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चुनावी शोरगुल के बीच शांत है छात्र राजनीति

Mon, 24 Jan 2022 12:54 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jan 2022 12:54 AM IST
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Student politics is quiet between electoral noise
झांसी। विधानसभा का चुनाव हो या लोकसभा का, सभी में छात्र नेता अहम भूमिका अदा करते आए हैं। लेकिन, इस बार विधानसभा चुनाव के शोरगुल के बीच छात्र राजनीति एकदम मौन नजर आ रही है। इसकी प्रमुख वजह पिछले कई सालों से कॉलेजों में छात्रसंघ के चुनाव का न होना है। जबकि, शिक्षण संस्थानों से क्षेत्र के कई दिग्गज नेता निकले हैं।
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एक समय बुंदेलखंड महाविद्यालय में होने वाले छात्रसंघ चुनाव की गूंज पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में सुनाई देती थी। छात्रसंघ अध्यक्ष का रुतबा विधायक से कम नहीं हुआ करता था। इसके अलावा बिपिन बिहारी महाविद्यालय, आर्य कन्या महाविद्यालय तथा मऊरानीपुर के अग्रसेन महाविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव भी चर्चाओं में रहते थे। आगे चलकर छात्रसंघ के यही नेता सार्वजनिक राजनीति का हिस्सा हो जाते थे। इनमें से कई छात्र नेता राजनीति में ऊंचा मुकाम भी हासिल कर चुके हैं। लेकिन, पिछले आठ सालों से कॉलेजों में छात्रसंघ के चुनाव नहीं हुए हैं। इसका असर चुनाव में भी नजर आ रहा है। किसी जमाने में छात्रसंघ के नेता प्रत्याशियों की रीढ़ हुआ करते थे, लेकिन अब छात्र नेता अलग-अलग दलों के कार्यकर्ताओं के रूप में चुनाव में अपनी सक्रियता निभाते नजर आ रहे हैं।
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छात्र राजनीति शुरुआत करने वाला नेता राजनीति के हर उतार - चढ़ाव को आसानी से समझ जाता है। राजनीति में अच्छे नेताओं की भागीदारी बढ़े, इसके लिए छात्रसंघ के चुनाव होना जरूरी हैं।
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- प्रगति शर्मा, पूर्व अध्यक्ष- आर्यकन्या महाविद्यालय
छात्रसंघ को राजनीति की पहली पाठशाला माना जाता है। छात्रसंघ चुनाव से छात्रों में नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। छात्र राजनीति से निकले कई नेता देश की राजनीति में ऊंचा मुकाम हासिल कर चुके हैं।
- जितेंद्र सिंह गुुर्जर, पूर्व अध्यक्ष - बुंदेलखंड महाविद्यालय
छात्र राजनीति करते हुए छात्र नेता राजनीति की हर बारीकी को अच्छी तरह से समझ जाते हैं। यही वजह है कि सार्वजनिक राजनीति में प्रवेश करने में उन्हें किसी तरह की कठिनाई नहीं होती है।
- कुलविंदर सिंह छतवाल, पूर्व अध्यक्ष - बिपिन बिहारी कॉलेज
राजनीति लोकतंत्र का बेहद अहम हिस्सा है। विद्यार्थियों को इसकी जानकारी छात्र जीवन से ही दी जानी चाहिए। ये काम कॉलेजों में होने वाले छात्रसंघ चुनाव के जरिये आसानी से हो जाता था।
- मानसिंह यादव, पूर्व अध्यक्ष- बुंदेलखंड महाविद्यालय
बुंदेलखंड के इतिहास पर नजर दौड़ाई जाए, तो यहां कई बड़े नेता छात्र राजनीति से होकर ही निकले हैं। छात्रसंघ की राजनीति के जरिये छात्रों में राजनीति की बेहतरीन समझ पैदा हो जाती है।

- अमित साहू, पूर्व अध्यक्ष - बुंदेलखंड महाविद्यालय
सभी चुनावों में छात्र नेताओं की अहम भूमिका हुआ करती थी। छात्रसंघ के पदाधिकारी हवा का रुख मोड़ने की क्षमता रखते थे। छात्रसंघ चुनाव न होने की वजह से छात्र नेताओं की कमी खल रही है।
- देवेंद्र दुबे, पूर्व अध्यक्ष - बुंदेलखंड महाविद्यालय
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