झांसी। यूक्रेन से लौटे छात्रों को अब कॅरियर की चिंता सताने लगी है। मौजूदा समय में जो वहां तबाही मची है, उससे उबरने में कितना समय लग जाएगा ये किसी को नहीं पता है। छात्रों को अब एक सेमेस्टर खराब होने की आशंका जताने लगी है। या फिर वो किसी यूरोपियन देश में ट्रांसफर भी करा सकते हैं। ऐसे में उनको दोबारा फीस का भुगतान करना पड़ जाएगा।
यूक्रेन से झांसी, ललितपुर लौटे छात्रों ने बताया कि रूस के साथ चल रहे युद्ध से वहां के स्थिति बेपटरी हो चुकी है। जून में ही छात्रों की परीक्षाएं प्रस्तावित थीं। खासकर अंतिम वर्ष के छात्रों को तो दो महीने बाद ही डिग्री मिलनी थी। इससे पहले ही युद्ध छिड़ जाने की वजह से छात्रों को समझ नहीं आ रहा है कि कैसे और कब तक उनकी पढ़ाई पूरी हो पाएगी। छात्रों ने कहा कि यही हालात रहे तो छह महीने की पढ़ाई पीछे हो सकती है। इससे उन्हें एक सेमेस्टर का नुकसान हो सकता है। वहीं, एक छात्र ने कहा कि जर्मनी को छोड़कर सभी यूरोपियन देशों में यूरोपियन क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम (ईसीटीएस) लागू है। यानी कि जितना भी उन्होंने पढ़ा है, वो सब क्रेडिट में दर्ज हो जाता है। ये डाटा पूरा ऑनलाइन होता है। ऐसे में छात्रों के पास रूस, पोलैंड, रोमानिया, हंगरी, एस्टोनिया, लातविया आदि देशों की मेडिकल यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर करा सकते हैं। हालांकि, नई यूनिवर्सिटी में प्रवेश के लिए फिर से फीस देनी पड़ सकती है।