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टिकट चेकिंग स्टाफ के बिना दौड़ रहे सात सौ कोच

Mon, 13 Dec 2021 01:27 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 13 Dec 2021 01:27 AM IST
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Seven hundred coaches running without ticket checking staff
झांसी। अभी मेल, एक्सप्रेस व सुपरफास्ट ट्रेनों में सिर्फ कंफर्म टिकट वाले यात्रियों को सफर करने की अनुमति दी जा रही है। लेकिन दूसरी लहर के बाद अब सामान्य हालातों में वेटिंग टिकट पर भी यात्री बड़ी संख्या में सफर कर रहे हैं। ऐसे में सीट पर बैठने को लेकर कंफर्म व वेटिंग के यात्रियों के बीच कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है। इस तरह के मामले सबसे ज्यादा जनरल कोचों में सामने आ रहे हैं। चूंकि, टिकट चेकिंग कर्मचारियों की कमी चल रही है, इस कारण सभी कोचों की निगरानी हो पाना संभव नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में मंडल से गुजरने वाली ट्रेनों के 700 से अधिक कोचों में टिकट चेकिंग मौजूद नहीं रहता है।
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वर्तमान में ट्रेनों की संख्या के हिसाब से 1800 टिकट चेकिंग कर्मियाें की आवश्यकता है, जबकि सिर्फ 720 कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। टिकट चेकिंग कर्मचारियों की कमी से अधिकांश ट्रेनों में दो या तीन कर्मचारी चल पा रहे हैं। जबकि, कोचों की संख्या के हिसाब से एक ट्रेन में पांच कर्मचारियों का होना जरूरी है। मजबूरन, एक टीटीई को तीन की जगह पांच कोचों को संभालना पड़ रहा है।
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रेल मंडल प्रशासन ने प्रतिदिन 98 ट्रेनों में चलने वाले टिकट चेकिंग स्टाफ के लिए एम्युनिटी डिटेल लिंक बना रखा है। यह स्टाफ झांसी स्टेशन से अप और डाउन की ट्रेनों में निजामुद्दीन, इटारसी, कानपुर और बांदा के लिए चलता है। शताब्दी एक्सप्रेस व वीकली ट्रेनों के लिए अलग-अलग टीमें हैं। कुछ कर्मचारी ओपन डिटेल में काम कर रहे हैं। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि हर कोच की निगरानी के लिए टिकट चेकिंग स्टाफ रहे, इसकी पूरी कोशिश होती है। सफर के दौरान यात्री को कोई भी समस्या आती है, उसे प्राथमिकता पर दूर किया जाता है।
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यात्रियों को ये होती दिक्कतें
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- कोई समस्या आने पर ट्रेेन में टीटीई को तलाशना मुश्किल होता है।
- खासकर रात के समय बर्थ को लेकर विवाद होने पर सुलझाने वाला कोई नहीं होता।
- चलती ट्रेन में यात्रियों को मदद नहीं मिल पाती।
- वेटिंग टिकट के कंफर्म होने का पता नहीं लग पाता।
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