फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Seven fere vivahic rasm

बंधन सात जन्मों का...एक-दूजे का साथ निभाने को अपनों से भी तोड़ा नाता

Sun, 09 Oct 2022 01:12 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 09 Oct 2022 01:12 AM IST
विज्ञापन
Seven fere vivahic rasm
झांसी। कहते हैं कि सात फेरों का मतलब सिर्फ वैवाहिक रस्म नहीं होता...ये रस्में पति-पत्नी को सात जन्मों के बंधन में बांधती हैं। आज जमाना भले ही बदल गया है, पति-पत्नी, रिश्ते-नाते और तीज-त्योहारों के मायने बदलते जा रहे हैं, लेकिन कहीं न कहीं कोई डोर तो है जो उन विपरीत परिस्थितियों में भी पति-पत्नी को बांधे रखती है जब उनके अपने बच्चे तक उनका साथ छोड़ देते हैं। हमने आईटीआई स्थित वृद्धाश्रम पर नजर डाली तो देखा कि कई पति-पत्नी उम्र की आखिरी दहलीज पर सात जन्मों का बंधन निभा रहे, इनके लिए हर रोज करवा चौथ की पूजा है और अपने साथी का साथ उस पूजा का फल...। इनमें कोई पत्नी बीमार पति की सेवा के लिए घर-बार छोड़कर वृद्धाश्रम में दिन गुजार रही है, तो कोई पति अपनी पत्नी के मान के लिए उसके साथ वृद्धाश्रम में खुशी-खुशी दिन काट रहा। इनका कहना है कि अब मरने के बाद ही उनका हाथ छूटेगा।
विज्ञापन

पति की खातिर छोड़ा घर...वृद्धाश्रम में कर रहीं बीमार पति की सेवा
65 साल की रामदेवी नागिल के पति मानसिक रूप से बीमार हैं। वर्षों से वह अकेले ही पति की सेवा कर रही हैं। पति देवीचरण नागिल पेशे से बीएएमएस डॉक्टर हैं। लेकिन मानसिक रूप से बीमार होने के कारण सब कुछ छूट गया। यूं तो इनके चार बेटे और एक बेटी है, लेकिन बुढ़ापे में जब सेवा का मौका आया तो पति-पत्नी अकेले रह गए। छह वर्षों से आईटीआई स्थित वृद्धाश्रम में रह रहीं रामदेवी बताती हैं कि बुढ़ापे में बच्चों के खातिर उन्हें घर छोड़ना पड़ा। घर से निकलने के बाद वह दो-तीन साल हंसारी स्थित महिला कल्याण आश्रम में रहीं। बाद में आश्रम बंद हो गया तो वर्ष 2016 में आईटीआई वृद्धाश्रम में आकर रहने लगीं। वर्ष 2019 में पता चला कि पति बहुत बीमार रहने लगे हैं, उनकी देखभाल के लिए कोई नहीं है तो वह पति को भी अपने साथ वृद्धाश्रम ले आईं। रामदेवी बताती हैं कि पति मानसिक रूप से बीमार हो गए हैं, उन्हें लगता है कि कोई उन्हें आवाज देता है। इसी धुन में वह इधर-उधर भागते हैं। रामदेवी ने बताया कि हर साल जब वह करवा चौथ का व्रत रखती हैं तो दुआ मांगती हैं कि उनके पति की मानसिक स्थिति ठीक हो जाए।
विज्ञापन

---
खो चुकी है पत्नी की याददाश्त...खुश हूं कि हम साथ-साथ हैं
झांसी। मैंने जब सुशीला से शादी की थी तो कहा था कि मैं उसका साथ कभी नहीं छोड़ूंगा। मेरी सुशीला 10 साल से बीमार है। वह याददाश्त खो चुकी है। उसने वर्षों मेरे लिए करवा चौथ का व्रत रखा है। क्या हुआ जो आज मुझे रोज उसे नहला-धुलाकर खाना खिलाना पड़ता है। जब वह ठीक थी तब मेरा बहुत ख्याल रखती थी। आज मुझे उसके डाइपर बदलने पड़ते हैं, मैं उसकी चोटी बनाता हूं, उसके बाल सुलझाता हूं, लेकिन मैं बहुत खुश हूं कि इस बुढ़ापे में मेरी पत्नी मेरे साथ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

वृद्धाश्रम में बीमार पत्नी संग दिन गुजार रहे प्रमोद कुमार झांसी के लघु सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त हैं। इनकी तीन बेटियां हैं। वर्षों पहले पत्नी का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और धीरे-धीरे उसकी याददाश्त चली गई तो एक बेटी व नाती के खातिर प्रमोद कुमार (77) अपना घर बेटी को देकर पत्नी के साथ वृद्धाश्रम में रहने लगे। यहां पत्नी के इलाज के साथ-साथ दिनभर उसकी देखभाल करते हैं। पत्नी सुशीला (70) उनके अलावा किसी को नहीं पहचानती है। प्रमोद कुमार बताते हैं कि वह रोज सुबह दो-ढाई घंटे पूजा करते हैं...और भगवान से यही मांगते हैं कि उनके बाद पत्नी की देखभाल करने वाला कोई नहीं है, इसलिए उन्हें जिदंगी भर साथ निभाने की ताकत दें।

--
बीमार पति ने घर छोड़ वृद्धाश्रम जाने का फैसला किया तो साथ चली आईं रामदेवी
70 साल के ज्वाला प्रसाद और 65 साल की उनकी पत्नी रामदेवी झा दोनों वृद्धाश्रम में दिन काट रहे हैं। लेकिन दोनों का प्रेम इतना अटूट है कि आश्रम प्रशासन भी इनके प्रेम की मिसाल देता है। ये पिछले तीन साल से आश्रम में रह रहे हैं। ज्वाला प्रसाद बताते हैं कि उनका लोहे का बड़ा काम था। खराद मशीन पर काम करते-करते उन्हें श्वांस की बीमारी हो गई। बीमारी ज्यादा बढ़ गई तो दोनों बेटों ने किनारा कर लिया। लेकिन व्रत और पूजा पाठ करने वाली पत्नी ने साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने वृद्धाश्रम में रहने का फैसला किया तो पत्नी भी साथ चली आईं। यहां जब भी उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ती है और अस्पताल जाना पड़ता है तो पत्नी भी सोती नहीं है। वह सब महिलाओं से बार-बार पूछती है कि उनके पति ठीक तो हो जाएंगे? रामदेवी बताती हैं कि जब वह कपड़े धुलती हैं तो पति उन्हें सुखा देते हैं। उन्हें बेटों की याद आती है तो कहते हैं अब हम दोनों ही हैं, बाकी हमारा कोई नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed