फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Rs 2.5 lakhs spent on killing railway rats ... even less terror

रेलवे चूहों को मारने पर खर्च कर रहा ढाई लाख..फिर भी कम नहीं हो रहा आतंक

Thu, 16 Dec 2021 01:40 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 16 Dec 2021 01:40 AM IST
विज्ञापन
Rs 2.5 lakhs spent on killing railway rats ... even less terror
झांसी। रेलवे स्टेशन को चूहे खोखला कर रहे हैं। चूहों ने स्टेशन के प्लेटफार्म समेत कार्यालयों तक को खोद डाला है। हालात यह हैं कि रेलवे हर साल करीब ढाई लाख रुपये चूहों को मारने पर खर्च करता है, लेकिन फिर भी चूहों का आतंक चरम पर है। चूहे बिजली वायरिंग, फर्नीचर समेत कई चीजों को नुकसान पहुंचा चुके हैं। इतना ही नहीं ट्रेनों में भी सामान को कुतर देते हैं।
विज्ञापन

आपने यात्रा करते समय अक्सर रेलवे स्टेशन पर चूहों को उछलकूद करते देखा होगा। चूहे पटरियों व प्लेटफार्मों पर फेंकी गईं खानपान की वस्तुओं को खाकर इतने मोटे हो जाते हैं कि उनको देखकर बच्चे तक डर जाते हैं। कई बार तो चूहे देखते ही देखते आपके छोटे मोटे सामान या खाने पीने की चीजों को उठा ले जाते हैं।
विज्ञापन

यही हाल झांसी रेलवे स्टेशन का है। प्लेटफार्म एक से पांच, छह और सात नंबर की पटरियों के पास चूहों ने जगह-जगह सुराख बना रखे हैं। दिन के वक्त चूहे पटरियों के पास ही घूमते रहते हैं। रात होते ही चूहे प्लेटफार्म एक पर बने कार्यालयों, फूड प्लाजा, खानपान स्टॉलों के आसपास पहुंच जाते हैं। पिछले डेढ़ साल से प्लेटफार्म एक पर बंद चल रहे भोजनालय का चूहों ने अंदर से बुरा हाल कर दिया है। चूहों ने भोजनालय की दीवारों तक को खोद डाला। भोजनालय की नाली में असीमित चूहे एकत्रित हो गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

हालांकि, रेलवे ने प्लेटफार्म, कार्यालयों, शौचालय, पुलिया नंबर नौ से सीपरी पुल तक पटरियों व कीट नियंत्रण के लिए लखनऊ की किंग सिक्योरिटी सर्विस कंपनी को ठेका दे रखा है। चार साल का ठेका नौ करोड़ रुपये में दिया गया है। इसमें दस लाख से अधिक रुपये केवल चूहे और कॉकरोच मारने के लिए दिए जा रहे हैं। इसके बाद भी स्टेशन पर चूहों का आतंक है। कंपनी अधिकारियों का दावा है कि वह चूहों को कीटनाशक दवा खिलाकर उनका निस्तारण कर रहे हैं। लेकिन यह पता नहीं चलता कि चूहे कब पकड़े जाते हैं और उनका निस्तारण कहां होता है।

- कंपनी द्वारा चूहों को पकड़ने का अभियान लगातार जारी रहता है। चूहों को पकड़ने के बाद उनका उचित निस्तारण किया जाता है। ताकि वह दोबारा प्लेटफार्म पर न आ सकें।
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed