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Jhansi News: जरूरी दवाओं की भी आपूर्ति अधूरी, इलाज में बाधा

Thu, 24 Sep 2026 02:17 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2026 02:17 AM IST
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Supply of essential medicines also inadequate. treatment hampered
मेडिकल कॉलेज को यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन से 1,132 में से 325 तरह की दवाएं ही मिल रहीं
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नीरज वर्मा
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में मरीजों के इलाज के लिए जरूरी दवाओं की पूरी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कॉलेज की दवा सूची में 1,132 तरह की दवाएं शामिल हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन से करीब 325 तरह की दवाएं ही मिल रही हैं। 807 तरह की दवाओं की आपूर्ति नहीं हो रही है। इसका सबसे ज्यादा असर इमरजेंसी, आईसीयू और वार्ड में भर्ती गंभीर मरीजों के उपचार पर पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज की दवा सूची में इंजेक्शन, टैबलेट, कैप्सूल, सिरप, ग्लूकोज समेत 1,132 तरह की दवाएं शामिल हैं। इनमें 768 ईडीएल (आवश्यक दवाएं) और 364 एसडीएल (मानक दवाएं) हैं। मुख्य फार्मासिस्ट के मुताबिक, कॉरपोरेशन से फिलहाल करीब 325 तरह की दवाओं की ही आपूर्ति हो पा रही है। अब चिकित्सकों के सामने भी दुविधा है कि अस्पताल में दवा उपलब्ध न होने पर मरीज को जरूरी दवा कैसे दी जाए।
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गंभीर मरीजों के इलाज में परेशानी
मेडिकल कॉलेज से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कई जरूरी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से गंभीर मरीजों के उपचार में परेशानी होती है। कार्डियक अरेस्ट में इस्तेमाल होने वाला एड्रेनालिन, धीमी धड़कन में उपयोग होने वाला एट्रोपिन, रक्त का थक्का बनने से रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाला हेपरिन, इंसुलिन, गंभीर संक्रमण में इस्तेमाल होने वाला मेरोपेनेम, उल्टी रोकने के लिए मेटोक्लोप्रमाइड और तेज दर्द में इस्तेमाल होने वाला ट्रामाडोल जैसी दवाओं की उपलब्धता भी प्रभावित है।
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इमरजेंसी और आईसीयू में मरीज की हालत गंभीर होने पर तत्काल दवा की जरूरत पड़ती है। अस्पताल में संबंधित दवा उपलब्ध न होने पर कई बार मरीज के परिजनों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है। चिकित्सकों का कहना है कि जरूरी दवा समय पर नहीं मिलने पर उपचार में देरी हो सकती है।

बाहर की दवा लिखें तो कार्रवाई का डर
नाम न छापने की शर्त पर चिकित्सकों ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर से दवा लिखने से बचने के निर्देश दिए जाते हैं। बाहर की दवा लिखने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी जाती है। ऐसे में अस्पताल में दवा उपलब्ध नहीं होने पर चिकित्सकों के सामने मुश्किल खड़ी हो जाती है।
चिकित्सकों के मुताबिक, उपलब्ध दवाओं से उपचार की कोशिश की जाती है, लेकिन हर मरीज की बीमारी और स्थिति के अनुसार जरूरी दवा अस्पताल में उपलब्ध हो, यह संभव नहीं हो पा रहा है। गंभीर मरीजों के मामले में यह समस्या ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

एक साल से पूरी आपूर्ति नहीं
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज को एक साल से कॉरपोरेशन की ओर से जरूरत के मुताबिक दवाओं की पूरी आपूर्ति नहीं मिल रही है। कॉलेज की दवा सूची में शामिल 1,132 तरह की दवाओं के मुकाबले करीब 325 तरह की दवाएं ही उपलब्ध हो पा रही हैं।
मुख्य फार्मासिस्ट भारत सिंह ने बताया कि कॉरपोरेशन के पास जिस दवा की उपलब्धता होती है, उसी के आधार पर अस्पतालों को आपूर्ति की जाती है। मेडिकल कॉलेज को करीब 325 तरह की दवाएं ही मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति केवल झांसी में नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में है।

पोर्टल पर दवा उपलब्ध होगी, तभी कर पाएंगे ऑर्डर
कॉरपोरेशन के पोर्टल पर दवा उपलब्ध होने पर ही उसका ऑर्डर किया जा सकता है। पोर्टल पर उपलब्धता नहीं होने के कारण मांग के अनुसार दवाओं की आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। - डॉ. सुधीर कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज


रोजाना हजारों मरीज, फिर भी दवाओं की कमी
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में औसतन करीब 3,000 मरीज पहुंचते हैं। यहां रोजाना 12 ऑपरेशन थिएटर (ओटी) भी संचालित होते हैं। बुंदेलखंड के इस प्रमुख सरकारी अस्पताल में इतनी बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार होता है। ऐसे में जरूरी दवाओं की पूरी आपूर्ति न होना मरीजों के उपचार और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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