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Jhansi News: सुशीला और राजेंद्र ही लगातार दूसरी बार बने सांसद
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- सुजान सिंह को 15 साल के अंतराल के बाद मिला था दोबारा मौका
- बाकी में कोई हारा तो किसी को दूसरी बार पार्टी ने नहीं उतारा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। लोकसभा के अब तक हुए 17 चुनावों में झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र से केवल डा. सुशीला नैयर और राजेंद्र अग्निहोत्री को ही लगातार दूसरी बार संसद में जाने का मौका मिला। बल्कि, इन दोनों नेताओं के नाम चार-चार बार क्षेत्र का नेतृत्व करने का रिकॉर्ड दर्ज है। हालांकि, सुजान सिंह बुंदेला भी यहां से दो बार सांसद रहे, परंतु वे दूसरा चुनाव 15 साल के अंतराल के बाद जीते थे। बाकी अन्य में से किसी को दूसरी बार पार्टी का टिकट नहीं मिल पाया तो कोई टिकट हासिल करने के बाद चुनाव जीतने में कामयाब नहीं हो पाया।
सन 1952 में हुए लोकसभा के पहले चुनाव में झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी आचार्य रघुनाथ विनायक धुलेकर ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस के उस दौर के बड़े नेताओं में उनकी गिनती होने के बाद भी धुलेकर को दूसरी बार पार्टी का टिकट नहीं मिल पाया था। पं. जवाहर लाल नेहरू के साथ रिश्ते बिगड़ने की वजह से उन्हें प्रदेश की सियासत में वापस भेज दिया गया था। 1957 में हुए लोकसभा के दूसरे चुनाव में कांग्रेस ने डाॅ. सुशीला नैयर को प्रत्याशी बनाया था और अपने पहले ही चुनाव में उन्होंने जीत हासिल कर ली थी। इसके बाद उन्होंने 1962 और 1967 का लोकसभा चुनाव भी जीता था। जबकि, 1971 के चुनाव में कांग्रेस ने डाॅ. गोविंददास रिछारिया को मैदान में उतारा था और वे जीत हासिल करने में कामयाब हो गए थे। लेकिन, वे 1977 में हुए अगले चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाए थे। इस चुनाव में डाॅ. नैयर भारतीय लोकदल के टिकट पर संसद में पहुंचने में कामयाब हो गईं थीं। इसके बाद 1980 के लोकसभा चुनाव में पं. विश्वनाथ शर्मा यहां से जीते थे। हालांकि, वह दो बार सांसद रहे, लेकिन दूसरी बार वह 1991 में हमीरपुर सीट से संसद पहुंचे थे। झांसी से उन्हें दोबारा मौका नहीं मिल पाया। 1984 में कांग्रेस के टिकट पर सुजान सिंह बुंदेला पहली बार सांसद चुने गए थे। जबकि, दूसरी बार उन्हें संसद में जाने का अवसर 15 साल बाद 1999 में हासिल हुआ था। इस मामले में सबसे आगे नाम भाजपा के राजेंद्र अग्निहोत्री का आता है। उन्होंने 1989, 1991, 1996 और 1998 में लगातार चार बार जीत हासिल की थी। 2004 में सपा से चंद्रपाल सिंह यादव सांसद बने थे, लेकिन इसके बाद वह अगला चुनाव नहीं जीत पाए थे। 2009 में कांग्रेस से प्रदीप जैन ने जीत दर्ज की थी और उन्हें केंद्र सरकार में राज्यमंत्री भी बनाया गया था। लेकिन, उन्हें भी अगले चुनाव में हार का सामना करना पड़ गया था। साल 2014 में भाजपा ने मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को प्रत्याशी बनाया था। यहां से चुनाव जीतने के बाद उन्हें केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। लेकिन, अगले चुनाव में उन्हें यहां से नुमाइंदगी करने का मौका नहीं मिल पाया। 2019 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर अनुराग शर्मा ने जीत दर्ज की थी। भाजपा ने एक बार फिर उन्हें प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस के टिकट पर प्रदीप जैन भी फिर से मैदान में हैं।
