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जॉब कार्ड धारकों का दो करोड़ रुपये बकाया
ब्यूरो
Updated Fri, 05 Feb 2016 12:45 AM IST
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झांसी। सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड के किसानों को भले ही शासन ने सौ दिन से अधिक रोजगार देने की दरियादिली दिखाई हो, लेकिन स्थानीय प्रशासन मजदूरों को उनकी मजदूरी दिलाने के लिए गंभीरता नहीं दिखा पा रहा है। स्थिति यह है कि जिले में मजदूरों की दो करोड़ 12 लाख 65 हजार रुपये मजदूरी प्रशासन पर बकाया है।
बदहाली से जूझ रहे बुंदेलखंड के ग्रामीण अंचल में रहने वाले जॉब कार्ड धारकों को नियमित मजदूरी दिलाकर समय पर उसका भुगतान कराने में केंद्र सरकार कोई कमी नहीं छोड़ रही है। हाल में प्रदेश के मनरेगा के खाते में केंद्र सरकार ने तीन सौ करोड़ रुपये डाले हैं, जिससे मजदूरों की मजदूरी का अविलंब भुगतान हो सके। इसके बावजूद जिले के मजदूरों को मजदूरी के लिए भटकना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि काम खत्म हुए कई दिन बीतने के बाद भी मजदूरों को उनकी मजदूरी नहीं मिली है।
मजदूरों का सर्वाधिक बकाया चिरगांव ब्लॉक में है। यहां 38.23 लाख रुपये की बकायेदारी है, जबकि सबसे कम बकायेदारी बड़ागांव ब्लॉक में 4.24 लाख रुपये की है। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार ने चिरगांव, मोंठ, बंगरा, मऊरानीपुर, गुरसरांय व बामौर ब्लॉक के खंड विकास अधिकारियों को चेतावनी देते हुए शीघ्र भुगतान कराने को कहा है। बड़ागांव व बबीना ब्लॉक में काम की गति अपेक्षाकृत सही होने पर चेतावनी नहीं दी गई।
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झांसी में मनरेगा के तहत सर्वाधिक काम हो रहा है। प्रतिदिन पच्चीस से तीस हजार मानव दिवस सृजित किए जा रहे हैं। अधिक काम और सरवर की धीमी गति के कारण फीडिंग समय पर नहीं हो पा रही है, इस कारण जॉब कार्ड धारकों का भुगतान नहीं हो पा रहा है।
विकास मिश्रा
उप आयुक्त, मनरेगा, झांसी।
सिर्फ 1668 को मिला सौ दिन से अधिक रोजगार
झांसी। सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड के किसानों के लिए महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम के नियमों में बदलाव भले ही राहत लेकर आए हों, लेकिन आंकड़ों में यह दिखाई नहीं दे रही है। लाखों जॉब कार्ड धारकों के सापेक्ष हजारों को ही सौ दिन या उससे अधिक रोजगार मिल सका है। सबसे अधिक काम जालौन में हुआ है, जबकि सबसे खराब स्थिति ललितपुर की रही है।
बुंदेलखंड के सातों जिलों सहित देश के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए मनरेगा के नियमों में संशोधन कर केंद्र सरकार ने जॉब कार्ड धारकों को सौ दिन की जगह डेढ़ सौ दिन रोजगार देने का निर्णय लिया है। झांसी जिले में पौने दो लाख जॉब कार्ड धारक हैं। वित्तीय वर्ष 2015-16 में तीस लाख मानव दिवस सृजित करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए पिछले माह से नियमित 25 से तीस हजार लोगों को रोजगार दिया जा रहा है।
गत 22 जनवरी को 35 हजार मानव सृजित कर जिले ने पूरे प्रदेश में रिकार्ड बनाया था, लेकिन सौ दिन एवं उससे अधिक रोजगार देने के आंकड़ों में स्थिति संतोष जनक नहीं दिख रही है। पौने दो लाख जॉब कार्ड धारकों के सापेक्ष 1688 लोगों को सौ दिन रोजगार मिला, जबकि 1668 लोगों को सौ दिन से अधिक रोजगार मिला।
बुंदेलखंड में सबसे अच्छी स्थिति जालौन जिले की है, यहां 628 लोगों को सौ दिन व 2891 लोगों को सौ दिन से अधिक रोजगार मिला। सबसे खराब स्थिति ललितपुर जिले की है, यहां 40 लोगों को सौ दिन व 206 लोगों को सौ दिन से अधिक रोजगार मिला है।
पलायन रोकने कराएं मनरेगा के काम
झांसी। शासन की प्राथमिकता है कि क्षेत्र से पलायन न हो, मनरेगा के तहत अधिक से अधिक रोजगार का सृजन किया जाए। हर परिवार को रोजगार दिलाने का प्रयास करें। यह बात कृषि उत्पादन आयुक्त प्रवीर कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में कही। उन्होंने कहा कि वर्षा का जल संचय करने के लिए अभी से नालों को चिह्नित कर लें।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड पैकेज से डग वैल और ब्लास्ट वैल का निर्माण कराया गया है। पेयजल समस्या हो तो इनका गहरीकरण करा लें। जानवरों के लिए आवश्यक चारे का प्रबंध कर लें, साथ ही शिविर स्थापित कर प्रतिदिन चारे की खपत की जानकारी लें।
