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गुनाहों की तौबा, अपनों की मगफिरत के लिए उठे हाथ

Mon, 29 Mar 2021 12:25 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 29 Mar 2021 12:25 AM IST
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sabbe barat prayer to forgive guilty
शब ए बारात पर फिल्टर रोड के कब्रस्तान में अपने पूर्वजों के गुनाहों को माफ करने के लिए खुदा से दुआ म
झांसी। वो नूरानी रात आई है, गुनाहों से तौबा की रात आई है, मांग ले अपने अजीजों की मगफिरत ये इबादत की रात आई है। शब-ए-बरात के मौके पर विशेष झालरों से सजीं मस्जिदों में रात भर इबादतों का सिलसिला जारी रहा तो अधिकांश ने कुरआन की तिलावत में रात गुजारी।
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शब-ए-बरात यानी इबादत की रात। रविवार की रात भर मुसलमानों ने गुनाहों को माफ करने के लिए इबादत कर अल्लाह से दुआ की। रात भर कुरआन शरीफ की तिलावत करते रहे। गुनाहों से निजात की रात में अकीदमंदो ने खुदा से सच्चे दिल से तौबा की। अपने और परिवार के लिए खुदा से खुशहाली मांगी। कब्रिस्तानो में बुजुर्गो की कब्र पर रोशनी कर जन्नत की दुआ मांगी। शहर के मुस्लिम इलाकों में चहल-पहल बनी रही। नमाज-ए-इशा के बाद से लेकर सुबह फजर तक लोग मस्जिद, कब्रिस्तान और सड़क पर दिखाई दिए। किसी ने अपने गुनाहों की माफी के लिए तो किसी ने अपने बुजुर्गों को बख्श्वाने की दुआ की। सुबह से ही महिलाओं ने तरह-तरह के पकवान बनाने शुरू कर दिए थे, जो माहौल में सोंधी खुशबू बिखेर रहे थे। रात भर चली इबादत सोमवार की सुबह जाकर थमी। कब्रिस्तानों में भी विशेष सजावट की गई। लोगों ने कब्रिस्तानों में पहुुंचकर अपने अजीजों की मगफिरत की दुआ मांगी।
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लोगों ने रोजे भी रखे
रात भर की इबादत के बाद लोगों ने फजर की नमाज से पहले सहरी की और अगले दिन के लिए रोजा रखा। मुफ्ती साबिर अंसारी ने बताया कि अल्लाह सब्र करने वालों और नेक दिल इंसानों पर अपनी रहमत बरसाता है। इस पाकीजा रात को बंदों के साल भर के आमाल लिखे जाते हैं। इसी रात इंसान की जिंदगी और मौत का फैसला लिया जाता है। जिंदगी व मौत का लेखा जोखा शब-ए-बरात की रात होता है। इस रात हर दुआ कबूल होती है।
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कोरोना के चलते स्थगित किए गए जलसे
शब-ए-बरात में रात भर शहर में जलसे व अन्य धार्मिक कार्यक्रम होते थे, लेकिन कोरोना के चलते इस बार भी शहर भर में होने वाले 12 से अधिक जलसों को स्थगित कर दिया गया। उलेमाओं ने कहा कि इस कोरोना जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए यह जरुरी था। अधिकांश लोगों ने घरों में भी इबादत की।
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