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अपना अंकपत्र ठीक कराने के लिए भटक रहे छात्र
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झांसी। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा सैकड़ों बच्चों को उपलब्ध कराए गए अंकपत्रों पर अंक ही नहीं चढ़े हैं। नंबर कैसे चढ़ेंगे, इसका जवाब न तो विद्यालय दे पा रहे हैं और न ही विभाग। अंकपत्र दुरुस्त कराने के लिए बच्चे स्कूल और विभाग के बीच फुटबॉल बने हुए हैं।
शासन ने कोरोना काल में यूपी बोर्ड की परीक्षाएं ऑनलाइन न कराकर पिछले अंकों के आधार पर उन्हें प्रोमोशन दे दिया। इसमें बच्चे पास तो हो गए लेकिन सैकड़ों विद्यार्थी अंकपत्र में मिले नंबरों से संतुष्ट नहीं हैं। सबसे अधिक दिक्कत तो उन छात्रों को है जिनके अंकपत्र में नंबर ही नहीं दिए गए हैं जिससे वे अधर में लटके हुए हैं। छात्र जब स्कूल पर जा रहे हैं तो उन्हें अधिकारियों के पास भेजा रहा है जबकि अधिकारी उन्हें विद्यालयों से संपर्क करने की सलाह दे रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे छात्र पुन: परीक्षा में बैठ सकते हैं। वहीं, छात्रों का कहना है कि जब तक हमारे अंक नहीं मिलते हम कैसे मान लें कि हम अपने परीक्षाफल से संतुष्ट हैं या नहीं। अधिकांश बच्चों का कहना है कि एक बार शिकायत की थी, तब से प्रधानाचार्यों द्वारा फिर से परीक्षा देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है ताकि वे अपनी कमियों को छिपा सकें। इसके लिए वे हम लोगों और हमारे अभिभावकों पर लिखित प्रार्थना पत्र देने के लिए दबाव डाल रहे हैं।
परीक्षाफल में त्रुटियां आई हैं। त्रुटियों के निराकरण के लिए बोर्ड ने उन्हें दोबारा परीक्षा में बैठने की अनुमति दी है। इसमें ऐसे छात्र भी शामिल हैं जिनके अंकपत्र पर नंबर नहीं हैं। त्रुटियों को दूर कराने के लिए वे अपने विद्यालय से संपर्क करें। इसके लिए विद्यालय बोर्ड से पत्राचार कर सकते हैं।
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- कोमल यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक
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शासन ने कोरोना काल में यूपी बोर्ड की परीक्षाएं ऑनलाइन न कराकर पिछले अंकों के आधार पर उन्हें प्रोमोशन दे दिया। इसमें बच्चे पास तो हो गए लेकिन सैकड़ों विद्यार्थी अंकपत्र में मिले नंबरों से संतुष्ट नहीं हैं। सबसे अधिक दिक्कत तो उन छात्रों को है जिनके अंकपत्र में नंबर ही नहीं दिए गए हैं जिससे वे अधर में लटके हुए हैं। छात्र जब स्कूल पर जा रहे हैं तो उन्हें अधिकारियों के पास भेजा रहा है जबकि अधिकारी उन्हें विद्यालयों से संपर्क करने की सलाह दे रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे छात्र पुन: परीक्षा में बैठ सकते हैं। वहीं, छात्रों का कहना है कि जब तक हमारे अंक नहीं मिलते हम कैसे मान लें कि हम अपने परीक्षाफल से संतुष्ट हैं या नहीं। अधिकांश बच्चों का कहना है कि एक बार शिकायत की थी, तब से प्रधानाचार्यों द्वारा फिर से परीक्षा देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है ताकि वे अपनी कमियों को छिपा सकें। इसके लिए वे हम लोगों और हमारे अभिभावकों पर लिखित प्रार्थना पत्र देने के लिए दबाव डाल रहे हैं।
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परीक्षाफल में त्रुटियां आई हैं। त्रुटियों के निराकरण के लिए बोर्ड ने उन्हें दोबारा परीक्षा में बैठने की अनुमति दी है। इसमें ऐसे छात्र भी शामिल हैं जिनके अंकपत्र पर नंबर नहीं हैं। त्रुटियों को दूर कराने के लिए वे अपने विद्यालय से संपर्क करें। इसके लिए विद्यालय बोर्ड से पत्राचार कर सकते हैं।
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- कोमल यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक