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प्रमुख सड़कों और चौराहों तक सिमटी स्मार्ट सिटी, अंदरूनी हिस्से हैं बदहाल

Mon, 06 Dec 2021 01:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 06 Dec 2021 01:18 AM IST
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Smart city confined to major roads and intersections, the interiors are in bad shape
अमर उजाला कार्यालय में हुए संवाद कार्यक्रम में शहर की समस्याओं पर मंथन करती महिलाएं। अमर उजाला
झांसी। महानगर में विकास सिर्फ प्रमुख चौराहों और सड़कों तक ही सिमट कर रह गया है। जबकि महानगर के अंदरूनी हिस्से अब भी बदहाली की चपेट में हैं। खासतौर पर पुराने शहर का बुरा हाल है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। बात सफाई की हो या महिला सुरक्षा की, सभी जगह छेद ही छेद हैं। यह बात रविवार को आयोजित ‘अमर उजाला संवाद’ में शामिल हुईं शिक्षिकाओं ने कही। इसके अलावा अन्य मुद्दों पर भी उन्होंने बेबाकी से अपनी राय रखी।
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शिक्षिकाओं ने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से प्रमुख चौराहों व सड़कों पर तो सीसीटीवी कैमरे नजर आते हैं, परंतु शहर के अंदरूनी हिस्सों में नहीं दिखते, जबकि सबसे ज्यादा आपराधिक घटनाएं वहीं होती हैं। वहां भी व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके अलावा महानगर के भीतर की सड़कें अतिक्रमण की वजह से लगातार संकरी होेती जा रही हैं। यहां कभी अतिक्रमण नहीं हटाया जाता। सफाई व्यवस्था का भी बुरा हाल है। नालियां तो महीनों साफ नहीं होतीं। इतना ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों की ओर भी ध्यान देने की जरूरत है। हालात ये हैं कि गांवों के अन्य हिस्सों की तो दूर की बात, स्कूलों के इर्दगिर्द भी सफाई नहीं होती। अराजक तत्व भी डेरा डाले रहते हैं। महानगर में सिटी बस सेवा शुरू होने जा रही है, इससे सुविधा बढ़ेगी, परंतु ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी आवागमन की बेहतर व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए।
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झांसी आने वाले पर्यटक रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से सीधे यहां स्थित पर्यटन स्थलों की ओर रुख कर सकें, इसके लिए अलग से टैक्सी /बस सेवा शुरू की जानी चाहिए। इससे पर्यटकों को सुविधा मिलेगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
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- अलका गुप्ता
सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे महानगर की प्रमुख सड़कों और चौराहों पर तो लगाए गए हैं, लेकिन अंदरूनी हिस्सों में इनका नितांत अभाव है। जबकि, सबसे ज्यादा छेड़छाड़ व चेन स्नेचिंग जैसी घटनाएं अंदरूनी इलाकों में ही होती हैं।
- मंदाकिनी सिंह
पहले बालिका विद्यालयों के बाहर सिविल ड्रेस में महिला पुलिस कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। लेकिन, अब ये कहीं नजर नहीं आती हैं। वहीं, महानगर के मुख्य मार्गों की तो नियमित सफाई होती है, लेकिन अंदर ध्यान नहीं दिया जाता है।
- प्रतिमा कुशवाहा
नेताओं के आने पर शहर एकदम चमक जाता है। महानगर हर समय ऐसा नजर आए, इसके प्रबंध किए जाने चाहिए। इसके अलावा पुराने शहर की गलियों में अवैध कब्जे लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया जाना चाहिए।
- सुनीता कुशवाहा
झांसी को स्मार्ट सिटी का अवार्ड मिलता है, लेकिन इसे लेकर अक्सर विरोधाभास लगता है। स्मार्ट सिटी महानगर के बाहरी इलाकों में ही नजर आती है। भीतर के हिस्सों में कोई बदलाव नहीं आता है। बल्कि, अव्यवस्थाएं बढ़ती ही जा रहीं हैं।
- दीप्ति अग्रवाल
शहर में जगह-जगह विश्राम गृह बनाए जाने चाहिए, जहां लोग कुछ समय के लिए रुक सकें। इन्हीं स्थानों पर ऑटो स्टैंड भी बनाए जाने चाहिए। इन्हें खाली नहीं छोड़ा जाए, बल्कि केयर टेकर की भी व्यवस्था की जाए, ताकि व्यवस्थाएं दुरुस्त बनी रहें।
- सुधा वर्मा
ब्रह्मनगर कॉलोनी में नालियों की सफाई नहीं होती है। जबकि, यहां डेंगू के कई मरीज सामने आ चुके हैं। महानगर के अन्य इलाकों का भी कमोबेश यही हाल है। खासतौर पर नालियों की नियमित सफाई नहीं होती। इसमें सुधार किया जाना चाहिए।
- विनीता त्रिवेदी
ग्वालियर रोड रेलवे क्रॉसिंग अक्सर बंद ही रहती है। बावजूद, यहां ओवरब्रिज नहीं बनाया जा रहा है। इससे आवागमन में भारी परेशानी होती है। इसके अलावा फिल्टर रोड रेलवे क्रॉसिंग पर शाम से ही अंधेरा हो जाता है। पुलिस भी नजर नहीं आती।
- सरला मिश्रा
मुहल्लों में सफाई कर्मचारी तैनात हैं, परंतु वे मनमानी ढंग से सफाई करते हैं। 15-15 दिन तक नजर नहीं आते हैं। ग्रामीण इलाकों का तो और भी बुरा हाल है। स्वच्छ भारत मिशन कहीं नजर नहीं आता। साफ-सफाई के मामले में झांसी को स्मार्ट बनाया जाना चाहिए।
- रीता सोलंकी
महानगर की यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए चौराहों पर सिग्नल लाइट लगाई गईं हैं। लेकिन, देखने में आता है कि लोग इसका पालन नहीं करते हैं। सिग्नल तोड़ने वालों को दंडित भी नहीं किया जाता है। ऐसे में सिग्नल लाइन सफेद हाथी ही साबित हो रही हैं।
- सुमिक्षा यादव
गांवों से मुख्यालय तक आने-जाने मेें भारी कठिनाई होती है। यातायात की कोई सीधी व्यवस्था नहीं है। जिस तरह से महानगर में सिटी बस सेवा शुरू की जा रही है। इसी तर्ज पर मुख्यालय से ग्रामीण इलाकों के लिए भी सीधी परिवहन सेवा शुरू की जानी चाहिए।

- संगीता सिंह
साफ-सफाई के मामले में ग्रामीण इलाकों का बुरा हाल है। सड़कों पर गंदगी फैली रहती है। स्कूलों के इर्दगिर्द भी सफाई नहीं होती। इतना ही नहीं, स्कूलों के आसपास अराजक तत्व डेरा डाले रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधा और सुरक्षा पर काम किया जाना चाहिए।
- सरिता सिंह
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