{"_id":"5fd67de98ebc3e3db521beca","slug":"sard-hawa-sijan-ka-pehla-kohra-khas-ban-ghaya-sande-jhansi-news-jhs1834067122","type":"story","status":"publish","title_hn":"सर्द हवा, सीजन का पहला कोहरा, खास बन गया संडे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सर्द हवा, सीजन का पहला कोहरा, खास बन गया संडे
विज्ञापन
रविवार को नगर में छाए कोहरा के कारण झांसी के आवास विकास के शिवपुरी हाईवे पर छाए कोहरा से रास्ता ही
सर्द हवा, सीजन का पहला कोहरा, खास बन गया संडे
झांसी। रविवार सुबह जब लोग सोकर उठे तो उनको मौसम का खुशनुमा नजारा दिखा। कोहरे की चादर छाई हुई थी, ठंडी हवाएं चल रही थीं। सूरज के दर्शन नहीं हुए। पूरे दिन यही सिलसिला बना रहा। साप्ताहिक छुट्टी होने के चलते लोगों ने मौसम के बदले मिजाज का मजा लिया। या तो घर पर ही चाट-पकौड़ी तली गईं या फिर लोगों ने बाजार से नाश्ता मंगाया। साथ ही, घर-घर बक्से खोलकर ऊनी कपड़े, जैकेट, रजाई निकाले गए। कानुपर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी सुरेंद्र नाथ पांडेय के अनुसार 16 दिसंबर से तापमान और गिरेगा। इससे ठंड और बढ़ेगी।
...सूरज मद्धिम सा हुआ, मौसम सिसकी लेय, कुहरा नाचे मोर सा, ठंड ठहाका देय। मौसम ठिठुरा ठंड में, चला रजाई ओढ़, सूरज अस्ताचल छुपा, ठंड पड़ी मुंहतोड़। गरम पकौड़े तल रही, बीवी मन मुस्काय, गरम जलेबी देखकर, मुख में पानी आए... किसी कवि की ये पंक्तियां संडे की सुबह सटीक जान पड़ीं। छुट्टी के दिन घर-घर मौसम के इस रूप का स्वागत हुआ। बच्चे उठने में अलसाते रहे। गपशप के बीच बेड टी के ही दो-तीन दौर हो गए। उधर, ठंड के चलते सुबह देर तक महानगरों की सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। भीड़ थी तो चाय और समौसे, कचौड़ी और जलेबी की दुकानों पर।
घरों पर भी बच्चों, बड़ों ने अपनी-अपनी पसंद के नाश्ते और अन्य व्यंजन की फरमाइश मां, पत्नी, दीदी या दादी के सामने रख दी। लोग कभी छत या बालकनी से आस पड़ोस का नजारा ले रहे थे तो कभी टीवी पर देश के अलग-अलग हिस्सों में ठंड और कोहरे की स्थिति का नजारा लेते रहे।
विज्ञापन
इसके बाद युवा अपनी मोटरसाइकिल, स्कूटी उठाकर शहर के सैर सपाटे पर निकले। इस दौरान ठंड से बचाव और फैशन का अंदाज बनाए रखने के लिए उन्होंने अपने पसंद की जैकेट, मफलर और टोपी पहनी हुई थी। वहीं, धूप न निकलने और ठंडी हवा से बचने के लिए अधिकतर घरों में लोगों ने खिड़की दरवाजे बंद रखे। दिन में ही लोगों ने शाम की भी योजना बना ली। कोई परिवार सहित मंदिर दर्शन को निकला तो कोई पसंद के चाट कॉर्नर या साउथ इंडियन रेस्टोरेंट पर पहुंचा। देर रात ठंडी हवाओं के बीच एक बार फिर कोहरा छाने लगा।
परिवार ने एक साथ खाईं मूंगफली, पिया कढ़ाई का दूध
सर्दी के मौसम ने बुजुर्गों को भी खुश होने का मौका दिया। दादा-दादी ठंड के कारण घूमने तो नहीं निकले लेकिन उन्होंने बच्चों से मूंगफली, हलवाई की दुकान से कढ़ाई का दूध और अपनी प्रिय मिठाई मंगाई। सभी ने एक साथ बैठकर गरम-गरम मूंगपली खाई। दूध और मिठाई का भी स्वाद लिया।
