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साढ़े सत्रह हजार छात्र अब भी छात्रवृत्ति के इंतजार में
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झांसी। शासन द्वारा विद्यार्थियों को शिक्षा में आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक मदद के रूप में छात्रवृत्ति दी जाती है लेकिन आलम यह है कि बजट के अभाव में जनपद के साढ़े सत्रह हजार से ज्यादा विद्यार्थी आज भी छात्रवृत्ति के इंतजार में हैं।
जनपद के 550 शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले 39742 ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। जिसमें से महज 15177 बच्चों के खाते में ही छात्रवृत्ति आई है, बाकी बचे 17562 बच्चे अब भी छात्रवृत्ति के लिए विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन शासन के पास बजट न होने की वजह से इन बच्चों की छात्रवृत्ति नहीं आ पा रही है। हालांकि प्रशासन द्वारा इन बच्चों को छात्रवृत्ति दिलाने के लिए शासन स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है।
कक्षा 9-10 के 206 संस्थानों में 7003 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें 6964 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी गई। वहीं, 11-12 से लेकर स्नातक और परास्नातक स्तर के 344 संस्थानों के 32739 विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। जिनमें से 15177 बच्चों को ही छात्रवृत्ति दी जा सकी है। अब आलम यह है कि जिन बच्चों की छात्रवृत्ति नहीं आई है,वह बच्चे परेशान हैं क्योंकि प्राईवेट संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थी ऐसे हैं जो अपनी पढ़ाई छात्रवृत्ति से ही पूरी कर रहे हैं। अब अगर उन्हें छात्रवृत्ति नहीं मिली तो उनकी पढ़ाई प्रभावित हो जाएगी। जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी आर.डी यादव ने बताया कि जिन पात्र बच्चों की छात्रवृत्ति नहीं आई है, उसके लिए जिला प्रशासन की ओर से बजट की मांग की गई है। जिससे शेष रह गए बच्चों को छात्रवृत्ति का लाभ दिलाया जा सके। उधर, बैंक में केवाईसी और डीबीटी प्रक्रिया न होने की वजह से कई बच्चों के आवेदन निरस्त भी हो गए हैं। ऐसे में सभी बच्चों को छात्रवृत्ति के लिए अपने बैंक खातों में आधार अपडेशन करवाएं। साथ ही विभागीय वेबसाइट पर चेक करते रहें।
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जनपद के 550 शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले 39742 ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। जिसमें से महज 15177 बच्चों के खाते में ही छात्रवृत्ति आई है, बाकी बचे 17562 बच्चे अब भी छात्रवृत्ति के लिए विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन शासन के पास बजट न होने की वजह से इन बच्चों की छात्रवृत्ति नहीं आ पा रही है। हालांकि प्रशासन द्वारा इन बच्चों को छात्रवृत्ति दिलाने के लिए शासन स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है।
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कक्षा 9-10 के 206 संस्थानों में 7003 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें 6964 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी गई। वहीं, 11-12 से लेकर स्नातक और परास्नातक स्तर के 344 संस्थानों के 32739 विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। जिनमें से 15177 बच्चों को ही छात्रवृत्ति दी जा सकी है। अब आलम यह है कि जिन बच्चों की छात्रवृत्ति नहीं आई है,वह बच्चे परेशान हैं क्योंकि प्राईवेट संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थी ऐसे हैं जो अपनी पढ़ाई छात्रवृत्ति से ही पूरी कर रहे हैं। अब अगर उन्हें छात्रवृत्ति नहीं मिली तो उनकी पढ़ाई प्रभावित हो जाएगी। जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी आर.डी यादव ने बताया कि जिन पात्र बच्चों की छात्रवृत्ति नहीं आई है, उसके लिए जिला प्रशासन की ओर से बजट की मांग की गई है। जिससे शेष रह गए बच्चों को छात्रवृत्ति का लाभ दिलाया जा सके। उधर, बैंक में केवाईसी और डीबीटी प्रक्रिया न होने की वजह से कई बच्चों के आवेदन निरस्त भी हो गए हैं। ऐसे में सभी बच्चों को छात्रवृत्ति के लिए अपने बैंक खातों में आधार अपडेशन करवाएं। साथ ही विभागीय वेबसाइट पर चेक करते रहें।
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