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कोरोना काल में आतिशबाजी से सांस के रोगियों का घुटेगा दम, सैकड़ों हो सकते बीमार

Sun, 08 Nov 2020 12:27 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 08 Nov 2020 12:27 AM IST
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Swansh paisent dangerous to burst pollution in durring corona time
झांसी। दिवाली पर्व को एक सप्ताह भी नहीं बचा है मगर इससे पहले ही झांसी में प्रदूषण का ग्राफ बढ़ने लगा है। कोरोना काल में दिवाली पर आतिशबाजी करना और भी अधिक खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण से सांस के रोगियों का दम घुटेगा। यही नहीं, जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 250 के पार पहुंचने से सैकड़ों लोग बीमार भी हो सकते हैं।
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पिछले साल भी झांसी के लोगों ने दिवाली पर जमकर आतिशबाजी की थी। इस वजह से झांसी की आबोहवा बेहद खराब हो गई थी। वायु गुणवत्ता सूचकांक दो सौ को पार कर गया था। मौजूदा समय में पराली जलाने, वाहनों के चलते झांसी का एक्यूआई 150 के करीब पहुंच चुका है। वातावरण में चारों तरफ धुंध सी दिखाई देने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लोगों ने दिवाली पर जमकर आतिशबाजी की तो पिछले साल से भी खतरनाक स्थिति में झांसी का प्रदूषण पहुंच जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि एक्यूआई ढाई सौ तक पहुंच सकता है, जो कि कइयों को बीमार कर सकता है। इसके अलावा श्वांस रोगियों का सांस लेना तक दूभर हो जाएगा।
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ये जहरीली गैसें निकलतीं
पटाखों में सल्फर होता है। इसलिए पटाखों के कारण वायु में कार्बन मोनोडाइऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, पोटेशियम ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों की मात्रा काफी बढ़ जाती है। इससे फेफड़े, अस्थमा, सीओपीडी के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होती है। इसके साथ ही एलर्जिक ब्रॉन्काइटिस और एलर्जिक राइनाइटिस को भी बढ़ावा मिलता है।
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ये है प्रदूषण का मानक
रंग सूचकांक हालात
हरा 0 से 50 अच्छा
पीला 51 से 100 सामान्य
नारंगी 101 से 150 सेंसिटिव ग्रुप के लिख खतरा
लाल 151 से 200 गंभीर स्थिति
बैगनी 201 से 300 बेहद गंभीर
महरून 301 या ज्यादा इमरजेंसी हालात
वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर लोगों के लिए खतरनाक है। वहीं, कोरोना काल में दीपावली पर आतिशबाजी करना ठीक नहीं होगा। श्वांस रोगियों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। वहीं, कई लोगों को बिगड़ी आबोहवा बीमार कर सकती है। - डॉ. प्रिंस अग्रवाल, फिजीशियन।

प्रदूषण के मामले में झांसी का स्थिति नोएडा, दिल्ली समेत विभिन्न महानगरों की तुलना में काफी बेहतर है। वहां पर एक्यूआई 400 या उससे अधिक है। जिले में प्रदूषण करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। - निरंजन शर्मा, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी।
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