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सिंचाई सब्सिडी न मिलने से किसान मायूस
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सिंचाई सब्सिडी न मिलने से किसान मायूस
करीब एक वर्ष पहले किया था आवेदन
झांसी। केंद्र सरकार ने सिंचाई उपकरणों पर अनुदान देने का एलान किया था लेकिन, इसका फायदा किसान को नहीं। पिछले वित्तीय सत्र में स्प्रिंकलर के लिए जिन किसानों ने आवेदन किया था, उनको इसका अब तक फायदा नहीं मिला। इस वजह से उनमें मायूसी है।
बजट के दौरान सरकार ने सिंचाई को प्राथमिकता में रखने की बात कही थी। ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई को भी बढ़ावा देने की योजना बनी। इसके जरिए सिंचाई में न सिर्फ कम पानी की जरूरत होती है बल्कि इसमें काफी सहुलियत भी होती है। पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने जनपदवार लक्ष्य तय कर दिए। इसके लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) से भी ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्र स्थापित किए जाने में मदद की जानी थी। लघु एवं सीमांत किसानों के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार 55 फीसदी जबकि अन्य किसानों के लिए 45 फीसदी अनुदान का प्रावधान किया गया। इसके अलावा सभी श्रेणी के किसानों को 35 फीसदी अतिरिक्त टॉपअप का भी फायदा मिलना था। इस तरह लघु एवं सीमांत किसानों को कुल 90 फीसदी एवं अन्य किसानों को 80 फीसदी सब्सिडी पर यह यंत्र दिए जाने थे। तीन सौ सेट का लक्ष्य शासन स्तर पर तय हुआ लेकिन, सब्सिडी की रकम में ही कटौती हो गई। बाद में लक्ष्य भी कम कर दिया। इस वजह से किसानों को करीब एक साल बाद भी इसका फायदा नहीं मिल सका।
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करीब एक वर्ष पहले किया था आवेदन
झांसी। केंद्र सरकार ने सिंचाई उपकरणों पर अनुदान देने का एलान किया था लेकिन, इसका फायदा किसान को नहीं। पिछले वित्तीय सत्र में स्प्रिंकलर के लिए जिन किसानों ने आवेदन किया था, उनको इसका अब तक फायदा नहीं मिला। इस वजह से उनमें मायूसी है।
बजट के दौरान सरकार ने सिंचाई को प्राथमिकता में रखने की बात कही थी। ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई को भी बढ़ावा देने की योजना बनी। इसके जरिए सिंचाई में न सिर्फ कम पानी की जरूरत होती है बल्कि इसमें काफी सहुलियत भी होती है। पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने जनपदवार लक्ष्य तय कर दिए। इसके लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) से भी ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्र स्थापित किए जाने में मदद की जानी थी। लघु एवं सीमांत किसानों के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार 55 फीसदी जबकि अन्य किसानों के लिए 45 फीसदी अनुदान का प्रावधान किया गया। इसके अलावा सभी श्रेणी के किसानों को 35 फीसदी अतिरिक्त टॉपअप का भी फायदा मिलना था। इस तरह लघु एवं सीमांत किसानों को कुल 90 फीसदी एवं अन्य किसानों को 80 फीसदी सब्सिडी पर यह यंत्र दिए जाने थे। तीन सौ सेट का लक्ष्य शासन स्तर पर तय हुआ लेकिन, सब्सिडी की रकम में ही कटौती हो गई। बाद में लक्ष्य भी कम कर दिया। इस वजह से किसानों को करीब एक साल बाद भी इसका फायदा नहीं मिल सका।
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