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सपा के दो किले ढहे, अन्य ब्लॉकों में भी नींव खोदने में जुटी भाजपा
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झांसी। ब्लॉक प्रमुख चुनाव के शुरुआती परिणामों में ही समाजवादी पार्टी पिछड़ती नजर आ रही है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले चुनाव में जिले के आठों ब्लाकों में समाजवादी पार्टी काबिज होने में कामयाब हो गई थी, लेकिन इस बार नामांकन के दिन ही भाजपा ने दो सीट हथिया लीं। इसके अलावा कुछ और सीटों पर भाजपा मजबूत स्थिति में है।
गांव-चौपाल की राजनीति में सपा का हमेशा से ही अच्छा वर्चस्व रहा है। इसी वोट बैंक के बलबूते पर सपा साल 2015 में हुए पंचायत चुनाव में जिले के आठों ब्लॉकों में काबिज होने में कामयाब हो गई थी। बाद में बबीना के ब्लॉक प्रमुख सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। सात ब्लाकों में सपा अब तक काबिज थी। हालांकि, पिछले चुनाव में प्रदेश में सरकार होने की वजह से सपा के लिए माहौल एकदम अनुकूल था। लेकिन, इस बार परिस्थितियां बदली हुई हैं।
केंद्र और प्रदेश की सियासत पर भाजपा हावी है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में सपा की मजबूत सियासी जमीन दरकने लगी है। जिला पंचायत के चुनाव में जहां सपा के खाते में पिछले साल 16 सीटें गईं थीं, तो वहीं इस बार उसे महज पांच सीटें ही मिल पाईं थीं। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी भी सपा के हाथ से खिसककर भाजपा की झोली में चली गई। अब ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में भी सपा के लिए ज्यादा संभावनाएं नजर नहीं आ रही हैं। नामांकन के साथ ही भाजपा ने दो ब्लॉक बंगरा और गुरसराय सपा से झटक लिए। अन्य पांच ब्लॉकों को भी अपने पाले में शामिल करने के लिए भाजपा एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है। राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा, ये 10 जुलाई को ब्लॉक प्रमुख चुनाव की नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
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गांव-चौपाल की राजनीति में सपा का हमेशा से ही अच्छा वर्चस्व रहा है। इसी वोट बैंक के बलबूते पर सपा साल 2015 में हुए पंचायत चुनाव में जिले के आठों ब्लॉकों में काबिज होने में कामयाब हो गई थी। बाद में बबीना के ब्लॉक प्रमुख सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। सात ब्लाकों में सपा अब तक काबिज थी। हालांकि, पिछले चुनाव में प्रदेश में सरकार होने की वजह से सपा के लिए माहौल एकदम अनुकूल था। लेकिन, इस बार परिस्थितियां बदली हुई हैं।
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केंद्र और प्रदेश की सियासत पर भाजपा हावी है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में सपा की मजबूत सियासी जमीन दरकने लगी है। जिला पंचायत के चुनाव में जहां सपा के खाते में पिछले साल 16 सीटें गईं थीं, तो वहीं इस बार उसे महज पांच सीटें ही मिल पाईं थीं। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी भी सपा के हाथ से खिसककर भाजपा की झोली में चली गई। अब ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में भी सपा के लिए ज्यादा संभावनाएं नजर नहीं आ रही हैं। नामांकन के साथ ही भाजपा ने दो ब्लॉक बंगरा और गुरसराय सपा से झटक लिए। अन्य पांच ब्लॉकों को भी अपने पाले में शामिल करने के लिए भाजपा एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है। राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा, ये 10 जुलाई को ब्लॉक प्रमुख चुनाव की नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
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