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कर्ज के दलदल में फंसे हैं प्रवासी मजदूर

Wed, 10 Jun 2020 11:42 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2020 11:42 PM IST
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Return laboure capture in kurj
मजदूर - फोटो : ?????
झांसी। देश के महानगरों से लौटे प्रवासी मजदूर अपने जीवन के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। जी हां, इनके हाथों से केवल रोजगार ही नहीं छिना है, बल्कि अपनी मेहनत के बलबूते जमा की गृहस्थी भी ये महानगरों में छोड़ आए हैं। मेहनतकश हाथों के पास न तो काम है और न ही जमा पूंजी। ऐसे में जीवन यापन के लिए ये साहूकारों के जाल में फंसते जा रहे हैं। साहूकार की भी इन मजदूरों की मजबूरी का जमकर फायदा उठा रहे हैं। मनमाने ब्याज पर वे मजदूरों को कर्ज मुहैया करा रहे हैं। उनकी नजर इन गरीबों की जमीन पर टिकी रहती है।
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जिले के 2.51 लाख किसानों में से ज्यादातर छोटे किसान हैं। इनमें से तमाम किसानों के पास इतनी भी जमीन नहीं है कि वे उससे अपने परिवार के गुजर बसर के लिए भी अनाज पैदा कर पाएं। इसका अंदाजा लहचूरा के ग्राम धवाकर में मौत को गले लगाने वाले प्रवासी मजदूर पूरन अहिरवार की स्थिति को देखकर लगाया जा सकता है, जो महज तीन बीघा का काश्तकार था। उसकी इसी जमीन पर उसके दो पुत्र भी आश्रित हैं। बेटी की शादी के लिए कर्ज लिया था, चुकाने के लिए मजदूरी करने दिल्ली चला गया। लॉकडाउन में काम छूटा तो वापस अपने गांव आ गया। लेकिन, कर्ज को बोझ हर पल उसके साथ साये की तरह पीछे रहा। आखिर में हारकर उसने मौत का रास्ता चुन लिया।
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महानगरों से वापस लौटे ज्यादातर प्रवासी मजदूरों की यही कहानी है। खेती के बलबूते जब वे परिवार का बोझ नहीं ढो सके तो महानगरों की ओर रुख कर लिया। वहां काम मिला, पैसा कमाया और गृहस्थी बसाई, लेकिन कोरोना वायरस ने सब कुछ उजाड़ दिया। खाली हाथ गांव लौट आए। पेट पालने के लिए गांव के दुकानदारों से ये सामान उधार ले रहे हैं। उनका कर्ज चुकाने के लिए साहूकारों के पास पहुंच रहे हैं। साहूकार इन्हें मोटे ब्याज पर कर्ज दे रहे हैं। ब्याज बढ़ता जा रहा है और चुकाने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में साहूकारों की नजर इन मजदूरों की जमीनों पर टिकी रहती है। कर्ज न चुका पाने की स्थिति में साहूकार जमीनों को हड़प लेते हैं।
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ब्याज से बढ़ता जाता है कर्ज का बोझ
झांसी। वैसे तो जिले में पंजीकृत साहूकारों की संख्या महज 60 है, लेकिन 300 से अधिक साहूकार सक्रिय हैं। ये साहूकार कर्ज में ली गई रकम पर 10-15 प्रतिशत तक मासिक ब्याज लगाते हैं। अदायगी न करने पर ब्याज भी मूल कर्ज में शामिल होता जाता है, जिससे कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जाता है। कर्ज वापसी के लिए साहूकार लगातार दबाव बनाते रहते हैं। अदायगी न करने पर साहूकार जमीन, मकान तक हड़प लेते हैं।
पहले पुत्र गया, अब पिता का साया छिना
ग्राम धवाकर के पूरन ने जिस बेटी की शादी के लिए कर्ज लिया था, उसके पुत्र की मौत हो चुकी है। इससे वो लगातार दुखी चल रही थी। अभी उसका दुख कम ही नहीं हुआ था कि पिता का साया भी सिर से उठ गया।
लखनऊ से पैदल अपने गांव पहुंचा था पूरन
लॉकडाउन की शुरुआत के साथ ही पूरन का परेशानियों से नाता जुड़ गया था। पहले वो अपनी पत्नी और बच्चे के साथ दिल्ली में मुफलिसी में फंसा रहा। दिल्ली से निकलकर जैसे तैसे वो लखनऊ पहुंचा। लखनऊ से कोई साधन नहीं मिलने पर वो पैदल ही पत्नी और बेटे के साथ झांसी पहुंच गया था।

मांगा मुआवजा, पेंशन का फार्म भरवाया
प्रवासी मजदूर की मौत की खबर लगते ही किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शिवनारायण सिंह परिवार उसके गांव पहुंच गए थे। उन्होंने बताया कि मृतक पर नब्बे हजार रुपये का केसीसी का कर्ज था। इसके अलावा तीन लाख से अधिक का साहूकारों का कर्ज था। प्रदेश अध्यक्ष ने मृतक के परिवार को मुआवजा देने की मांग की। वहीं, एसडीएम अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि मृतक के परिवार वालों के अनुसार उसके ऊपर बेटी की शादी का कर्जा था। इसी मानसिक तनाव में उसने आत्महत्या कर ली। मृतक की पत्नी का विधवा पेंशन का फार्म भरवाकर आगे की कार्यवाही की जा रही है। शासन से जो भी सहायता संभव होगी, दिलाई जाएगी।
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