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अंग्रेज अफसर ने सभा कर रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर करवा दी थी फायरिंग, 24 हुए थे शहीद

Sun, 15 Aug 2021 02:24 AM IST
झांसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Sun, 15 Aug 2021 02:24 AM IST
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The British officer had fired on the freedom fighters who were meeting, 24 were martyred
झांसी । अंग्रेजी हुकूमत की पिट्ठू रियासतों और कंपनी सरकार का विरोध करने वाले छतरपुर जिले के सिंहपुर गांव के निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामसहाय तिवारी को ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार कर लिया था। इसके विरोध में आसपास के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी 14 जनवरी 1931 को गांव में उर्मिल नदी के किनारे लगे मकर संक्रांति के मेले में सभा कर रहे थे। वक्ता सरकार के खिलाफ बोल रहे थे तथा भीड़ भारत माता की जय के उद्घोष कर रही थी कि इसी दौरान अंग्रेज अफसर कर्नल फिसर के आदेश पर इंदौर से आई कोल भील पलटन ने आजादी के रणबांकुरों को घेरकर गोलीबारी कर दी थी, इसमें 21 लोग मौके पर ही शहीद हो गई थे, जबकि सौ से अधिक लोग घायल हुए थे। देश पर मर मिटने वाले शहीदों का स्मारक भी सिंहपुर गांव में हैं , जहां पर शिलापट्टिका पर शहादत देने वालों के नाम अंकित हैं। यह स्थान उर्मिल नदी के तट पर है, इसे लोग चरणपादुका के नाम से भी जानते हैं।
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अंग्रेज अफसर के आदेश पर कोल भील पलटन ने चलाई थीं निहत्थे लोगों पर गोलियां
इतिहास के प्राध्यापक डा. अभय वर्मा बताते हैं कि बात 14 जनवरी 1931 की है। छतरपुर जिले के सिंहपुर गांव के निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामसहाय तिवारी को अंग्रेजी हुकूमत ने सिर्फ इसलिए गिरफ्तार कर लिया था क्योंकि वह दमनकारी रियासतों और कंपनी सरकार के खिलाफ गांव- गांव जाकर लोगों में जागरण कर रहे थे। पं. रामसहाय की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही आसपास के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में आक्रोश फैल गया। मकर संक्रांति का मेला लगा हुआ था, इसी में आमसभा आयोजन किया गया। सभा की अध्यक्षता सरजू दउआ कर रहे थे, मुख्य अतिथि के रूप में लल्लूराम मौजूद रहे। अंग्रेज अफसर कर्नल फिसर पहले ही सतर्क था, उसने इंदौर से कोल भील पलटन बुला रखी थी। सभा के मंच से वक्ता कंपनी सरकार के खिलाफ दहाड़ रहे थे तथा जनता नीचे से भारत माता के जयकारे लगा रही थी, कि इसी दौरान कोल भील पलटन ने मंच को चारों ओर से घेरकर मशीन गनों से फायरिंग कर दी। निहत्थे लोगों में भगदड़ मच गई। 21 सेनानी मौके पर ही शहीद हो गए थे।
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कई शवों को दफन कर दिया गया था उर्मिल नदी की बालू में
इतिहास के शोधार्थी शत्रुघन कुमार बताते हैं कि जिस स्थान पर निहत्थे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर फायरिंग की गई थी उस स्थान पर उनका स्मारक बनाने के साथ ही शिला पट्टिका पर शहीदों के नाम भी लिखे गए हैं। इस कांड में शहीद होने वालों में सेठ सुंदर लाल, ग्राम गिलोहा, चिरकु माते ग्राम गोमा, रघुराज सिंह ग्राम कटिया, समेत कुल 21 लोग शहीद हुए थे। सौ से अधिक घायल हुए थे। बताते हैं कि शहीद होने वालों की संख्या के सरकारी आंकड़े 21 थे, पर हकीकत में मरने वालों की संख्या कई गुना अधिक थी। कई लाशें उर्मिल नदी की बालू में दफन कर दी गईं थीं। देश की आजादी के बाद आज भी राष्ट्रीय पर्वों पर लोग इस स्मारक पर पहुंचकर आजादी के इन दीवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
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