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सर्दी की बेदर्दी से बेचैनी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Dec 2017 12:29 AM IST
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- फोटो : demo
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कड़ाके की ठंड न पड़ने से किसान चिंतित हैं। दिन में तेज धूप पड़ने का विपरीत असर फसलों पर हो रहा है। ऐसे में अगर एक सप्ताह में फसलों को पानी नहीं दिया गया तो गेहूं, मटर और चना का दाना कमजोर पड़ जाएगा। जिन किसानों के पास पानी का साधन नहीं है, वह अब बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
दिसंबर में सर्दी अपने चरम पर होती है। कोहरे की चादर और हाड़ कंपा देने वाली सर्दी लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर देती है। लेकिन, पिछले कुछ सालों की तरह बुंदेलखंड के किसानों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। यदि एक सप्ताह के अंदर पाला और बारिश नहीं हुई तो गेहूं की फसल पर विपरीत असर पड़ेगा। ऐसा कृषि वैज्ञानिकों का मानना है। कृषि विशेषज्ञ दीपक गुप्ता ने बताया कि पिछले सालों की तरह इस साल भी बुवाई पर मौसम असर डालेगा। इस साल भी पाला न गिरने और बारिश न होने के पूरे आसार बने हुए हैं। एक सप्ताह के अंदर मौसम विभाग को दूर-दूर तक संभावनाएं नहीं दिखाई दे रहीं हैं, इससे गेहूं कि फसल को सर्वाधिक 35 प्रतिशत तक नुकसान होने की संभावनाएं बढ़ गईं हैं।
क्योंकि, पानी न मिलने और तेज धूप के कारण बाल जल्द ही पकने की कगार पर आ जातीं हैं और दाना भी कमजोर हो जाता है।
मौसम का यह बदलाव मटर और चना को भी नष्ट कर देगा। सबसे ज्यादा नुकसान बबीना, बंगरा, मऊरानीपुर और गरौठा तहसील में होगा क्योंकि इन तहसील क्षेत्रों में पानी का संकट पहले से ही बना हुआ है। फसल बचाने के लिए किसानों को सींचने की सलाह दी जा रही है। तो दूसरी ओर मौसम को केवल दलहन में अरहर के लिए अनुकूल बताया गया है। जनपद में अरहर की पैदावार का क्षेत्रफल मात्र 300 हेक्टेयर ही है।
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दिसंबर में सर्दी अपने चरम पर होती है। कोहरे की चादर और हाड़ कंपा देने वाली सर्दी लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर देती है। लेकिन, पिछले कुछ सालों की तरह बुंदेलखंड के किसानों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। यदि एक सप्ताह के अंदर पाला और बारिश नहीं हुई तो गेहूं की फसल पर विपरीत असर पड़ेगा। ऐसा कृषि वैज्ञानिकों का मानना है। कृषि विशेषज्ञ दीपक गुप्ता ने बताया कि पिछले सालों की तरह इस साल भी बुवाई पर मौसम असर डालेगा। इस साल भी पाला न गिरने और बारिश न होने के पूरे आसार बने हुए हैं। एक सप्ताह के अंदर मौसम विभाग को दूर-दूर तक संभावनाएं नहीं दिखाई दे रहीं हैं, इससे गेहूं कि फसल को सर्वाधिक 35 प्रतिशत तक नुकसान होने की संभावनाएं बढ़ गईं हैं।
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क्योंकि, पानी न मिलने और तेज धूप के कारण बाल जल्द ही पकने की कगार पर आ जातीं हैं और दाना भी कमजोर हो जाता है।
मौसम का यह बदलाव मटर और चना को भी नष्ट कर देगा। सबसे ज्यादा नुकसान बबीना, बंगरा, मऊरानीपुर और गरौठा तहसील में होगा क्योंकि इन तहसील क्षेत्रों में पानी का संकट पहले से ही बना हुआ है। फसल बचाने के लिए किसानों को सींचने की सलाह दी जा रही है। तो दूसरी ओर मौसम को केवल दलहन में अरहर के लिए अनुकूल बताया गया है। जनपद में अरहर की पैदावार का क्षेत्रफल मात्र 300 हेक्टेयर ही है।
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