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झांसी में कोई पहली घटना नहीं, डेढ़ साल में छठवें नवजात को अपनों ने दुत्कारा

Tue, 01 Dec 2020 01:29 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 01 Dec 2020 01:29 AM IST
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Six ghatana in jhansi
झांसी। जिले में पिछले डेढ़ साल में नवजात शिशु को फेंकने की यह छठवीं घटना सामने आई है। इसमें चार लड़कियां और एक लड़का शामिल हैं। सोमवार को फेंके गए नवजात का आधा धड़ कुत्ते नोचकर खा गए हैं। ऐसे में अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वो लड़का है या लड़की। तीन नवजात लड़कियों की जान तो बड़ी मुश्किल में बचाई जा सकी। इन नवजातों में से अपूर्वी नाम की बच्ची को अपना एक हाथ तक खोना पड़ गया।
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जुलाई 2019 में देहात क्षेत्र के एक गांव में नवजात बच्ची को झाड़ियों में फेंककर कोई भाग गया था। उसे इलाज के लिए एंबुलेंस से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। चिकित्सीय परीक्षण के दौरान डॉक्टर ने पाया कि नवजात की गर्दन कटी हुई है। ऐसे में उसे तत्काल महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। नवजात बच्ची की हालत बेहद खतरे में थी और खून लगातार गर्दन से खून रिस रहा था। डॉक्टरों ने आईसीयू में भर्ती कर उसका इलाज शुरू किया। 15 दिन तक जिंदगी और मौत के बीच झूलने के बाद बड़ी मुश्किल से बच्ची की जान बचाई जा सकी। इसके ठीक एक महीने बाद अगस्त 2019 में भी एक नवजात बच्ची खेत में फेंकी गई। उसे भी मेडिकल कॉलेज में लाया गया। परीक्षण के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि बच्ची का एक पैर कटा हुआ है और सड़ भी गया है। लंबे इलाज के बाद उसे भी बचाया जा सका। इसके अलावा दिसंबर 2019 में मेडिकल कॉलेज के गेट नंबर एक के सामने एक और नवजात बच्ची को कोई फेंककर चला गया था। उस बच्ची को भी कुत्ते नोंच रहे थे। किसी राहगीर को बच्ची की रोने की आवाज सुनाई दी और उसने कुत्ते को भगाया। हालांकि, तब तक बच्ची का एक हाथ कुत्ते खा चुके थे। बच्ची का काफी खून बह चुका था। लंबी लड़ाई के बाद बड़ी मुश्किल से नवजात मौत से जंग जीत पाई। बाद में उसका नाम भी अपूर्वी रखा गया। इस घटना को कुछ सप्ताह ही बीते थे कि जनवरी 2020 में सीपरी बाजार स्थित एक मंदिर में दो-तीन दिन के बच्चे को कोई छोड़कर चला गया। बाद में उसे चाइल्ड लाइन को सौंपा गया। हाल ही में बीते पांच नवंबर को गोलाकुआं स्थित एक घर के तीसरे मंजिल की छत पर कोई नवजात बच्ची को छोड़ गया। बच्चे की रोने की आवाज सुनाई तो मकान मालिक ने उसे चाइल्ड लाइन को सौंपा।
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