वीडियो कांफ्रेंसिंग में मंडलायुक्त के. राममोहन राव ने कहा कि मंडल के झांसी एवं ललितपुर में जल स्तर काफी नीचे गिर रहा है। जालौन में अभी समस्या नहीं है। झांसी में चार सौ व ललितपुर में 600 नये हैंडपंप लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जालौन में पांच सौ नये हैंडपंप व 1500 हैंडपंप रीबोर का प्रस्ताव भी भेजा गया है।
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बदहाली से जूझ रहे बुंदेलखंड के ग्रामीण अंचल में रहने वाले जॉब कार्ड धारकों को नियमित मजदूरी दिलाकर समय पर उसका भुगतान कराने में केंद्र सरकार कोई कमी नहीं छोड़ रही है। हाल में प्रदेश के मनरेगा के खाते में केंद्र सरकार ने तीन सौ करोड़ रुपये डाले हैं, जिससे मजदूरों की मजदूरी का अविलंब भुगतान हो सके। इसके बावजूद जिले के मजदूरों को मजदूरी के लिए भटकना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि काम खत्म हुए कई दिन बीतने के बाद भी मजदूरों को उनकी मजदूरी नहीं मिली है।
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मजदूरों का सर्वाधिक बकाया चिरगांव ब्लॉक में है। यहां 38.23 लाख रुपये की बकायेदारी है, जबकि सबसे कम बकायेदारी बड़ागांव ब्लॉक में 4.24 लाख रुपये की है। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार ने चिरगांव, मोंठ, बंगरा, मऊरानीपुर, गुरसरांय व बामौर ब्लॉक के खंड विकास अधिकारियों को चेतावनी देते हुए शीघ्र भुगतान कराने को कहा है। बड़ागांव व बबीना ब्लॉक में काम की गति अपेक्षाकृत सही होने पर चेतावनी नहीं दी गई।
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झांसी में मनरेगा के तहत सर्वाधिक काम हो रहा है। प्रतिदिन पच्चीस से तीस हजार मानव दिवस सृजित किए जा रहे हैं। अधिक काम और सरवर की धीमी गति के कारण फीडिंग समय पर नहीं हो पा रही है, इस कारण जॉब कार्ड धारकों का भुगतान नहीं हो पा रहा है।
विकास मिश्रा
उप आयुक्त, मनरेगा, झांसी।
सिर्फ 1668 को मिला सौ दिन से अधिक रोजगार
झांसी। सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड के किसानों के लिए महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम के नियमों में बदलाव भले ही राहत लेकर आए हों, लेकिन आंकड़ों में यह दिखाई नहीं दे रही है। लाखों जॉब कार्ड धारकों के सापेक्ष हजारों को ही सौ दिन या उससे अधिक रोजगार मिल सका है। सबसे अधिक काम जालौन में हुआ है, जबकि सबसे खराब स्थिति ललितपुर की रही है।
बुंदेलखंड के सातों जिलों सहित देश के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए मनरेगा के नियमों में संशोधन कर केंद्र सरकार ने जॉब कार्ड धारकों को सौ दिन की जगह डेढ़ सौ दिन रोजगार देने का निर्णय लिया है। झांसी जिले में पौने दो लाख जॉब कार्ड धारक हैं। वित्तीय वर्ष 2015-16 में तीस लाख मानव दिवस सृजित करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए पिछले माह से नियमित 25 से तीस हजार लोगों को रोजगार दिया जा रहा है।
गत 22 जनवरी को 35 हजार मानव सृजित कर जिले ने पूरे प्रदेश में रिकार्ड बनाया था, लेकिन सौ दिन एवं उससे अधिक रोजगार देने के आंकड़ों में स्थिति संतोष जनक नहीं दिख रही है। पौने दो लाख जॉब कार्ड धारकों के सापेक्ष 1688 लोगों को सौ दिन रोजगार मिला, जबकि 1668 लोगों को सौ दिन से अधिक रोजगार मिला।
बुंदेलखंड में सबसे अच्छी स्थिति जालौन जिले की है, यहां 628 लोगों को सौ दिन व 2891 लोगों को सौ दिन से अधिक रोजगार मिला। सबसे खराब स्थिति ललितपुर जिले की है, यहां 40 लोगों को सौ दिन व 206 लोगों को सौ दिन से अधिक रोजगार मिला है।
पलायन रोकने कराएं मनरेगा के काम
झांसी। शासन की प्राथमिकता है कि क्षेत्र से पलायन न हो, मनरेगा के तहत अधिक से अधिक रोजगार का सृजन किया जाए। हर परिवार को रोजगार दिलाने का प्रयास करें। यह बात कृषि उत्पादन आयुक्त प्रवीर कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में कही। उन्होंने कहा कि वर्षा का जल संचय करने के लिए अभी से नालों को चिह्नित कर लें।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड पैकेज से डग वैल और ब्लास्ट वैल का निर्माण कराया गया है। पेयजल समस्या हो तो इनका गहरीकरण करा लें। जानवरों के लिए आवश्यक चारे का प्रबंध कर लें, साथ ही शिविर स्थापित कर प्रतिदिन चारे की खपत की जानकारी लें।
वीडियो कांफ्रेंसिंग में मंडलायुक्त के. राममोहन राव ने कहा कि मंडल के झांसी एवं ललितपुर में जल स्तर काफी नीचे गिर रहा है। जालौन में अभी समस्या नहीं है। झांसी में चार सौ व ललितपुर में 600 नये हैंडपंप लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जालौन में पांच सौ नये हैंडपंप व 1500 हैंडपंप रीबोर का प्रस्ताव भी भेजा गया है।