{"_id":"62bc9bbdc5540f422664ae4b","slug":"second-education-worker-caught-taking-bribe-in-five-months-jhansi-news-jhs2238470162","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांच महीने में दूसरा शिक्षा कर्मी रिश्वत लेते पकड़ा गया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांच महीने में दूसरा शिक्षा कर्मी रिश्वत लेते पकड़ा गया
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। पांच महीने के दरम्यान बुधवार को बेसिक शिक्षा विभाग का दूसरा कर्मचारी रिश्वत लेेते पकड़ा गया है। एक के बाद एक हो रही कार्रवाई महकमे में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोल रही है। अधिकारी से लेकर निचले स्तर तक के कर्मचारी की इसमें संलिप्तता सामने आई है।
बच्चों को भविष्य का अच्छा नागरिक बनाने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग के कंधों पर है। लेकिन, विभाग का माहौल ही दूषित बना हुआ है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने जनवरी माह में मऊरानीपुर के खंड शिक्षा अधिकारी भुवनेंद्र कुमार को रंगे हाथों बीस हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। विद्यालयों में किचन विस्तारीकरण योजना की जांच में से एक नाम हटाने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी ने रिश्वत की ये रकम मांगी थी। अब बुधवार को मऊरानीपुर में तैनात एआरपी गजेंद्र कुमार को रिश्वत लेेते पकड़ा गया। एआरपी ने महज दो हजार रुपये में अपना ईमान बेच दिया। एआरपी ने एक शिक्षक से नोटिस समाप्त करने के नाम पर रिश्वत मांगी थी। ये वे घटनाएं हैं जो पकड़ में आ गईं, वरना विभाग में शिक्षकों को कदम-कदम पर भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। विभागीय जानकारों के अनुसार सीसीएल, प्रसूति अवकाश स्वीकृत कराने के लिए भी शिक्षकों को चढ़ावा देना होता है। देयकों के भुगतान के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ जाती है। इसके अलावा हर योजना में विभागीय लोगों की हिस्सेदारी तय होती है। भ्रष्टाचार से जुड़ीं कई शिकायतें शासन और प्रशासन तक पहुंच चुकी हैं। बावजूद, हालात नहीं बदले हैं।
विभाग के ज्यादातर काम ऑनलाइन हो गए हैं। इससे कार्यों मेें पूरी तरह से पारदर्शिता आ गई है। भ्रष्टाचार करने वाले कर्मचारियों के विभागीय स्तर पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। बुधवार को पकड़े गए एआरपी को निलंबित किया जाएगा।
विज्ञापन
- वेदराम, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
विज्ञापन
बच्चों को भविष्य का अच्छा नागरिक बनाने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग के कंधों पर है। लेकिन, विभाग का माहौल ही दूषित बना हुआ है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने जनवरी माह में मऊरानीपुर के खंड शिक्षा अधिकारी भुवनेंद्र कुमार को रंगे हाथों बीस हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। विद्यालयों में किचन विस्तारीकरण योजना की जांच में से एक नाम हटाने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी ने रिश्वत की ये रकम मांगी थी। अब बुधवार को मऊरानीपुर में तैनात एआरपी गजेंद्र कुमार को रिश्वत लेेते पकड़ा गया। एआरपी ने महज दो हजार रुपये में अपना ईमान बेच दिया। एआरपी ने एक शिक्षक से नोटिस समाप्त करने के नाम पर रिश्वत मांगी थी। ये वे घटनाएं हैं जो पकड़ में आ गईं, वरना विभाग में शिक्षकों को कदम-कदम पर भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। विभागीय जानकारों के अनुसार सीसीएल, प्रसूति अवकाश स्वीकृत कराने के लिए भी शिक्षकों को चढ़ावा देना होता है। देयकों के भुगतान के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ जाती है। इसके अलावा हर योजना में विभागीय लोगों की हिस्सेदारी तय होती है। भ्रष्टाचार से जुड़ीं कई शिकायतें शासन और प्रशासन तक पहुंच चुकी हैं। बावजूद, हालात नहीं बदले हैं।
विज्ञापन
विभाग के ज्यादातर काम ऑनलाइन हो गए हैं। इससे कार्यों मेें पूरी तरह से पारदर्शिता आ गई है। भ्रष्टाचार करने वाले कर्मचारियों के विभागीय स्तर पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। बुधवार को पकड़े गए एआरपी को निलंबित किया जाएगा।
विज्ञापन
- वेदराम, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी