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स्टोनडस्ट के दाम दोगुने
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 06 Apr 2017 12:47 AM IST
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स्टोनडस्ट
- फोटो : demo
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सत्ता परिवर्तन के बाद बालू का अवैध खनन क्या बंद हुआ कि स्टोनडस्ट के दाम दोगुने हो गए। 15 सौ रुपये ट्राली वाली स्टोनडस्ट अब तीन हजार और 32 सौ तक में मिल रही है।
चेकिंग अभियान चल रहा है, यदि जांच के दौरान बालू से भरा कोई ट्रैक्टर या ट्रक पकड़ा जाता है, तो उसे सीधा थाने भेज दिया जाता है। इसका असर अवैध खनन कारोबारियों पर तो पड़ा ही है, नगर निगम क्षेत्र के ठेकेदार भी इससे परेशान हो गए हैं। जो भी काम चल रहे थे, बालू नहीं मिलने के कारण ठप कर दिए गए हैं।
इसका असर स्टोनडस्ट पर पड़ा है। कीमत अचानक दो गुनी हो गई है। पहले जहां 12 सौ रुपये से लेकर 15 सौ रुपये ट्राली डस्ट मिल रही थी, अब इसके दाम तीन हजार से 32 सौ रुपये प्रति ट्राली हो गए हैं। इसमें भी मिलावट की जा रही है। यदि पचास प्रतिशत तक गिट्टी मिली है तो दाम कम हो जाता है। यदि बिना गिट्टी के डस्ट बेची जा रही है तो दाम में दो सौ से पांच सौ रुपये तक का अंतर आ जाता है। यदि डंपर से डस्ट मंगाई जाती है तो 12 हजार रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक खर्च हो रहे हैं। इससे ठेकेदारों को नुकसान हो रहा है। क्योंकि, डस्ट बालू से पांच सौ से आठ सौ रुपये ट्राली महंगी पड़ रही है।
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मजबूरन काम बंद करना पड़ा
बालू की अचानक कमी हो जाने के कारण उन्हें काम बंद करना पड़ गया है। अभी डस्ट की स्वीकार्यता नहीं है। ऊपर से एमएम-11 नहीं लगाने पर रायल्टी का छह गुना देना पड़ रहा है। यदि यही हाल रहा तो ठेकेदारी बंद करनी पड़ेगी।
- ओमबिहारी भार्गव
ठेकेदार
बालू नहीं मिलने से काम ठप
बालू नहीं मिल पा रही है। इस कारण काम ठप हो गया है। डस्ट को ग्राहक पसंद नहीं कर रहे हैं, जबकि डस्ट और सीमेंट का ज्वाइंट बहुत मजबूत होता है। जब तक लोगों की धारणा नहीं बदलेगी, तब तक कोई रास्ता नहीं है।
- आशीष उपाध्याय
प्राइवेट कालोनाइजर
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चेकिंग अभियान चल रहा है, यदि जांच के दौरान बालू से भरा कोई ट्रैक्टर या ट्रक पकड़ा जाता है, तो उसे सीधा थाने भेज दिया जाता है। इसका असर अवैध खनन कारोबारियों पर तो पड़ा ही है, नगर निगम क्षेत्र के ठेकेदार भी इससे परेशान हो गए हैं। जो भी काम चल रहे थे, बालू नहीं मिलने के कारण ठप कर दिए गए हैं।
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इसका असर स्टोनडस्ट पर पड़ा है। कीमत अचानक दो गुनी हो गई है। पहले जहां 12 सौ रुपये से लेकर 15 सौ रुपये ट्राली डस्ट मिल रही थी, अब इसके दाम तीन हजार से 32 सौ रुपये प्रति ट्राली हो गए हैं। इसमें भी मिलावट की जा रही है। यदि पचास प्रतिशत तक गिट्टी मिली है तो दाम कम हो जाता है। यदि बिना गिट्टी के डस्ट बेची जा रही है तो दाम में दो सौ से पांच सौ रुपये तक का अंतर आ जाता है। यदि डंपर से डस्ट मंगाई जाती है तो 12 हजार रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक खर्च हो रहे हैं। इससे ठेकेदारों को नुकसान हो रहा है। क्योंकि, डस्ट बालू से पांच सौ से आठ सौ रुपये ट्राली महंगी पड़ रही है।
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मजबूरन काम बंद करना पड़ा
बालू की अचानक कमी हो जाने के कारण उन्हें काम बंद करना पड़ गया है। अभी डस्ट की स्वीकार्यता नहीं है। ऊपर से एमएम-11 नहीं लगाने पर रायल्टी का छह गुना देना पड़ रहा है। यदि यही हाल रहा तो ठेकेदारी बंद करनी पड़ेगी।
- ओमबिहारी भार्गव
ठेकेदार
बालू नहीं मिलने से काम ठप
बालू नहीं मिल पा रही है। इस कारण काम ठप हो गया है। डस्ट को ग्राहक पसंद नहीं कर रहे हैं, जबकि डस्ट और सीमेंट का ज्वाइंट बहुत मजबूत होता है। जब तक लोगों की धारणा नहीं बदलेगी, तब तक कोई रास्ता नहीं है।
- आशीष उपाध्याय
प्राइवेट कालोनाइजर