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अब तक सात कोच ही निकाल सका कारखाना

Sat, 09 Jan 2016 12:50 AM IST
ब्यूरो
ब्यूरो Updated Sat, 09 Jan 2016 12:50 AM IST
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Seven coaches Could extract factory
झांसी। सौ करोड़ से अधिक लागत से तैयार हुआ कोच मरम्मत कारखाने का काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। कर्मचारियों व सामग्री की कमी के चलते इस सत्र में 40 कोच मरम्मत करने का लक्ष्य बनाया गया था। मगर अभी तक सात कोच ही तैयार हो सके हैं, जबकि सत्र खत्म होने में ढाई माह का समय ही रह गया है।
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रेलवे बोर्ड ने हर साल ढाई सौ कोचों की मरम्मत का लक्ष्य बनाया था। कारखाने में बनी शॉप के हिसाब से 993 अधिकारी व कर्मचारियों के पद सृजित किए गए थे। मगर वर्तमान में 140 अधिकारी व कर्मचारियों की ही तैनाती है। इनमें नब्बे कर्मचारी ही कोच मरम्मत के काम में लगे हैं, बाकी विभागीय कार्यों में तैनात हैं।
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हालांकि, रेलवे बोर्ड भर्ती ने तीन सौ नए कर्मचारी देने की बात कही है, बाकी कर्मचारी रेलवे ने पुराने नौ जोनों से मय पोस्ट के 24-24 (कुल 216) कर्मचारी देने के निर्देश दिए थे। इस हिसाब से करीब 516 कर्मचारी कारखाने को मिलने हैं, मगर दूसरे जोनों से सिर्फ 103 कर्मचारी ही अब तक मिल सके हैं।
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कोच मरम्मत में लग रही सामग्री का बजट न होने के कारण दूसरे जोन से उधार लेकर काम चलाया जा रहा है। यही कारण है कि मई 2015 में पहला कोच निकलने के बाद से अब तक मात्र सात ही कोच बनकर तैयार हो सके हैं। मालूम हो कि एक कोच को मरम्मत कर नया बनाने में लगभग 35 लाख का खर्चा आता है।

‘कारखाने के कुछ शॉपों को आउट सोर्स कंपनियों को देने का काम शुरू कर दिया है। मगर इस कार्य को पूरा होने में अभी समय लगेगा। हालांकि, इस माह से दो-दो कोच निकालने की तैयारी की जा रही है। उम्मीद है कि जल्द ही अच्छे परिणाम सामने आने लगेंगे।’
- अतुल्य सिन्हा, मुख्य कारखाना प्रबंधक

सफाई व पेंटिंग का काम ठेके पर
कोच मरम्मत कारखाने के सफाई व पेंटिंग शॉप को ठेके पर दे दिया गया है। ठेेकेदार के कर्मचारियों ने काम शुरू कर दिया है। बर्थ रिपेयर शॉप को भी ठेके पर देने की विभागीय कार्रवाई पूरी कर ली गई है। जल्द ही इस शॉप में भी प्राइवेट कर्मचारी काम शुरू कर देंगे।


अनुभवी ठेकेदारों की कमी
दूसरे शहरों में काम कर रहे अनुभवी ठेकेदार (कंपनी) झांसी के कोच मरम्मत कारखाने में काम करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। दरअसल, अभी कारखाने में उस स्तर का काम नहीं हो पा रहा है कि कोई बड़ा ठेकेदार यहां आकर काम कर सके।
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