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Jhansi News: समय से पहले विद्यालय पर लटका ताला
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संवाद न्यूज एजेंसी
टहरौली। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लाखों रुपये खर्च कर रही है। कायाकल्प योजना के तहत स्मार्ट क्लास, ड्रेस, पाठ्य सामग्री और मध्याह्न भोजन जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके बावजूद कुछ शिक्षकों की कथित लापरवाही सरकारी प्रयासों पर सवाल उठा रही है। ऐसा ही एक मामला धवारी गांव के प्राथमिक विद्यालय में सामने आया है, जहां निर्धारित समय से पहले ही विद्यालय में ताला लगाकर स्टाफ के चले जाने का आरोप है।
विद्यालय में करीब 90 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। प्रधानाध्यापक रजत शर्मा, सहायक अध्यापक उपेंद्र कुमार अहिरवार, सीमा सिंह, माधुरी यादव और शिक्षामित्र जयराम समेत कुल आठ कर्मचारियों का स्टाफ तैनात है। गांव निवासी अभिभावक अवध किशोर और कन्हैयालाल के अनुसार, विद्यालय सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक संचालित होना चाहिए। आरोप है कि गुरुवार को स्टाफ दोपहर करीब दो बजे ही विद्यालय बंद कर चला गया।
निर्धारित समय से एक घंटा पहले विद्यालय बंद होने से बच्चों की नियमित पढ़ाई और शिक्षकों की जवाबदेही पर सवाल उठे हैं। प्रधानाध्यापक रजत शर्मा ने मामले की जानकारी न होने की बात कही। उन्होंने बताया कि वह सरकारी कार्य से झांसी गए हुए थे। वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी गुरसराय मनोज लाक्षाकार ने भी मामले से अनभिज्ञता जताई।
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टहरौली। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लाखों रुपये खर्च कर रही है। कायाकल्प योजना के तहत स्मार्ट क्लास, ड्रेस, पाठ्य सामग्री और मध्याह्न भोजन जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके बावजूद कुछ शिक्षकों की कथित लापरवाही सरकारी प्रयासों पर सवाल उठा रही है। ऐसा ही एक मामला धवारी गांव के प्राथमिक विद्यालय में सामने आया है, जहां निर्धारित समय से पहले ही विद्यालय में ताला लगाकर स्टाफ के चले जाने का आरोप है।
विद्यालय में करीब 90 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। प्रधानाध्यापक रजत शर्मा, सहायक अध्यापक उपेंद्र कुमार अहिरवार, सीमा सिंह, माधुरी यादव और शिक्षामित्र जयराम समेत कुल आठ कर्मचारियों का स्टाफ तैनात है। गांव निवासी अभिभावक अवध किशोर और कन्हैयालाल के अनुसार, विद्यालय सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक संचालित होना चाहिए। आरोप है कि गुरुवार को स्टाफ दोपहर करीब दो बजे ही विद्यालय बंद कर चला गया।
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निर्धारित समय से एक घंटा पहले विद्यालय बंद होने से बच्चों की नियमित पढ़ाई और शिक्षकों की जवाबदेही पर सवाल उठे हैं। प्रधानाध्यापक रजत शर्मा ने मामले की जानकारी न होने की बात कही। उन्होंने बताया कि वह सरकारी कार्य से झांसी गए हुए थे। वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी गुरसराय मनोज लाक्षाकार ने भी मामले से अनभिज्ञता जताई।
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