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समय पर रिपोर्ट मिलती नहीं, पूछने पर मरीजों को मिलती है दुत्कार

Fri, 16 Jul 2021 01:39 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 16 Jul 2021 01:39 AM IST
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Reports are not received on time, patients get reprimanded on asking
झांसी। कहते हैं डॉक्टर मरीज का मर्ज ठीक से पूछ ले, तो आधी बीमारी दूर हो जाती है। मगर झांसी मेडिकल कॉलेज का हाल इससे जुदा है। पहले तो यहां मरीजों को इलाज के लिए घंटो इंतजार करना पड़ता है। साथ ही डॉक्टर और स्टाफ की दुत्कार भी झेलनी पड़ती है। हालात यह हैं कि मरीज ने मर्ज के बारे में सवाल भर कर लिया, तो स्टाफ आग बबूला हो उठता है। मेडिकल कॉलेज में आए दिन ऐसे मामले सामने आते हैं, लेकिन इस पर न तो कॉलेज प्रशासन ध्यान देता है और न ही शासन के अधिकारी। प्रदेश सरकार 16 जिलों में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोलने जा रही है, लेकिन पहले से संचालित मेडिकल कॉलेज के हालात बदतर हो चले हैं। अमर उजाला टीम ने बृहस्पतिवार को पड़ताल के दौरान डॉक्टरों के व्यवहार को लेकर मरीजों से बात की, तो उन्होंने अपना दर्द बयां किया।
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दो दिन से बैठे हैं, कोई कुछ बताता नहीं
महोबा की दयावती दो दिन पहले मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने आई थीं। एक दिन तो पर्चा बनवाने और कमरे खोजने में ही बीत गया। जिस कर्मचारी से उन्होंने जानकारी मांगी, उसने ही सीधे मुंह बात नहीं की। जैसे-तैसे डॉक्टर का कमरा मिला, तो पता लगा कि वक्त निकल गया। रात मेडिकल कॉलेज के पास बने आश्रय स्थल में काटी। दूसरे दिन पहुंची, तो अल्टासाउंड के लिए कह दिया गया। वहां भी लंबा इंतजार करना पड़ा, तो तीन घंटे तक गैलरी में ही बैठ गईं। उनके साथ आईं बेटी गीता वर्मा भी कॉलेज परिसर में ही जमीन पर बैठी थीं। उनका कहना था कि यहां कोई कुछ बताता ही नहीं है। मरीज इधर-उधर भागते रहते हैं।
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रिपोर्ट में नाम गलत लिख दिया, कहने पर रिपोर्ट फेंक दी
गुरसराय के अस्ता से आईं रेखा को जांच करानी थीं। स्टाफ ने पहले तो रिपोर्ट पर उम्र गलत लिख दी। 45 साल की रेखा का इलाज करना था, तो 14 साल की रेखा की रिपोर्ट दे दी। मरीज के साथ आए तीमारदारों ने इस पर सवाल किया तो उनकी रिपोर्ट फेंक दी। तीमारदार अनुराग ने बताया कि कमरे-कमरे भटकने के बाद तो जांच हुई। कोई यहां ठीक से बात नहीं करता। मरीज को अपमान सहना पड़ता है। स्टाफ से सवाल पूछ तो भड़कने लगते हैं। बहुत बुरी स्थिति है।
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एक महीने से टहला रहे हैं
लक्ष्मी गेट निवासी अंकित महाब्राह्मण अपने पिता की कोविड रिपोर्ट पाने के लिए एक महीने से मेडिकल कॉलेज के चक्कर लगा रहे हैं। उनके पिता अशोक शर्मा को 19 अप्रैल को कोविड होने पर मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया। 25 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने डिस्चार्ज स्लिप दी नहीं। अब वह कोविड रिपोर्ट के लिए घूम रहे हैं। उन्होेंने बताया कि कोई ठीक से बात ही नहीं करता। पूछताछ काउंटर भी खाली पड़ा रहता है।

दो दिन से भटक रहे इलाज नहीं मिला
सिमरावारी निवासी आनंद प्रकाश की पत्नी सावित्री को किडनी में इंफेक्शन है। जिला अस्पताल में दिखाया, तो वहां से मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। यहां दो दिन से बैठे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। अल्ट्रासाउंड के लिए जैसे-तैसे पर्चा बनवाकर पहुंचे, लेकिन पूरा दिन बीतने के बाद भी नंबर नहीं आया। स्टाफ को समस्या बताकर अल्ट्रासाउंड करने के लिए कहा, तो दुत्कार मिली।
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