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मानदेय की रिकवरी में टीडीएस का पैसा बना रोड़ा, कौन करेगा भरपाई

Tue, 27 Oct 2020 01:42 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2020 01:42 AM IST
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TDS money Barrier, whose complete
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज से पासआउट 30 जूनियर और सीनियर डॉक्टरों को आठ महीने तक मानदेय जारी करने के मामले में एक और बड़ी खामी सामने आई है। मानदेय में कुछ का टीडीएस काटा गया है और कुछ का नहीं। मानदेय वापसी कराने में भी टीडीएस का कटा हुआ पैसा रोड़ा बन रहा है। जेआर, एसआर भुगतान का पैसा ही वापस करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि टीडीएस के पैसे की भरपाई कैसे की जाएगी।
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में वित्तीय अनियमितता का एक बड़ा मामला सामने आया है। कॉलेज से पासआउट होने के बाद भी 30 जूनियर और सीनियर रेजिडेंटों को आठ महीनों तक मानदेय दिया गया। इस दौरान एक करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया। मामले की जांच के लिए प्राचार्य ने जांच कमेटी का गठन कर दिया है। कमेटी को जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, सूत्रों ने बताया कि बाबू स्तर पर व्यापक लापरवाही की गई। जेआर, एसआर को न सिर्फ दोबारा मानदेय भेजा गया, बल्कि कुछ का टीडीएस काटा गया और कुछ का नहीं।
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बताया गया कि एक करोड़ रुपये में लगभग 10 लाख रुपये का टीडीएस कट गया है। मामला संज्ञान में आने के बाद मेडिकल कॉलेज अधिकारियों ने सतर्कता बरतते हुए लगभग 50 फीसदी पैसे की रिकवरी तो करा ली है लेकिन बाकी पैसे की रिकवरी में टीडीएस रोड़ा बन रहा है। दरअसल, कई जेआर, एसआर भुगतान हुआ पैसा ही वापस करने की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि कॉलेज स्तर से यह गड़बड़ी हुई है तो फिर वो क्यों टीडीएस के पैसे का भुगतान करें? ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि टीडीएस के पैसे की भरपाई कैसे की जाएगी।
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70 जेआर, 10 एसआर हर साल होते पासआउट
मेडिकल कॉलेज से हर साल लगभग 70 जेआर और 10 एसआर पासआउट होते हैं। पिछले साल भी यही स्थिति रही। यानी कि 80 जेआर, एसआर में से 30 की सैलरी भेजी जाती रही। अब यहां बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर गलती से बाबू ने सैलरी भेजी तो सभी को क्यों नहीं गईं। गिने-चुने लोगों के खाते में ही क्यों सैलरी भेजी जाती रही?

एरियर के भुगतान के लिए शासन से मांगा बजट
पासआउट जेआर, एसआर को महीनों भुगतान होने की वजह से कॉलेज का बजट लगातार कम होता गया। ऐसे में एरियर के भुगतान के लिए पर्याप्त बजट न उपलब्ध होने से शासन को पत्र लिखा गया। इसके बाद शासन ने मांग के अनुसार एरियर का पैसा भेजा।
ये सवाल खड़े हो रहे
- कॉलेज से पास होने के बाद जेआर, एसआर नोड्यूज बनवाते हैं, फिर बाबू कैसे रहा अनजान?
- हर महीने बाबू सैलरी बनाता है। उसे हर माह खर्च होने वाले बजट की जानकारी होती है फिर ज्यादा पैसा निकला तो उसने जांच क्यों नहीं की?
- विभाग प्रमुख जेआर, एसआर की उपस्थिति का सत्यापन कर बाबू के पास भेजते हैं, तब ही सैलरी बनती है। फिर लिपिक ने क्यों सैलरी बना दी?
- मानदेय भुगतान के दौरान कुछ का टीडीएस काटा गया और कुछ का नहीं? इतनी बड़ी चूकी आखिर कैसे की जाती रही?
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