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सदर में श्रीराम जन्म लीला के साथ शुरू होगी रामलीला
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sadar bazar ramlila
झांसी। महानगर में सदर बाजार की रामलीला भगवान श्रीराम के जन्म लीला के साथ 17 अक्तूबर से शुरू होगी। इस बार लीला में वृंदावन के कलाकार प्रस्तुति देंगे। लीलाएं 26 अक्तूबर तक चलेगी। दर्शकों के बैठने की व्यवस्था सरकार के दिशा निर्देशों के तहत होगी।
बुंदेलखंड में सदर बाजार की रामलीला का विशेष आकर्षण है। साल 1925 से लगातार हो रहे, इस आयोजन का इस बार 95 वां वर्ष होगा। इस साल कोविड - 19 से बचाव के कारण इस बार रामलीला मंचन को लेकर संशय बना हुआ था। लेकिन सरकार की नई गाइड लाइन में मंचन को लेकर राहत देने के बाद रामलीला कमेटी सदर ने आयोजन का निर्णय लिया। कमेटी के महामंत्री राकेश शर्मा ने बताया कि 19 अक्तूबर से लीलाओं का मंचन वृंदावन के कलाकार करेंगे। वृंदावन से रामलीला मंडली बुलाई गई है। कमेटी के सदस्य शांतनु पांडेय ने बताया कि मंचन में अवध एवं ब्रज के संवादों के साथ ही दर्शकों को ब्रज - अवध की शैली में रामलीला देखनी को मिलेगी। उनके अनुसार इससे पहले भी कई मौकों पर बाहर के कलाकारों ने अपनी अभिनय प्रतिभा मंचन में प्रस्तुत की है। धनुष यज्ञ, राम जन्म सहित कई प्रमुख लीलाओं का सोशल साइट्स पर प्रसारण करने का प्रयास होगा। ताकि लोग घर बैठे सदर की रामलीला का आनंद प्राप्त कर सके।
जीवन को सार्थकता देती है रामायण
झांसी। रामायण केंद्र भोपाल और अयोध्या शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण के अंतर्गत आयोजित वेबिनार में आचार्य कृष्णकांत चतुर्वेदी ने कहा कि रामायण जीवन को सार्थकता प्रदान करती है। संस्थान के निदेशक डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह ने विश्वकोष की महत्ता को स्पष्ट किया। संयोजक डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि रामकथा से लेकर राम कथा वाचन की परंपरा में बहुत महत्वपूर्ण सूत्र देश विदेश तक बिखरे पडे़ है। बेविनार में डॉ. लल्लन प्रसाद, बाल संत मुकुंदाचार्य, श्रीलंका के बाला व्यकंटेश्वर, मुख्य अतिथि डॉ. विलिअर्ट वान डे बोगार्ट ने भी विचार रखे। मुख्य अतिथि ने थाईलैंड में राम की संस्कृति को विस्तार से बताया।
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बुंदेलखंड में सदर बाजार की रामलीला का विशेष आकर्षण है। साल 1925 से लगातार हो रहे, इस आयोजन का इस बार 95 वां वर्ष होगा। इस साल कोविड - 19 से बचाव के कारण इस बार रामलीला मंचन को लेकर संशय बना हुआ था। लेकिन सरकार की नई गाइड लाइन में मंचन को लेकर राहत देने के बाद रामलीला कमेटी सदर ने आयोजन का निर्णय लिया। कमेटी के महामंत्री राकेश शर्मा ने बताया कि 19 अक्तूबर से लीलाओं का मंचन वृंदावन के कलाकार करेंगे। वृंदावन से रामलीला मंडली बुलाई गई है। कमेटी के सदस्य शांतनु पांडेय ने बताया कि मंचन में अवध एवं ब्रज के संवादों के साथ ही दर्शकों को ब्रज - अवध की शैली में रामलीला देखनी को मिलेगी। उनके अनुसार इससे पहले भी कई मौकों पर बाहर के कलाकारों ने अपनी अभिनय प्रतिभा मंचन में प्रस्तुत की है। धनुष यज्ञ, राम जन्म सहित कई प्रमुख लीलाओं का सोशल साइट्स पर प्रसारण करने का प्रयास होगा। ताकि लोग घर बैठे सदर की रामलीला का आनंद प्राप्त कर सके।
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जीवन को सार्थकता देती है रामायण
झांसी। रामायण केंद्र भोपाल और अयोध्या शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण के अंतर्गत आयोजित वेबिनार में आचार्य कृष्णकांत चतुर्वेदी ने कहा कि रामायण जीवन को सार्थकता प्रदान करती है। संस्थान के निदेशक डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह ने विश्वकोष की महत्ता को स्पष्ट किया। संयोजक डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि रामकथा से लेकर राम कथा वाचन की परंपरा में बहुत महत्वपूर्ण सूत्र देश विदेश तक बिखरे पडे़ है। बेविनार में डॉ. लल्लन प्रसाद, बाल संत मुकुंदाचार्य, श्रीलंका के बाला व्यकंटेश्वर, मुख्य अतिथि डॉ. विलिअर्ट वान डे बोगार्ट ने भी विचार रखे। मुख्य अतिथि ने थाईलैंड में राम की संस्कृति को विस्तार से बताया।
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