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हत्या में छह को आजीवन कारावास
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six people life imprisonment in murder
हत्या में छह को आजीवन कारावास
झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या दो ओमवीर की अदालत में रंजिशन हत्या का दोष सिद्घ होने पर छह अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र पांचाल के अनुसार थाना मऊरानीपुर के रूपाधमना निवासी रामादीन ने थाने तहरीर देते हुये बताया था कि उसके पिता व परिवार से गांव के ही भान सिंह, राधा चरन, केशव पुत्रगण भूरे, लोकनाथ व प्रेम नारायण पुत्रगण धर्मजीत व श्यामलाल उर्फ भैय्यन पुत्र कुंदन रंजिश मानते है। कई बार उसके परिजनों के साथ मारपीट कर चुके हैं। उसके पिता व चाचा देशराज से जबरन भयभीत करके कुछ दिन पूर्व रजिस्ट्री भी करा ली थी। इसके बाद उक्त दबंगो द्वारा पिता से एक लाख रुपये की मांग करते हुये जान से मारने की धमकी भी दी। 9 नवंबर 2006 को पिता रात में खलिहान में सोने चले गये। सुबह घर वापस न आने पर उनकी तलाश की गयी, तभी चाचा देशराज ने बताया कि रात करीब 09 बजे जब वह खलिहान से घर की ओर आ रहा था तो माता के मंदिर के बेड़ा में उक्त भान सिंह आदि रात में ही हत्या की योजना बना रहे थे। गांव के ही जगत पाल व योगेंद्र ने बताया कि वह हार से रात्रि करीब 10 बजे घर आ रहे थे। तभी भानसिंह, राधाचरन, केशव, लोकनाथ, प्रेम नारायण, श्यामलाल व तीन अज्ञात व्यक्ति बंदूकें, तमंचा व लाठी आदि लेकर रामाधीन के खलिहान में घुस रहे थे। 11 नवंबर की रात पता चला कि पिता की हत्या करके उनका शव दीपचंद्र पटेल के कुंए में फेंक दिया गया। जिसे पुलिस द्वारा निकलवाकर थाने ले जाया गया। लिखित तहरीर के आधार पर पुलिस ने सभी अभियुक्तों के विरूद्ध धारा 147, 148, 149, 302, 201/34 के तहत मामला दर्ज कर विवेचना बाद आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। जहां प्रस्तुत साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर अभियुक्त भान सिंह, राधा चरन, केशव, लोकनाथ, प्रेम नारायण, श्यामलाल को धारा 302/149 में आजीवन कारावास व 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुर्नाई गई। अर्थदंड अदा न करने पर एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास व धारा 201 में प्रत्येक को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास व दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर छह-छह माह के अतिरिक्त कारावास व धारा 147 के अपराध में दो-दो वर्ष के कठोर कारावास व एक-एक हजार रुपये अर्थदंड व अदा न करने पर दो-दो माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। वहीं, धारा 148 में तीन-तीन वर्ष का कठोर कारावास व दो-दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जमा अर्थदंड राशि में से एक लाख पचास हजार रुपये प्रतिकर के रुप में मृतक के पुत्र व वादी को प्रदान की जायेगी।
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झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या दो ओमवीर की अदालत में रंजिशन हत्या का दोष सिद्घ होने पर छह अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र पांचाल के अनुसार थाना मऊरानीपुर के रूपाधमना निवासी रामादीन ने थाने तहरीर देते हुये बताया था कि उसके पिता व परिवार से गांव के ही भान सिंह, राधा चरन, केशव पुत्रगण भूरे, लोकनाथ व प्रेम नारायण पुत्रगण धर्मजीत व श्यामलाल उर्फ भैय्यन पुत्र कुंदन रंजिश मानते है। कई बार उसके परिजनों के साथ मारपीट कर चुके हैं। उसके पिता व चाचा देशराज से जबरन भयभीत करके कुछ दिन पूर्व रजिस्ट्री भी करा ली थी। इसके बाद उक्त दबंगो द्वारा पिता से एक लाख रुपये की मांग करते हुये जान से मारने की धमकी भी दी। 9 नवंबर 2006 को पिता रात में खलिहान में सोने चले गये। सुबह घर वापस न आने पर उनकी तलाश की गयी, तभी चाचा देशराज ने बताया कि रात करीब 09 बजे जब वह खलिहान से घर की ओर आ रहा था तो माता के मंदिर के बेड़ा में उक्त भान सिंह आदि रात में ही हत्या की योजना बना रहे थे। गांव के ही जगत पाल व योगेंद्र ने बताया कि वह हार से रात्रि करीब 10 बजे घर आ रहे थे। तभी भानसिंह, राधाचरन, केशव, लोकनाथ, प्रेम नारायण, श्यामलाल व तीन अज्ञात व्यक्ति बंदूकें, तमंचा व लाठी आदि लेकर रामाधीन के खलिहान में घुस रहे थे। 11 नवंबर की रात पता चला कि पिता की हत्या करके उनका शव दीपचंद्र पटेल के कुंए में फेंक दिया गया। जिसे पुलिस द्वारा निकलवाकर थाने ले जाया गया। लिखित तहरीर के आधार पर पुलिस ने सभी अभियुक्तों के विरूद्ध धारा 147, 148, 149, 302, 201/34 के तहत मामला दर्ज कर विवेचना बाद आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। जहां प्रस्तुत साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर अभियुक्त भान सिंह, राधा चरन, केशव, लोकनाथ, प्रेम नारायण, श्यामलाल को धारा 302/149 में आजीवन कारावास व 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुर्नाई गई। अर्थदंड अदा न करने पर एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास व धारा 201 में प्रत्येक को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास व दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर छह-छह माह के अतिरिक्त कारावास व धारा 147 के अपराध में दो-दो वर्ष के कठोर कारावास व एक-एक हजार रुपये अर्थदंड व अदा न करने पर दो-दो माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। वहीं, धारा 148 में तीन-तीन वर्ष का कठोर कारावास व दो-दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जमा अर्थदंड राशि में से एक लाख पचास हजार रुपये प्रतिकर के रुप में मृतक के पुत्र व वादी को प्रदान की जायेगी।