजार लोगों का डाटा मिला है, जिसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के लोगों की जानकारी शामिल है। साइबर पोर्टल पर इस प्रकार की ठगी की 26 शिकायतें मिलने के बाद पुलिस ने ऑनलाइन निगरानी शुरू की। सर्विलांस के दौरान राय कॉलोनी का यह कॉल सेंटर संदिग्ध गतिविधियों का हॉटस्पॉट मिला। इसके बाद साइबर थाना और नवाबाद थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर गिरोह का भंडाफोड़ किया।
41 लाख के लेनदेन का रिकॉर्ड, सामान बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 41 लाख रुपये के लेनदेन का रिकॉर्ड, 26 मोबाइल फोन, एक मैकबुक, 62 कॉपियां, 22 रजिस्टर, 25 फाइलें, यूपीआई क्यूआर कोड, छह चेकबुक, 16 डेबिट कार्ड, 11 मोहर और स्टांप पैड बरामद किए। रजिस्टरों में झांसी, ललितपुर, कानपुर, हमीरपुर सहित अन्य राज्यों के लोगों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज मिले हैं। पुलिस अब बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका की जांच कर रही है।
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एसीपी अरीबा नोमान ने बृहस्पतिवार को बताया कि गिरोह सोशल मीडिया, मैट्रिमोनियल वेबसाइटों और अखबारों में प्रकाशित वैवाहिक विज्ञापनों से मोबाइल नंबर जुटाता था। इसके बाद कॉल सेंटर में कार्यरत युवतियां खुद को मैरिज काउंसलर या रिलेशनशिप एडवाइजर बताकर अविवाहित और विशेष रूप से 40 से 48 वर्ष आयु वर्ग के नौकरीपेशा लोगों से संपर्क करती थीं। उनकी आर्थिक स्थिति का आकलन करने के बाद उन्हें एआई से तैयार की गई युवतियों की तस्वीरें और फर्जी प्रोफाइल भेजकर विश्वास में लिया जाता था।
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इसके बाद दूसरी युवती खुद को विवाह की इच्छुक बताकर बातचीत करती और जल्द शादी का भरोसा दिलाती थी। पीड़ितों को गोल्ड, सिल्वर और प्लेटिनम सदस्यता के नाम पर 5,000 से 20,000 रुपये तक के पैकेज बेचे जाते थे। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन, प्रोफाइल निर्माण, मैचिंग, संपर्क और पारिवारिक सहमति शुल्क जैसे अलग-अलग बहानों से भी रकम वसूली जाती थी। यदि कोई व्यक्ति भुगतान से इन्कार करता तो उससे हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट दिखाकर ब्लैकमेल किया जाता था।
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कॉलिंग और वसूली के आधार पर मिलता था कमीशन
पुलिस के अनुसार कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियों को छह हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था। उन्हें प्रतिदिन 20 से 25 लोगों से संपर्क करने का लक्ष्य दिया गया था। कॉलिंग और ठगी गई रकम के आधार पर अलग से कमीशन भी मिलता था। कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिए दो महिलाओं को विशेष रूप से रखा गया था। गिरफ्तार नौ युवतियां झांसी शहर के विभिन्न क्षेत्रों की रहने वाली हैं और इंटर से लेकर स्नातक तक शिक्षित हैं। पुलिस के अनुसार रोजगार के अभाव में वे इस कॉल सेंटर में काम कर रही थीं।
कानपुर और छत्तीसगढ़ कनेक्शन की जांच
पुलिस इस गिरोह के दूसरे राज्यों से जुड़े नेटवर्क की भी जांच कर रही है। कुछ समय पहले झांसी के सरयू विहार और कानपुर में भी इसी तरह के फर्जी मैरिज ब्यूरो का खुलासा हुआ था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वहां सक्रिय गिरोहों का मास्टरमाइंड भी छत्तीसगढ़ से जुड़ा था। गिरफ्तार हलधर साहू और उसके साथी ने पूछताछ में बताया कि पहले वे ऐसे ही गिरोह में काम करते थे और बाद में उसी तरीके से अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया।
30 हजार लोगों का डेटा मिला, साइबर पोर्टल की शिकायतों से खुला राज
पुलिस के अनुसार गिरोह के पास करीब 30 हजार लोगों का डाटा मिला है, जिसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के लोगों की जानकारी शामिल है। साइबर पोर्टल पर इस प्रकार की ठगी की 26 शिकायतें मिलने के बाद पुलिस ने ऑनलाइन निगरानी शुरू की। सर्विलांस के दौरान राय कॉलोनी का यह कॉल सेंटर संदिग्ध गतिविधियों का हॉटस्पॉट मिला। इसके बाद साइबर थाना और नवाबाद थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर गिरोह का भंडाफोड़ किया।
41 लाख के लेनदेन का रिकॉर्ड, सामान बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 41 लाख रुपये के लेनदेन का रिकॉर्ड, 26 मोबाइल फोन, एक मैकबुक, 62 कॉपियां, 22 रजिस्टर, 25 फाइलें, यूपीआई क्यूआर कोड, छह चेकबुक, 16 डेबिट कार्ड, 11 मोहर और स्टांप पैड बरामद किए। रजिस्टरों में झांसी, ललितपुर, कानपुर, हमीरपुर सहित अन्य राज्यों के लोगों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज मिले हैं। पुलिस अब बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका की जांच कर रही है।