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झांसी के रुद्र नारायण ने फाकाकशी में भी नहीं किया था आजाद की गिरफ्तारी का सौदा
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क्रांतिकारी मास्टर रुद्र नारायण के पौत्र मुकेश नारायण।
झांसी। काकोरी कांड के बाद चंद्रशेखर आजाद झांसी आ गए थे। यहां सबसे पहले वे मास्टर रुद्र नारायण के संपर्क में आए। मास्टर साहब उन्हें अपने मकान के तलघर में छुपाकर रखते थे, पर पुलिस के बढ़ते दबाव के चलते उन्होंने आजाद की व्यवस्था ओरछा के पास जंगल में स्थित सातार नदी के हनुमान मंदिर की गुफा में कर दी थी। यहीं से सारी क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन होता था। पुलिस की नजर मास्टर रुद्र नारायण पर थी। सारे प्रयास विफल रहने पर अंग्रेज अफसरों ने उनकी फाकाकशी को हथियार बनाने की कोशिश की, उनसे कहा पच्चीस हजार रुपये नकद लो और आजाद को गिरफ्तार करवा दो। पर, पेट की आग से कही अधिक उनके सीने में देश को स्वतंत्र करवाने के जज्बे की आग थी, उन्होंने कहा मैं ऐसा कोई भी काम नहीं करूंगा जिससे मेरी आने वाली पीढ़ियों को सिर झुकाना पड़े।
आजादी से पहले स्थापित कर दी थी रानी झांसी की प्रतिमा
इतिहासकार हरगोविंद कुशवाहा बताते हैं कि मास्टर रुद्र नारायण का घर आजाद की स्मृतियों का मंदिर है। इस देश के वे एक मात्र व्यक्ति हैं जिन्होंने चंद्रशेखर आजाद का पहला और आखिरी फोटो खींचा। अंग्रेज अफसर पूरी ताकत लगाते रहे पर उनसे इस फोटो को पा नहीं सके। बाद में आजाद भारत में उन्होंने इस फोटो को जारी किया। झांसी में जिस मोहल्ले में वे रहते थे अब उसका नाम रुद्र नारायण मोहल्ला हो गया है। 1925 में काकोरी कांड के बाद आजाद तीन वर्ष तक मास्टर रुद्र नारायण समेत झांसी व आसपास के क्रांतिकारियों के संपर्क में रहे। यहां पर कई बार भगत सिंह व अन्य क्रांतिकारी भी आए। मास्टर साहब बुंदेलखंड की धरती पर देशभक्ति का अनूठा उदाहरण हैं। गुलाम भारत में ही उन्होंने 1945 में महारानी लक्ष्मी बाई की प्रतिमा बनाकर अंग्रेज सरकार की परवाह किए बगैर उसे स्थापित कर दिया था। कुशवाहा बताते हैं कि एक बार तो आजाद ने ही मजाक में मास्टर रुद्र नारायण से कह दिया था कि मुझे गिरफ्तार करवा दीजिए जिससे कम से कम इस घर के लोगों को दो वक्त की रोटी तो मिल सके, पर मास्टर साहब ने कहा था देश के लिए मुझे भूखे रहकर मौत मंजूर है पर देशद्रोह की रोटी मंजूर नहीं। मास्टर रुद्रनारायण क्रांतिकारी के साथ अच्छे फोटोग्राफर, चित्रकार और मूर्तिकार भी थे।
छोटे भाई बनकर रहते थे चंद्रशेखर आजाद
क्रांतिकारी मास्टर रुद्र नारायण के पौत्र मुकेश नारायण सक्सेना बताते हैं कि उनके दादा मास्टर रुद्रनारायण ने तीन वर्ष तक बुंदेलखंड में अपने छोटे भाई की तरह चंद्रशेखर आजाद को अंग्रेजी हुकूमत से बचाकर सुरक्षित रखा। आजाद की स्मृतियों से जुड़ी अनेक चीजें आज भी उनके घर में मौजूद हैं। इन चीजों को देखकर उन्हें देश प्रेम की प्रेरणा मिलती हैं। आजाद जिस पलंग पर लेटते थे वह आज भी हमारे पास सुरक्षित है। मुकेश कहते हैं कि देश के लिए सब कुछ कुर्बान करने वाले महापुरुष का हमारे परिवार में जन्म लेना ही हमारे लिए गौरव का विषय है।
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आजादी से पहले स्थापित कर दी थी रानी झांसी की प्रतिमा
इतिहासकार हरगोविंद कुशवाहा बताते हैं कि मास्टर रुद्र नारायण का घर आजाद की स्मृतियों का मंदिर है। इस देश के वे एक मात्र व्यक्ति हैं जिन्होंने चंद्रशेखर आजाद का पहला और आखिरी फोटो खींचा। अंग्रेज अफसर पूरी ताकत लगाते रहे पर उनसे इस फोटो को पा नहीं सके। बाद में आजाद भारत में उन्होंने इस फोटो को जारी किया। झांसी में जिस मोहल्ले में वे रहते थे अब उसका नाम रुद्र नारायण मोहल्ला हो गया है। 1925 में काकोरी कांड के बाद आजाद तीन वर्ष तक मास्टर रुद्र नारायण समेत झांसी व आसपास के क्रांतिकारियों के संपर्क में रहे। यहां पर कई बार भगत सिंह व अन्य क्रांतिकारी भी आए। मास्टर साहब बुंदेलखंड की धरती पर देशभक्ति का अनूठा उदाहरण हैं। गुलाम भारत में ही उन्होंने 1945 में महारानी लक्ष्मी बाई की प्रतिमा बनाकर अंग्रेज सरकार की परवाह किए बगैर उसे स्थापित कर दिया था। कुशवाहा बताते हैं कि एक बार तो आजाद ने ही मजाक में मास्टर रुद्र नारायण से कह दिया था कि मुझे गिरफ्तार करवा दीजिए जिससे कम से कम इस घर के लोगों को दो वक्त की रोटी तो मिल सके, पर मास्टर साहब ने कहा था देश के लिए मुझे भूखे रहकर मौत मंजूर है पर देशद्रोह की रोटी मंजूर नहीं। मास्टर रुद्रनारायण क्रांतिकारी के साथ अच्छे फोटोग्राफर, चित्रकार और मूर्तिकार भी थे।
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छोटे भाई बनकर रहते थे चंद्रशेखर आजाद
क्रांतिकारी मास्टर रुद्र नारायण के पौत्र मुकेश नारायण सक्सेना बताते हैं कि उनके दादा मास्टर रुद्रनारायण ने तीन वर्ष तक बुंदेलखंड में अपने छोटे भाई की तरह चंद्रशेखर आजाद को अंग्रेजी हुकूमत से बचाकर सुरक्षित रखा। आजाद की स्मृतियों से जुड़ी अनेक चीजें आज भी उनके घर में मौजूद हैं। इन चीजों को देखकर उन्हें देश प्रेम की प्रेरणा मिलती हैं। आजाद जिस पलंग पर लेटते थे वह आज भी हमारे पास सुरक्षित है। मुकेश कहते हैं कि देश के लिए सब कुछ कुर्बान करने वाले महापुरुष का हमारे परिवार में जन्म लेना ही हमारे लिए गौरव का विषय है।

क्रांतिकारी मास्टर रुद्र नारायण।
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