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सुखनई : जन न प्रशासन ने ली सुधि

Sat, 18 Jan 2025 01:50 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jan 2025 01:50 AM IST
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Sukhnai: Administration did not take any notice of the people
- चार दशक पूर्व सुंदरता के साथ आध्यामिकता का केंद्र बिंदु थी नदी, सिंचाई के लिए थी प्रमुख साधन
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- खरबूजा उत्पादन का था प्रमुख केंद्र, यहां की बालू की भी दूर-दूर तक थी डिमांड

मऊरानीपुर। कस्बे की जीवनरेखा सुखनई नदी प्रशासन और लोगों की उपेक्षा से प्रदूषित हो गई है। कभी यहां ककड़ी, तरबूज व खरबूजा का उत्पादन काफी मात्रा में होता था और दूर-दूर तक जाता था। अब नदी के दोनों और सड़क बन जाने से खरबूजा आदि का उत्पादन कम होता जा रहा है।
नगर के बीच से बह रही सुखनई चार दशक पहले तक सुंदरता के साथ-साथ आध्यात्मिकता का केंद्र बिंदु थी। लोग नदी में नहाने के बाद इसके दोनों ओर स्थित मंदिरों में पूजा करने जाते थे, लेकिन यह नदी अब गंदगी से पटी पड़ी है। अविरल धारा नाले में तब्दील हो गई। अब एसटीपी प्लांट बनने का इंतजार है।
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कमला सागर बांध से लहचूरा बांध को सिंचाई के लिए पानी दिया जाता है। नदी किनारे पड़ने वाले खेतों में किसान इंजन से सिंचाई करते हैं। गर्मियों में सुखनई नदी में लोग ककड़ी, तरबूज, खरबूजा एवं नमकीन खरबूज (बंगा) आदि की खेती करते हैं। नमकीन खरबूजा का उत्पादन सिर्फ सुखनई नदी में होता है। इसे खाने के लिए लोग गर्मियों में लालायित रहते हैं। यह महंगा भी बिकता है, लेकिन शहरी क्षेत्र में सुखनई नदी के दोनों और सड़क बन जाने से अब ककड़ी, तरबूज व खरबूजा का उत्पादन कम होता जा रहा है। संवाद
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सुखनई की बालू बहुत अच्छी किस्म की मानी जाती है, जिसे दूर-दूर तक भेजा जाता है। यहां की बालू कानपुर, लखनऊ में तौल से बेची जाती है। इससे सरकार को राजस्व मिलता है। 30 वर्ष पूर्व तक जहां लोग सुखनई का पानी पीने के लिए इस्तेमाल करते थे और इसमें नहाते थे। लोग गर्मियों में नदी की बालू में रात्रि में सोते थे। वहीं, नदी अब इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि इसका पानी नहाने के लायक नहीं रह गया है।



लोगों ने दिए सुझाव

सुखनई में बहने वाले नालों को दूसरी ओर भेजे जाने की जरूरत है। तभी नदी का पानी शुद्ध हो पाएगा

-राजेंद्र चौधरी, सदस्य, गहोई समाज



सुखनई की नियमित सफाई की जाए तो यह पवित्र व शुद्ध हो जाएगी।
-रोमी कठिल


नदी से सिल्ट निकाले जाने और गंदे नालों का पानी रोके जाने पर ही यह शुद्ध हो सकेगी।
-चंचल कंथारिया, जिला मंत्री, भाजपा



एक वर्ष पूर्व एसटीपी का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। इसमें नदी में नगर के गिर रहे नालों को इसके किनारे एक बड़े नाले में डालकर चेकडैम के बाहर आसरा आवास के पास प्लांट लगाया जाना था। प्लांट का प्रस्ताव 27 करोड़ का भेजा गया था, लेकिन शासन ने प्रस्ताव को बढ़ाकर 40 करोड़ का पास कर दिया है। इसका सर्वे जल निगम की ओर से शुरू कर दिया गया है। - आयुष श्रीवास, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि
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