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आईटीआई के छात्र ने बनाया बिजली बचाने का फार्मूला
jhansi
Updated Tue, 16 Jan 2018 12:53 AM IST
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education news
- फोटो : demo pic
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मोंठ से आईटीआई कर रहे छात्र अनुज विश्वकर्मा ने अपने साथियों के साथ मिलकर बिजली की बचत के लिए ऑटो स्ट्रीट लाइट नामक प्रोजेक्ट बनाया है। प्रोजेक्ट की मदद से स्ट्रीट लाइटों का न सिर्फ जरूरत पर उपयोग किया जा सकेगा। बल्कि दिन में स्ट्रीट लाइटें जलेंगी भी नहीं। प्रोजेक्ट तैयार करने में आईआर सेंसर, प्रीसेट, बैटरी, सोलर प्लेटें का किया उपयोग, एलईडी सेंसर का प्रयोग किया गया है।
अनुज ने बताया कि सड़क, हाईवे की स्ट्रीट लाइटें सारी रात जलती रहती हैं, जिससे बिजली की काफी खपत होती है। प्रोजेक्ट के तहत स्ट्रीट लाइटें तब जलेंगी, जब कार उन लाइटों के पास से गुजरे।
इसके लिए सड़क पर आईआर सेंसर लगाया जाएगा। आईआर सेंसर से किरणें निकलती हैं। ऐसे में वाहन, मनुष्य या किसी अन्य के किरणों के संपर्क में आने पर आगे की स्ट्रीट लाइटें जल जाएगी। जैसे-जैसे वाहन, मनुष्य आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे पीछे की लाइटें बंद होती जाएंगी। प्रोजेक्ट में प्रीसेट का भी प्रयोग किया गया है, जिसके जरिए सेंसर के संपर्क में आने वाले वाहन, मनुष्य की रेंज को कम या ज्यादा किया जा सकता है। प्रोजेक्ट में डे-नाइट का एक सर्किट भी लगाया गया है। इसकी मदद से निर्धारित रोशनी पर ही लाइटें जलेंगी। ऐसे में स्ट्रीट लाइटों को दिन में बेवजह जलने से रोका जा सकेगा। प्रोजेक्ट में एलईडी सेंसर, बैटरी, सोलर प्लेटें आदि का इस्तेमाल हुआ है। अनुज के साथ प्रोजेक्ट तैयार करने में निशांत पाखरे, शिवम सोनी ने भी सहयोग किया है।
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कई जगह हो सकता उपयोग
ऑटो स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट का कई जगहों पर उपयोग किया जा सकता है। घर, कॉलोनियों, अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, मेडिकल कॉलेज, पार्कों समेत कई जगहों पर प्रोजेक्ट का इस्तेमाल करके बिजली की खपत कम की जा सकती है। खास बात ये है कि प्रोजेक्ट में सोलर लाइट्स का प्रयोग हुआ है। ऐसे में सूर्य की रोशनी से लाइटें चार्ज होंगी।
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अनुज ने बताया कि सड़क, हाईवे की स्ट्रीट लाइटें सारी रात जलती रहती हैं, जिससे बिजली की काफी खपत होती है। प्रोजेक्ट के तहत स्ट्रीट लाइटें तब जलेंगी, जब कार उन लाइटों के पास से गुजरे।
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इसके लिए सड़क पर आईआर सेंसर लगाया जाएगा। आईआर सेंसर से किरणें निकलती हैं। ऐसे में वाहन, मनुष्य या किसी अन्य के किरणों के संपर्क में आने पर आगे की स्ट्रीट लाइटें जल जाएगी। जैसे-जैसे वाहन, मनुष्य आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे पीछे की लाइटें बंद होती जाएंगी। प्रोजेक्ट में प्रीसेट का भी प्रयोग किया गया है, जिसके जरिए सेंसर के संपर्क में आने वाले वाहन, मनुष्य की रेंज को कम या ज्यादा किया जा सकता है। प्रोजेक्ट में डे-नाइट का एक सर्किट भी लगाया गया है। इसकी मदद से निर्धारित रोशनी पर ही लाइटें जलेंगी। ऐसे में स्ट्रीट लाइटों को दिन में बेवजह जलने से रोका जा सकेगा। प्रोजेक्ट में एलईडी सेंसर, बैटरी, सोलर प्लेटें आदि का इस्तेमाल हुआ है। अनुज के साथ प्रोजेक्ट तैयार करने में निशांत पाखरे, शिवम सोनी ने भी सहयोग किया है।
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कई जगह हो सकता उपयोग
ऑटो स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट का कई जगहों पर उपयोग किया जा सकता है। घर, कॉलोनियों, अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, मेडिकल कॉलेज, पार्कों समेत कई जगहों पर प्रोजेक्ट का इस्तेमाल करके बिजली की खपत कम की जा सकती है। खास बात ये है कि प्रोजेक्ट में सोलर लाइट्स का प्रयोग हुआ है। ऐसे में सूर्य की रोशनी से लाइटें चार्ज होंगी।