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मसाला कारोबार को झटका
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Apr 2017 01:28 AM IST
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- फोटो : demo
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अवैध बूचड़खानों के खिलाफ अभियान का असर मसाला कारोबार पर भी पड़ा है। बिक्री में पचास फीसदी तक गिरावट आई है। डिमांड में कमी होने के कारण दाम भी करीब 20 फीसदी तक गिर गए हैं।
मांसाहारी व्यंजन कोरमा, क ढ़ाई कोरमा, बिरयानी, फ्राई चाप, कबाब, नहारी में मसालों का खूब प्रयोग होता है। इससे काली मिर्च, जायफल, दालचीनी, तेज पत्ता आदि मसालों की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है। लेकिन, अवैध बूचड़खानों के बंद होने से भैंसा और बकरा के मांस की बिक्री ठप हो गई है। महानगर में सिर्फ मुर्गा-मछली का मीट ही बिक रहा है। ऐसे में मसाला बाजार क ो जबरदस्त झटका लगा है। होटलों और घरों में नॉनवेज की खपत कम होने से मसालों की बिक्री भी ठंडी पड़ गई है। दुकानदारों के अनुसार सर्वाधिक असर गरम मसाला पर पड़ा है। मांग कम होने से बिक्री में 40 से 50 फीसदी गिरावट आई है। वहीं, दाम भी 20 प्रतिशत तक कम हो गए हैं। उल्लेखनीय है कि शहर के प्रमुख किराना बाजार सुभाष गंज में लगभग दो दर्जन ऐसी दुकानें हैं, जहां वेज और नानवेज मसाला तैयार किया जाता है। महानगर के छोटे-बडे़ होटलों, ढाबों और घरों में मसाले की सप्लाई यहीं के बाजार से होती है।
आधी रह गई है सप्लाई
मसालों की बिक्री आधी से भी कम हो गई है। पहले गरम मसाला की बिक्री प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार रुपये तक होती थी, लेकिन अब यह नहीं है। मसालों में सिर्फ हल्दी और धना ही बिक रहा है। - विशाल साहू, मसाला कारोबारी
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मसाला कारोबार में मंदी का दौर
मीट सप्लाई प्रभावित होने से गरम मसाल कारोबार में मंदी जैसे हालात हैं। दालचीनी, जायफल की बिक्री बेहद कम हो गई है। मांग घटने से मसालों के दामों में भी एकाएक अंतर आया है। - बलराम साहू, मसाला विक्रेता
दाम हुए धड़ाम
दुकानदारों ने बताया 1500 रुपये किलो मिलने वाला खड़ा गरम मसाला अब 1200 और 1000 रुपये में मिल रहा है। जायपत्ती 1200 रुपये से 1000 मेें, 120 रुपये प्रतिकिलो वाला धना 100 रुपये में, काली मिर्च 800 रुपये से गिरकर 650 में, लाल मिर्च 110 रुपये से कम होकर 90 में, लौंग 850 की बजाय 700 रुपये किलो हो गई है। हालांकि, स्याही जीरा के दाम यथावत है।
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मांसाहारी व्यंजन कोरमा, क ढ़ाई कोरमा, बिरयानी, फ्राई चाप, कबाब, नहारी में मसालों का खूब प्रयोग होता है। इससे काली मिर्च, जायफल, दालचीनी, तेज पत्ता आदि मसालों की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है। लेकिन, अवैध बूचड़खानों के बंद होने से भैंसा और बकरा के मांस की बिक्री ठप हो गई है। महानगर में सिर्फ मुर्गा-मछली का मीट ही बिक रहा है। ऐसे में मसाला बाजार क ो जबरदस्त झटका लगा है। होटलों और घरों में नॉनवेज की खपत कम होने से मसालों की बिक्री भी ठंडी पड़ गई है। दुकानदारों के अनुसार सर्वाधिक असर गरम मसाला पर पड़ा है। मांग कम होने से बिक्री में 40 से 50 फीसदी गिरावट आई है। वहीं, दाम भी 20 प्रतिशत तक कम हो गए हैं। उल्लेखनीय है कि शहर के प्रमुख किराना बाजार सुभाष गंज में लगभग दो दर्जन ऐसी दुकानें हैं, जहां वेज और नानवेज मसाला तैयार किया जाता है। महानगर के छोटे-बडे़ होटलों, ढाबों और घरों में मसाले की सप्लाई यहीं के बाजार से होती है।
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आधी रह गई है सप्लाई
मसालों की बिक्री आधी से भी कम हो गई है। पहले गरम मसाला की बिक्री प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार रुपये तक होती थी, लेकिन अब यह नहीं है। मसालों में सिर्फ हल्दी और धना ही बिक रहा है। - विशाल साहू, मसाला कारोबारी
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मसाला कारोबार में मंदी का दौर
मीट सप्लाई प्रभावित होने से गरम मसाल कारोबार में मंदी जैसे हालात हैं। दालचीनी, जायफल की बिक्री बेहद कम हो गई है। मांग घटने से मसालों के दामों में भी एकाएक अंतर आया है। - बलराम साहू, मसाला विक्रेता
दाम हुए धड़ाम
दुकानदारों ने बताया 1500 रुपये किलो मिलने वाला खड़ा गरम मसाला अब 1200 और 1000 रुपये में मिल रहा है। जायपत्ती 1200 रुपये से 1000 मेें, 120 रुपये प्रतिकिलो वाला धना 100 रुपये में, काली मिर्च 800 रुपये से गिरकर 650 में, लाल मिर्च 110 रुपये से कम होकर 90 में, लौंग 850 की बजाय 700 रुपये किलो हो गई है। हालांकि, स्याही जीरा के दाम यथावत है।