{"_id":"5de178138ebc3e547744649a","slug":"tender-cancel-in-irrigation-department-jhansi-news-jhs1537453147","type":"story","status":"publish","title_hn":"ठेकेदारों के गठजोड़ से निरस्त हुआ टेंडर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ठेकेदारों के गठजोड़ से निरस्त हुआ टेंडर
विज्ञापन
झांसी। चेकडैम के टेंडर निरस्त होने का कारण ठेकेदारों का गठजोड़ (पूल) बना। प्रक्रिया में घालमेल की शिकायत पर सीडीओ की पड़ताल की। प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। रसूखदार ठेकेदारों की मिलीभगत से बड़े खेल की आशंका थी।
लघु सिंचाई विभाग द्वारा 20 करोड़ से चेकडैम के साथ ही लगभग दस करोड़ रुपये की लागत से 40 तालाबों का गहरीकरण किया जाना है। लगभग तीस करोड़ रुपये की लागत से ये काम होने थे। कार्य आवंटन में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए ऑनलाइन निविदाएं मांगी गईं थीं। 21 नवंबर से निविदाएं डलना शुरू हुईं थीं। 26 नवंबर को चेकडैम की निविदाएं लॉक कर दी गईं थीं। जबकि 27 को तालाब गहरीकरण के कामों की निविदाएं लॉक की जानी थीं।
इससे पहले ही प्रक्रिया पर आरोप लगने लगे। आरोप था कि प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद भी ठेकेदारों के बीच पूल बन गया। शिकायत जिलाधिकारी के पास पहुंची। उन्होंने पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी मुख्य विकास अधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे को दी। जांच के लिए सीडीओ ने टेंडर प्रक्रिया का पूरा ब्योरा तलब किया। साथ ही, ठेकेदारों के बयान भी दर्ज किए गए। इसके बाद सीडीओ की ओर से चेकडैम की निविदाएं निरस्त करने की सिफारिश की गईं। इस आधार पर जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी ने निविदाएं निरस्त कर दीं हैं। आगे की जांच जारी है।
विज्ञापन
यह थी योजना
टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद भी आरोप लगे थे कि विभाग के कुछ कर्मचारियों ने ठेकेदारों से मिलकर चेकडैम निर्माण के लिए पूल बना लिए। जो ठेकेदार पूल में शामिल नहीं हुए, उन्हें धमकी दी गई कि कोई न कोई तकनीकी खामी दर्शाते हुए उनके टेंडर निरस्त कर दिए जाएंगे। प्रत्येक चेकडैम का ठेका देने के एवज में तीन से पांच लाख रुपये रकम एडवांस वसूली गई। लेकिन, ये खेल पूरा हो पाता, इससे पहले ही विवाद खड़ा हो गया, जिससे चेकडैम के टेेंडर निरस्त कर दिए गए। जबकि, तालाब गहरीकरण के कार्यों की निविदा की तिथि 27 नवंबर से बढ़ाकर दो दिसंबर कर दी गई है।
विज्ञापन
लघु सिंचाई विभाग द्वारा 20 करोड़ से चेकडैम के साथ ही लगभग दस करोड़ रुपये की लागत से 40 तालाबों का गहरीकरण किया जाना है। लगभग तीस करोड़ रुपये की लागत से ये काम होने थे। कार्य आवंटन में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए ऑनलाइन निविदाएं मांगी गईं थीं। 21 नवंबर से निविदाएं डलना शुरू हुईं थीं। 26 नवंबर को चेकडैम की निविदाएं लॉक कर दी गईं थीं। जबकि 27 को तालाब गहरीकरण के कामों की निविदाएं लॉक की जानी थीं।
विज्ञापन
इससे पहले ही प्रक्रिया पर आरोप लगने लगे। आरोप था कि प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद भी ठेकेदारों के बीच पूल बन गया। शिकायत जिलाधिकारी के पास पहुंची। उन्होंने पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी मुख्य विकास अधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे को दी। जांच के लिए सीडीओ ने टेंडर प्रक्रिया का पूरा ब्योरा तलब किया। साथ ही, ठेकेदारों के बयान भी दर्ज किए गए। इसके बाद सीडीओ की ओर से चेकडैम की निविदाएं निरस्त करने की सिफारिश की गईं। इस आधार पर जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी ने निविदाएं निरस्त कर दीं हैं। आगे की जांच जारी है।
विज्ञापन
यह थी योजना
टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद भी आरोप लगे थे कि विभाग के कुछ कर्मचारियों ने ठेकेदारों से मिलकर चेकडैम निर्माण के लिए पूल बना लिए। जो ठेकेदार पूल में शामिल नहीं हुए, उन्हें धमकी दी गई कि कोई न कोई तकनीकी खामी दर्शाते हुए उनके टेंडर निरस्त कर दिए जाएंगे। प्रत्येक चेकडैम का ठेका देने के एवज में तीन से पांच लाख रुपये रकम एडवांस वसूली गई। लेकिन, ये खेल पूरा हो पाता, इससे पहले ही विवाद खड़ा हो गया, जिससे चेकडैम के टेेंडर निरस्त कर दिए गए। जबकि, तालाब गहरीकरण के कार्यों की निविदा की तिथि 27 नवंबर से बढ़ाकर दो दिसंबर कर दी गई है।