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छात्र-छात्राओं को मिला अंतरिक्ष विज्ञान का ज्ञान

Sat, 19 Oct 2019 01:15 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 19 Oct 2019 01:15 AM IST
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student know sapace scince specifics
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के राजीव गांधी इंडोर स्टेडियम में इसरो द्वारा विक्रम साराभाई अंतरिक्ष
छात्र-छात्राओं को मिला अंतरिक्ष विज्ञान का ज्ञान
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के राजीव गांधी इंडोर स्टेडियम में इसरो की ओर से लगाई गई विक्रम साराभाई अंतरिक्ष प्रदर्शनी में शुक्रवार को विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों के छात्र-छात्राओं की भीड़ उमड़ी। इस दौरान कई मॉडलों के जरिये अंतरिक्ष अनुसंधान की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से रूबरू कराया गया। इसके अलावा उन्हें इसरो की गतिविधियों, उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी गई। प्रदर्शनी 20 अक्तूबर तक चलेगी।
प्रदर्शनी में लगाए गए मॉडल ऑडियो विजुअल उपकरणों, स्टेटिक पैनल, डिस्प्ले बोर्ड की कार्यविधि को समझने में विद्यार्थियों ने गहरी रुचि दिखाई। प्रदर्शनी में 16 से अधिक मॉडल रखे गए हैं। इनमें आर्य भट्ट, भास्कर-1, एप्पल, रीसेट प्रथम, आईआरएसए समेत कई माडल और उपकरण शामिल हैं। इसरो की ओर से उसके उद्भव व विकास से संबंधित चार लघु फिल्में भी छात्र-छात्राओं को दिखाई गई। प्रदर्शनी के संयोजक डॉ. ऋषि कुमार सक्सेना ने बताया कि झांसी के 21 स्कूलों, कॉलेजों के दो हजार से अधिक छात्र-छात्राएं प्रदर्शनी को देखने के लिए पहुंचे। यह प्रदर्शनी 20 अक्तूबर तक चलेगी। छात्र-छात्राओं से लेकर आम जनता तक प्रदर्शनी में आकर अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियां जान सकता है।
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इससे पूर्व सुबह चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के पूर्व कुलपति प्रो. एसपी ओझा, इसरो के वैज्ञानिक डॉ. सतीश राव और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन ने प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस दौरान कुलपति ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र मेें निरंतर प्रगति हो रही है लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत की प्रगति भी एक मील का पत्थर मानी जा सकती है। उन्हाेेंने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनियों का आयोजन लगातार और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में होना चाहिए। ताकि, ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी भी विज्ञान के इस क्षेत्र के प्रति आकर्षित हों।
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इस मौके पर डीन एकेडमिक प्रो. एसपी सिंह, डीन साइंस प्रो. एमएम सिंह, डीन आर्ट्स प्रो. सीबी सिंह, डीन इंजीनियरिंग प्रो. एसके कटियार, प्रो. सुनील काबिया, इंजी. राहुल शुक्ला, प्रो. प्रतीक अग्रवाल, प्रो. आरके सैनी, आर्मी स्कूल बबीना कैंट के विज्ञान समन्वयक देवेंद्र दीक्षित, डॉ. धीरेंद्र यादव, डॉ. जेपी यादव, डॉ. मो. नईम, डॉ. इकबाल खान, डॉ. नेहा मिश्रा, डॉ. लवकुश द्विवेदी, डॉ. राजीव बबेले, डॉ. अनिल झरबड़े व अनिल बोहरे आदि मौजूद रहे।
चंद्रयान-2 रहा आकर्षण का केंद्र
इसरो की प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं के लिए जानने के लिए बहुत कुछ है। यहां एसएलवी-3 से लेकर चंद्रयान-2 तक के मॉडल हैं। उपग्रह प्रक्षेपण यान या एसएलवी परियोजना इसरो की ओर से 1970 के दशक में शुरू की गई, जो उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए जरूरी प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए की गई थी। उपग्रह प्रक्षेपण यान का उद्देश्य चार सौर किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचना और 40 किलो के पेलोड को कक्षा में स्थापित करना था। अगस्त 1979 में इसकी पहली प्रायोगिक उड़ान हुई लेकिन यह विफल रही। वहीं, एसएलवी-3 मिशनों से प्राप्त अनुभवों के आधार पर बने एएसएलवी के मॉडल भी उपलब्ध हैं। यहां उपलब्ध पीएसएलवी के मॉडल भी हैं, जो भारत की तृतीय पीढ़ी का रॉकेट है। इस रॉकेट ने सफलतापूर्वक दो अंतरिक्षयान वर्ष 2008 में चंद्रयान-1 और 2013 में मंगल कक्षित्र अंतरिक्षयान का प्रमोचन किया। इन्होंने क्रमश: चंद्र और मंगल तक यात्रा की। इसके अलावा यहां पर जीएसएलवी मार्क तीन का मॉडल भी है, जिसे चंद्रयान-2 में उपयोग किया गया। लाइटिंग होने के कारण यह विद्यार्थियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

मौसम की जानकारी देने वाले सेटेलाइट भी
प्रदर्शनी में मौसम का पूर्वानुमान से लेकर आतंकी गतिविधि तक की जानकारी कैसे होती है, इसके उपकरणों के मॉडलों का भी प्रदर्शन किया गया है। यहां रडार इमेजिंग सेटेलाइट है, जो कि मौसम की संभावना बताती है। कब तूफान आएगा, बारिश होगी या सूखा पड़ेगा आदि के बारे में इससे पता लगाते हैं। वहीं, 2005 में लांच किया गया कार्टोसा सेटेलाइट का मॉडल भी है। इसकी अब तक आठ सीरीज लांच हो चुकी हैं। इससे आतंकी ठिकानों तक का पता लगाया जाता है। इसमें पैन्क्रोमेटिक लेंस का उपयोग किया जाता है, जिसके जरिए मानव आंख की तरह सेटेलाइट से आतंकी ठिकानों की जानकारी मिलती है। नवंबर तक कार्टोसा-3 लांच होने जा रही है।
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