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एसी की तरह तैयार हो रहे स्लीपर कोच

Thu, 06 Dec 2018 01:28 AM IST
jhansi
jhansi Updated Thu, 06 Dec 2018 01:28 AM IST
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sleeper coach redy like ac coach
railwar ncr jhansi - फोटो : demo
कोच मरम्मत कारखाने में अब स्लीपर कोचों को एसी की तरह तैयार किया जा रहा है। शौचालय में ओकोपाइड इंडीकेटर (शौचालय खाली या भरा का संकेतक), डस्टबिन, दोनों तरफ मोबाइल चार्जर, पानी की टंकी पर वाटर लेवल इंडीकेटर और शौचालय में ईपॉक्सी फ्लोर (फर्श) बनाया जा रहा है। ईपॉक्सी फ्लोर में गड्ढे नहीं पड़ते, इससे पानी नहीं ठहरता। कोच की पूरी वायरिंग बदली जा रही है। नई सुविधाओं के साथ कोच नंबर 06251 बनकर तैयार है। रेलवे मरम्मत कारखाने से अभी तक जितने भी कोच निकले हैं, उनमें अन्य वर्कशॉप की तुलना में कुछ हटकर काम किए गए और यह प्रयोग लगातार जारी है। अब नई स्लीपर बोगियों में एसी कोच की तरह सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। शौचालय, बर्थ, फर्श और बाहरी हिस्सों में सुधार किया जा रहा है। नई सुविधाओं के साथ कोच नंबर 06251 तैयार किया गया है, जो अब ट्रैक पर दौड़ने के लिए तैयार है।
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इस कोच में शौचालय में पीपीसी फर्श की जगह ईपॉक्सी फ्लोर बिछाया गया है। इस फ्लोर में गड्ढे नहीं होते, जिससे पानी फर्श पर नहीं ठहराता। इसमें फर्श के उखड़ने की संभावना भी नहीं रहती। शौचालय में ओकोपाइड इंटीकेटर लगाया गया है। इस इंडीकेटर से पता लग जाता है कि शौचालय के अंदर कोई है कि नहीं। कोच की पूरी इलेक्ट्रिक वायरिंग बदली गई है। अभी तक सिर्फ पंखे, स्विच बोर्ड और बाहरी हिस्से की ही वायरिंग बदलती थी। डस्टबिन (कचरा बैग) दरवाजे के पास और शौचालय में लगाए गए हैं। पानी की टंकी पर वाटर लेवल इंडीकेटर लगाए गए हैं, इससे पता लग जाता है कि टंकी में कितना पानी है? अभी तक रेलवे जनरल व स्लीपर कोच में दरवाजे के निकट मोबाइल चार्ज करने के लिए दो प्वाइंट उपलब्ध कराता था, मगर अब मरम्मत होकर नए बनाए जा रहे सभी कोचों में 18-18 मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट लगाए जा रहे हैं।
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मालूम हो कि रेलवे वर्कशॉप के निकट महावीरन स्क्रैप यार्ड में कोच मरम्मत कारखाने (सवारी डिब्बा) का निर्माण अक्तूबर 2014 में किया गया था। इस फैक्ट्री में 12 साल पुराने कोचों को दोबारा नया बनाया जाता है। भले ही इस कारखाने में कर्मचारियों की कमी से अब तक पिछले चार साल में 197 कोच (जनरल और स्लीपर बोगी) तैयार होकर निकले हैं। हर माह नौ से दस कोच बनकर निकल रहे हैं।
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‘ हम बेहतर से बेहतर कोच बनाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि यात्रियों को सुविधाओं का पूरा लाभ मिल सके। आगे और भी नई तकनीक अपनाई जाएंगी।’
 आरडी मौर्य, मुख्य कारखाना प्रबंधक।

तुरंत नहीं भड़केगी आग
नए कोचों में अग्निरोधक सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे आग लगने की स्थिति में एकदम आग नहीं भड़क सकेगी। बर्थ धीरे-धीरे सुलगेगी। इससे ट्रेन को नजदीक के स्टेशन तक ले जाने में सहूलियत होगी। ट्रेन के स्टेशन पहुंचने पर आग बुझाने में आसानी हो जाएगी।

 
लगाई जा रहे है सीबीसी कप्लर
दो कोचों को जोड़ने के लिए सीबीसी कप्लर (सेंट्रल बफर कप्लर) लगाए जा रहे हैं। अभी तक दो कोचों को जोड़ने के लिए स्क्रू कप्लर लगाए जाते थे। स्क्रू कप्लर में ट्रेन के पटरी से उतरने पर कोच के पलटने की संभावना ज्यादा रहती है। जबकि, सीबीसी कप्लर के लगे होने से ट्रेन के पटरी से उतरने पर बोगी के पलटने की संभावना बहुत कम रहती है।
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