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बसपा से सीताराम व नत्थू निष्कासित
ब्यूरो
Updated Wed, 04 Nov 2015 01:02 AM IST
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झांसी। बहुजन समाज पार्टी की राजनीति एकदम गरमा गई है। मोहर्रम के पवित्र माह में गमगीन मुस्लिमों को बधाई देने पर पार्टी से सीताराम कुशवाहा को निष्कासित कर दिया गया है। नत्थू कुशवाहा का भी निष्कासन किया गया है। सीताराम कुशवाहा ने इस कार्रवाई की वजह बसपा के झांसी विधानसभा के प्रत्याशी हाजी अस्फाक को बताया है। वहीं नत्थू ने कहा कि वह बसपा में थे ही नहीं तो कैसा निष्कासन।
बसपा के जिलाध्यक्ष आर के अहिरवार ने बताया कि झांसी विधानसभा से पार्टी के प्रत्याशी रह चुके सीताराम कुशवाहा ने पिछले दिनों मोहर्रम के गमगीन माहौल में मुस्लिमों को बधाई देने का काम किया था। इसे पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गंभीरता से लिया है। पार्टी मुखिया के निर्देश पर सीताराम कुशवाहा का निष्कासन किया गया है। वहीं धार्मिक उन्माद पैदा करने पर नत्थू कुशवाहा को भी निष्कासित किया गया है।
इस मामले में सीताराम कुशवाहा का कहना है कि वह पिछले 25 - 30 सालों से मोहर्रम पर ताजियों का स्वागत करते आ रहे हैं। बधाई संदेश की होर्डिंग भूल से लगवाई थी। जिलाध्यक्ष के निर्देश के बाद इसे तत्काल हटा लिया गया था। बहुजन समाज पार्टी में वह पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ थे।
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पंचायत चुनाव में कई सीटों पर पार्टी का प्रचार किया। ऐसे में निष्कासन समझ से परे है। वहीं नत्थू कुशवाहा का कहना है कि बसपा से उनका निष्कासन हास्यास्पद है। वह बसपा के सदस्य ही नहीं हैं। यह सब सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए किया गया है, जो खेदपूर्ण है।
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बसपा के जिलाध्यक्ष आर के अहिरवार ने बताया कि झांसी विधानसभा से पार्टी के प्रत्याशी रह चुके सीताराम कुशवाहा ने पिछले दिनों मोहर्रम के गमगीन माहौल में मुस्लिमों को बधाई देने का काम किया था। इसे पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गंभीरता से लिया है। पार्टी मुखिया के निर्देश पर सीताराम कुशवाहा का निष्कासन किया गया है। वहीं धार्मिक उन्माद पैदा करने पर नत्थू कुशवाहा को भी निष्कासित किया गया है।
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इस मामले में सीताराम कुशवाहा का कहना है कि वह पिछले 25 - 30 सालों से मोहर्रम पर ताजियों का स्वागत करते आ रहे हैं। बधाई संदेश की होर्डिंग भूल से लगवाई थी। जिलाध्यक्ष के निर्देश के बाद इसे तत्काल हटा लिया गया था। बहुजन समाज पार्टी में वह पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ थे।
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पंचायत चुनाव में कई सीटों पर पार्टी का प्रचार किया। ऐसे में निष्कासन समझ से परे है। वहीं नत्थू कुशवाहा का कहना है कि बसपा से उनका निष्कासन हास्यास्पद है। वह बसपा के सदस्य ही नहीं हैं। यह सब सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए किया गया है, जो खेदपूर्ण है।