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राज्यपाल को सब ठीक दिखाने के लिए आंकड़ों की बाजीगरी में जुटा सरकारी अमला

Wed, 03 Feb 2021 01:29 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 03 Feb 2021 01:29 AM IST
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Sarkari amla alert for rajyapal see everythings good
झांसी। झांसी में विकास और जनहित की योजनाआें का हाल जानने के लिए प्रदेश की राज्यपाल संजीदा हैं। पांच फरवरी को वह झांसी आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार शासन की योजनाओं में सब चाकचौबंध दिखाने के लिए सरकारी अमला आंकड़ों की बाजीगरी करने में जुट गया है। हकीकत यह है कि झांसी के शहरी नागरिकों से लेकर ग्रामीण और किसान हर वर्ग परेशान है।
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कोरोना काल में बार-बार मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की कार्यशैली की कलई खुली। कोविड आईसीयू में भर्ती मरीज इलाज के लिए छटपटाते रहे। उन्होंने वीडियो बनाकर परिजनों को वायरल किया। ऐसे ही एक शिक्षक का वीडियो वायरल होने के बाद उनकी मौत भी हो गई थी। कैंसर के इलाज में बेहद महत्वपूर्ण करोड़ों रुपये कीमत की कोबाल्ट मशीन का फायदा एक भी मरीज को नहीं मिल सका। नियमों को ताक पर रख कर मशीन बेच दी गई।
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शासन ने मामले में उच्च स्तरीय जांच सौंपी हुई है। शिकंजा कसते ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कंपनी के नाम पर मुकदमा दर्ज कराया है। जिला क्षय रोग नियंत्रण व अन्य स्वास्थ्य सेवाएं भी चरमराई हुई हैं। यहां तक कि पिछले दिनों रोग पर नियंत्रण के लिए स्टाफ की तैनाती संबंधी स्वास्थ्य निदेशालय के निर्देशों की भी अनदेखी हुई। क्षय रोग से वर्ष 2017-18 में 313 मरीजों की, 2018-19 में 351, 2019-20 में 299 और 2020-21 में 87 लोगों की मौत हुई।
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आत्महत्या कर रहा अन्नदाता, गाय भूखी, करोड़ों के घोटाले
- एक साल में गरीबी और बदहाली से आजिज 17 किसानों ने आत्महत्या की।
- गोआश्रय स्थलों में भूसा और चारा नहीं है। मजबूरन गोवंश को आश्रय स्थलों से बाहर निकाला जा रहा है।
- मनरेगा में 1.25 करोड़ से अधिक के घोटालों की पुष्टि सरकारी अमला कर चुका है। बिना काम के भुगतान के तमाम मामले हैं।
- मनरेगा के तहत तमाम घपले उजागर होने खुद को फंसता देख अफसर घपलों, मामलों को दबाने में जुटे।
- सिंचाई विभाग में भी 77 लाख का एक घोटाला, एरच में घपला समेत एक करोड़ से अधिक के मामलों की जांच चल रही है।
- बकरी आश्रय स्थल बनाने के नाम पर 18 लाख रुपये का घोटाला हुआ।
- खेत समतलीकरण के नाम पर भी बड़े खेल हुए, मौके पर कोई काम नहीं हुआ।
- बुंदेलखंड पैकेज के तहत 65 करोड़ खर्च। मंडियों पर लटके हैं ताले किसान हो रहे परेशान।
काली सूची में कंपनी, कूड़ा उठाने में काट रहीं चांदी
स्मार्ट सिटी बनने की श्रेणी में शामिल झांसी में चहुंओर कूड़ा ही कूड़ा पसरा रहता है। आलम यह है कि डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करने वाली जिन चार कंपनियों के खिलाफ आगरा में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जिन्हें काली सूची में डाला जा चुका है वे आज भी झांसी में डंके की चोट पर कूड़ा उठा रही हैं। वो भी तब जब झांसी में इन कंपनियों का टेंडर मार्च 2019 में खत्म हो चुका है। कंपनियां अब तक नगर निगम से 25 करोड़ से अधिक वसूल चुकी हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना भी घिसट रही
प्रधानमंत्री आवास योजना भी झांसी में घिसट रही है। वर्ष 2018 में इनका निर्माण शुरू हुआ। ये आवास आज भी अधूरे हैं। योजना के तहत करारी प्रथम में 756, करारी पांच में 1180, अंबाबाय छह में 624 आवास बनने थे। ये आवास लोगों को आवंटित तो हो गए लेकिन अस्तित्व में नहीं आए हैं। यही नहीं, अपात्रों को पीएम आवास आवंटित होने और पात्रों को भटकने के भी शिकायतें आ रही हैं।
‘अफसरों के रवैये से किसान और ग्रामीण बहुत परेशान हैं। बेचारे किसान सम्मान निधि के लिए हर स्तर के अफसर के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। गुरसराय, गरौठा, बामौर सभी क्षेत्र के किसान अधिक परेशान हैं। सरकारी अमला अपने आंकड़े सुधार कर सब ठीक दिखाने में जुटा है। पीएम आवास अपात्रों को मिल रहे हैं पात्र भटक रहे हैं। सिंचाई व्यवस्थी भी चरमराई है। जिले के अधिकारी निरंकुश हैं’

जवाहर राजपूत, विधायक गरौठा
‘वैसे तो योजनाओं की हकीकत और सटीक आंकड़ों की जानकारी अफसरों और जनप्रतिनिधियों को बेहतर होगी लेकिन झांसी का एक आम नागरिक होने के नाते यह जरूर कह सकता हूं कि लोग परेशान हैं। शासन की जनकल्याण्कारी योजनाओं का लाभ लोगों को मिल सके इसके लिए अफसरों को गंभीर और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा। अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है ’
अनिल श्रीवास्तव, आरएसएस प्रांत कार्यवाह कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र
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