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अनाज को धूप में सुखाकर करें भंडारण

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2020 12:38 PM IST
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store grain after drying in sun light
कटाई के बाद अनाज का भंडारण करने में किसानों को आ रही दिक्कत को लेकर रानी  लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विवि ने एडवाइजरी जारी की है। विवि के निदेशक  प्रसार शिक्षा डॉ. एसएस सिंह, वैज्ञानिक डा. विजय कुमार मिश्रा, डॉ. ऊषा और  डॉ. एम सोनिया देवी ने बताया कि मौजूदा दौर में मड़ाई के बाद अनाजों को  भंडारित करने की प्रक्रिया चल रही है। किसान भंडार गृह को अच्छी तरह से  साफ  कर लें और फि र भंडार गृह को धूएं से उपचारित करें। भंडारित करने वाले  अनाज को सूरज की कड़ी रोशनी में सुखाएं। अनाज फ सलों के लिये 13 प्रतिशत,  दलहनी फ सलों के लिये 14.15 प्रतिशत नमी पर भंडारण करना चाहिये अन्यथा  कीड़ों का प्रकोप बढ़ जाता है। देशी विधि जैसे नीम की पत्तियों को सुखाकर  नमक और सरसों के तेल में मिला कर प्रति 1 क्विंटल अनाज मिश्रित करके भंडारण  में रख दें। नीम की पत्ती, गोट खरपतवार की पत्ती और लहसुन 2:1:1 अनुपात में  सुखा कर मिश्रण तैयार करें। इस मिश्रण में 500 मिली सरसों अथवा 50 मिली  अरंडी अथवा अलसी का तेल मिलाएं। एक क्विंटल अनाज को उपचारित कर भंडारण के  लिए पर्याप्त है। इससे कीटों से अनाज बचाया जा सकता है। कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने बुंदेलखण्ड में मोटे अनाजों के उत्पादन पर  जोर दिया है। मोटे अनाज ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी के सेवन से कोरोना के  प्रति अवरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के  निदेशक शिक्षा डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि मंडुआ जैसी छोटे दाने वाली मिलेट  फ सल में शरीर के लिये अमीनो एसिड से युक्त  प्रोटीन के अलावा देर से पचने  वाले कार्बोहाइड्रेट एवं हड्डियों को मजबूती प्रदान करने वाले अवयव पाये  जाते हैं। इन फसलों में डायबिटीज, ह्नदयरो, आस्टीयोफेरोसिस, रोग प्रतिरोधक  क्षमता बढ़ाने एवं पाचन तंत्र मजबूत करने की क्षमता होती है। डॉ. एआर शर्मा  ने बताया कि दलहनी, तिलहनी फ सलों के अलावा मोटे अनाज की फ सलों को  बुंदेलखंड क्षेत्र में बढ़ावा देने हेतु पहल की गई है। जो किसान इन फ सलों  का उत्पादन करना चाहते हैं वह विश्वविद्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
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