ऐसे गिरेगा पारा
तारीख अधिकतम न्यूनतम
(दिसंबर) (डिग्री) (डिग्री)
13 21 13
14 24 12
15 24 09
16 24 08
17 22 05
18 23 06
विज्ञापन
झांसी। रविवार सुबह जब लोग सोकर उठे तो उनको मौसम का खुशनुमा नजारा दिखा। कोहरे की चादर छाई हुई थी, ठंडी हवाएं चल रही थीं। सूरज के दर्शन नहीं हुए। पूरे दिन यही सिलसिला बना रहा। साप्ताहिक छुट्टी होने के चलते लोगों ने मौसम के बदले मिजाज का मजा लिया। या तो घर पर ही चाट-पकौड़ी तली गईं या फिर लोगों ने बाजार से नाश्ता मंगाया। साथ ही, घर-घर बक्से खोलकर ऊनी कपड़े, जैकेट, रजाई निकाले गए। कानुपर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी सुरेंद्र नाथ पांडेय के अनुसार 16 दिसंबर से तापमान और गिरेगा। इससे ठंड और बढ़ेगी।
...सूरज मद्धिम सा हुआ, मौसम सिसकी लेय, कुहरा नाचे मोर सा, ठंड ठहाका देय। मौसम ठिठुरा ठंड में, चला रजाई ओढ़, सूरज अस्ताचल छुपा, ठंड पड़ी मुंहतोड़। गरम पकौड़े तल रही, बीवी मन मुस्काय, गरम जलेबी देखकर, मुख में पानी आए... किसी कवि की ये पंक्तियां संडे की सुबह सटीक जान पड़ीं। छुट्टी के दिन घर-घर मौसम के इस रूप का स्वागत हुआ। बच्चे उठने में अलसाते रहे। गपशप के बीच बेड टी के ही दो-तीन दौर हो गए। उधर, ठंड के चलते सुबह देर तक महानगरों की सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। भीड़ थी तो चाय और समौसे, कचौड़ी और जलेबी की दुकानों पर।
विज्ञापन
घरों पर भी बच्चों, बड़ों ने अपनी-अपनी पसंद के नाश्ते और अन्य व्यंजन की फरमाइश मां, पत्नी, दीदी या दादी के सामने रख दी। लोग कभी छत या बालकनी से आस पड़ोस का नजारा ले रहे थे तो कभी टीवी पर देश के अलग-अलग हिस्सों में ठंड और कोहरे की स्थिति का नजारा लेते रहे।
विज्ञापन
इसके बाद युवा अपनी मोटरसाइकिल, स्कूटी उठाकर शहर के सैर सपाटे पर निकले। इस दौरान ठंड से बचाव और फैशन का अंदाज बनाए रखने के लिए उन्होंने अपने पसंद की जैकेट, मफलर और टोपी पहनी हुई थी। वहीं, धूप न निकलने और ठंडी हवा से बचने के लिए अधिकतर घरों में लोगों ने खिड़की दरवाजे बंद रखे। दिन में ही लोगों ने शाम की भी योजना बना ली। कोई परिवार सहित मंदिर दर्शन को निकला तो कोई पसंद के चाट कॉर्नर या साउथ इंडियन रेस्टोरेंट पर पहुंचा। देर रात ठंडी हवाओं के बीच एक बार फिर कोहरा छाने लगा।
परिवार ने एक साथ खाईं मूंगफली, पिया कढ़ाई का दूध
सर्दी के मौसम ने बुजुर्गों को भी खुश होने का मौका दिया। दादा-दादी ठंड के कारण घूमने तो नहीं निकले लेकिन उन्होंने बच्चों से मूंगफली, हलवाई की दुकान से कढ़ाई का दूध और अपनी प्रिय मिठाई मंगाई। सभी ने एक साथ बैठकर गरम-गरम मूंगपली खाई। दूध और मिठाई का भी स्वाद लिया।
ऐसे गिरेगा पारा
तारीख अधिकतम न्यूनतम
(दिसंबर) (डिग्री) (डिग्री)
13 21 13
14 24 12
15 24 09
16 24 08
17 22 05
18 23 06