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Jhansi News: ‘सालों से नहीं बढ़ी आरटीई की फीस, मिलती भी है सालभर बाद’

Wed, 05 Feb 2025 01:56 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 05 Feb 2025 01:56 AM IST
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'RTE fees have not increased for years, they get it even after a year'

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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अमर उजाला कार्यालय में मंगलवार को हुए संवाद में स्कूल संचालकों ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रवेशित विद्यार्थियों की शासन से मिलने वाली फीस सालों से भी नहीं बढ़ी है। मिलती भी है तो सालभर बाद। मांग की कि कम से कम दो हजार रुपये प्रति विद्यार्थी फीस विद्यालयों को मिलनी चाहिए। बुंदेलखंड स्कूल एसोसिएशन के सचिव और न्यू एरा पब्लिक स्कूल के संचालक अरिंदम घोष ने कहा कि बच्चों को शिक्षित बनाने में निजी स्कूल का भी अहम योगदान है। शिक्षा का अधिकार भी अच्छी पहल है। देश की तब तरक्की होगी, जब बच्चे शिक्षित होंगे। मध्यम वर्गीय या छोटे स्कूलों के लिए विद्यालय संचालित करने में तो और भी दिक्कत हो रही है। कई अपात्र भी आरटीई के तहत प्रवेश पा जा रहे हैं। कोई भी अपात्र होने पर विद्यालय स्तर से जब कोई आपत्ति की जाती है तो उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है। ऐसे में वास्तविक जरूरतमंद भी शिक्षा पाने से वंचित रह जाते हैं। सालों से आरटीई के तहत प्रवेशित विद्यार्थी की फीस 450 रुपये ही निर्धारित है। जबकि, कई प्रदेशों में ये बहुत ज्यादा है। ब्लू बेल्स पब्लिक स्कूल के निदेशक विशाल राय ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत जारी गाइडलाइन का ही पालन होना चाहिए। समय के साथ आरटीई के तहत स्कूलों को मिलने वाली फीस में भी इजाफा होते रहना चाहिए। एल्पाइन पब्लिक स्कूल के संचालक दीपक राय ने कहा कि आरटीई के तहत कक्षा एक से प्रवेश लेने का प्रावधान है। जबकि, नर्सरी और एलकेजी में भी आरटीई के तहत प्रवेश करवाए जा रहे हैं। उन्होंने भी मांग की कि जो जरूरतमंद हैं, उन्हीं को इस योजना का लाभ मिलना चाहिए। ज्ञान स्थली स्कूल के अंकुर दुबे ने कहा कि आरटीई के तहत कई ऐसे विद्यार्थियों को भी प्रवेश मिल जाता है, जिनके अभिभावक उन्हें कार से स्कूल छोड़ने आते हैं। महात्मा हंसराज मॉडर्न स्कूल के अखिलेश पटेरिया ने कहा कि आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले किसी बच्चे को लेकर स्कूल कोई आपत्ति करता हो तो उसकी भी सुनवाई होनी चाहिए। वहीं, मॉडर्न पब्लिक स्कूल के प्रबंधक अनिल पांडेय ने भी कहा कि आरटीई का उद्देश्य जरूरतमंदों को शिक्षा का अधिकार उपलब्ध कराना है। इस बात पर पूरा जोर होना चाहिए कि कोई भी अपात्र योजना के तहत प्रवेश न पा जाए।
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