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- बाकी में कोई हारा तो किसी को दूसरी बार पार्टी ने नहीं उतारा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। लोकसभा के अब तक हुए 17 चुनावों में झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र से केवल डा. सुशीला नैयर और राजेंद्र अग्निहोत्री को ही लगातार दूसरी बार संसद में जाने का मौका मिला। बल्कि, इन दोनों नेताओं के नाम चार-चार बार क्षेत्र का नेतृत्व करने का रिकॉर्ड दर्ज है। हालांकि, सुजान सिंह बुंदेला भी यहां से दो बार सांसद रहे, परंतु वे दूसरा चुनाव 15 साल के अंतराल के बाद जीते थे। बाकी अन्य में से किसी को दूसरी बार पार्टी का टिकट नहीं मिल पाया तो कोई टिकट हासिल करने के बाद चुनाव जीतने में कामयाब नहीं हो पाया।
सन 1952 में हुए लोकसभा के पहले चुनाव में झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी आचार्य रघुनाथ विनायक धुलेकर ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस के उस दौर के बड़े नेताओं में उनकी गिनती होने के बाद भी धुलेकर को दूसरी बार पार्टी का टिकट नहीं मिल पाया था। पं. जवाहर लाल नेहरू के साथ रिश्ते बिगड़ने की वजह से उन्हें प्रदेश की सियासत में वापस भेज दिया गया था। 1957 में हुए लोकसभा के दूसरे चुनाव में कांग्रेस ने डाॅ. सुशीला नैयर को प्रत्याशी बनाया था और अपने पहले ही चुनाव में उन्होंने जीत हासिल कर ली थी। इसके बाद उन्होंने 1962 और 1967 का लोकसभा चुनाव भी जीता था। जबकि, 1971 के चुनाव में कांग्रेस ने डाॅ. गोविंददास रिछारिया को मैदान में उतारा था और वे जीत हासिल करने में कामयाब हो गए थे। लेकिन, वे 1977 में हुए अगले चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाए थे। इस चुनाव में डाॅ. नैयर भारतीय लोकदल के टिकट पर संसद में पहुंचने में कामयाब हो गईं थीं। इसके बाद 1980 के लोकसभा चुनाव में पं. विश्वनाथ शर्मा यहां से जीते थे। हालांकि, वह दो बार सांसद रहे, लेकिन दूसरी बार वह 1991 में हमीरपुर सीट से संसद पहुंचे थे। झांसी से उन्हें दोबारा मौका नहीं मिल पाया। 1984 में कांग्रेस के टिकट पर सुजान सिंह बुंदेला पहली बार सांसद चुने गए थे। जबकि, दूसरी बार उन्हें संसद में जाने का अवसर 15 साल बाद 1999 में हासिल हुआ था। इस मामले में सबसे आगे नाम भाजपा के राजेंद्र अग्निहोत्री का आता है। उन्होंने 1989, 1991, 1996 और 1998 में लगातार चार बार जीत हासिल की थी। 2004 में सपा से चंद्रपाल सिंह यादव सांसद बने थे, लेकिन इसके बाद वह अगला चुनाव नहीं जीत पाए थे। 2009 में कांग्रेस से प्रदीप जैन ने जीत दर्ज की थी और उन्हें केंद्र सरकार में राज्यमंत्री भी बनाया गया था। लेकिन, उन्हें भी अगले चुनाव में हार का सामना करना पड़ गया था। साल 2014 में भाजपा ने मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को प्रत्याशी बनाया था। यहां से चुनाव जीतने के बाद उन्हें केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। लेकिन, अगले चुनाव में उन्हें यहां से नुमाइंदगी करने का मौका नहीं मिल पाया। 2019 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर अनुराग शर्मा ने जीत दर्ज की थी। भाजपा ने एक बार फिर उन्हें प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस के टिकट पर प्रदीप जैन भी फिर से मैदान में हैं।
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सतीश का फाइल फोटो। स्रोत : परिजन
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