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मंत्री जी! एंबुलेंस की सुध आप ही ले लीजिए

Wed, 21 Dec 2016 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 21 Dec 2016 12:49 AM IST
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Respected Minister! Take care of the ambulance you
hospital, jhansi news - फोटो : demo
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में लगभग 65 लाख रुपये खर्च कर खरीदी गईं अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस दो एंबुलेंस गैरेज में बेकार खड़ीं धूल खा रही हैं। केंद्र सरकार ने न तो एंबुलेंस पर कोई गाइड लाइन तय की है न ही बजट दिया और न ही स्टाफ मुहैया कराया है। मोदी सरकार के गठन के बाद पहली बार केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा बुधवार को झांसी आ रहे हैं। सवाल है कि क्या वे इसका समाधान निकालेंगे? 
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सोच तो अच्छी थी लेकिन परवान न चढ़ सकी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सन 2010 में झांसी मेडिकल कॉलेज को 19.22 लाख रुपये की ‘रोड सेफ्टी’ नाम से एक एंबुलेंस उपलब्ध कराई थी। इसके पीछे का मकसद हाईवे पर होने वाले हादसों में घायल मरीजों को अस्पताल लाकर उपचार कराना था। एंबुलेंस फ्रिज, जेनरेटर, सर्च लाइट, डॉक्टर कुर्सी, फॉग लैंप्स, आग बुझाने का यंत्र, ऑक्सीजन सिलेंडर, फोल्डबल स्ट्रेचर सहित सभी जरूरी उपकरणों से लैस है। इससे गंभीर रुप से घायल मरीजों की जान बचाई जा सकती है। इसमें एक एंबुलेंस छह साल में चालीस किलोमीटर का ही सफर तय कर सकी है। इस एंबुलेंस में कोहरे के मद्देनजर भी खास तरह की लाइट लगी हुई हैं, जो कोहरे में चलने में मददगार होती है। यह एंबुलेंस जब आई थी, तभी इसका हॉर्स पाइप कटा हुआ था। इसके बाद कई बार मंत्रालय को पत्र तो लिखे गए लेकिन इससे ज्यादा कुछ ज्यादा नहीं किया गया। उधर से भी कोई जवाब नहीं आया। 
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इसके बाद भी केंद्र सरकार ने 45 लाख रुपये की सन 2012 में और अधिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस भेज दी। इस एंबुलेंस में वेटिंलेटर के साथ-साथ ऑटोमेटिक लोडिंग स्ट्रैक्चर, ऑक्सीजन सिलेंडर, ईसीजी मशीन, पल्स ऑक्सीमीटर, कॉर्डिक मॉनीटर, सक्शन मशीन, इमरजेंसी किट, व्हील चेयर, मॉनीटर, हेड इम्बोलाइजर, स्प्रिंग इंफ्यूशन पंप, एंटी शॉक ट्राऊसर्स, एसी भी लगा हुआ है। बहुत जरूरत पड़ने पर ही एंबुलेंस को तीन-चार माह में कभी कभार गैरेज से बाहर निकाल लिया जाता है। यानी चार साल में बमुश्किल 40 बार ही बाहर निकली होगी। मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य डा.एके मल्होत्रा ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा था पर कुछ नहीं हुआ।
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न गाइडलाइन, न बजट, न स्टाफ
क्या यह एंबुलेंस बीपीएल कार्डधारकों (गरीबी रेखा से नीचे) को नि:शुल्क ले जाएगी? बीपीएल से ऊपर श्रेणी के मरीजों से कितना शुल्क लिया जाएगा? इसको लेकर एंबुलेंस को चलाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कोई गाइडलाइन नहीं तय की गई है। इससे अस्पताल प्रशासन असमंजस की स्थिति में है। इसके साथ ही न स्टाफ मुहैया कराया गया है। मशीन को चलाने के लिए अलग से टेक्नीशियन नियुक्त होना चाहिए। पेट्रोल आदि के लिए बजट आना चाहिए। तब यह योजना परवान चढ़ सकेगी। 

बजट मांगा है
मैंने वार्षिक एवं व्यापक रखरखाव अनुबंध खर्च के मद में सरकार से बजट मांगा है। इसका इस्तेमाल एंबुलेंस के लिए करेंगे ताकि इसका मकसद पूरा हो सके।  
 डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य मेडिकल कालेज
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