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आम ट्रेनों जैसा हुआ शताब्दी का हाल

Thu, 28 Apr 2016 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 28 Apr 2016 12:07 AM IST
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shatabdi become common train
shatabdi train, jhansi hindi news - फोटो : demo
झांसी। नई दिल्ली से हबीबगंज के मध्य चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस के स्टापेज बढ़ने से इस वीआईपी ट्रेन का हाल आम गाड़ियों जैसा होता जा रहा है। इतना ही नहीं समय की पाबंद रही यह ट्रेन अब लेटलतीफी का भी शिकार हो रही है। दिल्ली पहुंचने में यह ट्रेन अधिकांश दिन लेट हो रही है।
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भारतीय रेल में जब वीआईपी शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ था, उसमें एक ट्रेन (गाड़ी संख्या 12001/12002) दिल्ली से झांसी के मध्य भी चलाई गई थी। उस समय यह ट्रेन दिल्ली के बाद मथुरा, आगरा व ग्वालियर में ही रुकती थी। बाद में इसको झांसी से आगे भोपाल स्टेशन तक कर दिया गया। इस ट्रेन में अधिकांश वीआईपी या धनाढ्य लोग ही यात्रा करते थे।
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वापसी में दिल्ली पहुंचने का टाइम अच्छा होने के कारण (रात 10.30 बजे) महीनों यह ट्रेन पूरी तरह भरकर चलती थी। समय के साथ यह गाड़ी राजनीति की भेंट चढ़ गई। इसे मुरैना, धौलपुर व ललितपुर तीन नए ठहराव स्टेशन दे दिए गए। इतना ही नहीं एक जुलाई 2014 को इस गाड़ी का विस्तार हबीबगंज स्टेशन तक कर दिया गया था। अब यह गाड़ी रात में साढ़े ग्यारह बजे की जगह बारह बजे के बाद ही दिल्ली पहुंचती है। देर रात ट्रेन के दिल्ली पहुंचने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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यही कारण है कि इस गाड़ी में दिनों दिन यात्रियों की संख्या कम होती जा रही है। भोपाल से चलने वाले वीआईपी यात्री रात में चलने वाली हबीबगंज एक्सप्रेस को अधिक प्राथमिकता देने लगे हैं। इसी तरह आगरा से दिल्ली चलने वाले यात्रियों की संख्या बहुत कम रह गई है। आगरा के बाद इस ट्रेन की अधिकांश सीटें खाली नजर आती हैं।

दरअसल, ट्रेन के स्टापेज बढ़ने से इस ट्रेन का समय पालन भी बिगड़ गया है, जिस उद्देश्य से मुरैना व धौलपुर को ठहराव स्टेशन बनाया गया था, यह उद्देश्य भी पूरा नहीं हो पा रहा है। इन स्टेशनों से अधिकांश दिन इक्का- दुक्का यात्री ही सवार होते हैं। दूसरा, वापसी में यह ट्रेन अक्सर लेट हो जाती है। हबीबगंज में भी पौन घंटे ट्रेन रुकती है। इस अवधि में यात्रियों को चढ़ना व उतरना भी पड़ता है। इस कारण ट्रेन में ठीक से सफाई भी नहीं हो पा रही है। रेल अफसर इस परेशानी को भलीभांति समझते हैं, मगर उनके हाथ में कुछ नहीं है।


‘किसी भी ट्रेन का ठहराव स्टेशन बढ़ाने का निर्णय रेलवे बोर्ड लेता है। इसमें मंडल स्तर पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता है।’
गिरीश कंचन
पीआरओ झांसी।

बीना भी हो सकता है भविष्य का ठहराव
शताब्दी एक्सप्रेस के बीना स्टेशन पर ठहराव के लिए भी राजनीतिज्ञ प्रयासरत हैं। चूंकि, बीना में ऑयल रिफाइनरी है, इस कारण ट्रेन के ठहराव को अधिक महत्व दिया जा रहा है। भविष्य में बीना स्टेशन पर भी शताब्दी एक्सप्रेस रुकने लगे, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।
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