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एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट का फॉर्मेट तय
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Mar 2016 01:19 AM IST
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ragging, jhansi hindi news
- फोटो : demo
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झांसी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा से जुड़े सभी संस्थानों के लिए एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट भेजने का फॉर्मेट तय कर दिया है। अब कमेटी को इसी फॉर्मेट के मुताबिक अपनी रिपोर्ट तैयार कर यूजीसी को भेजनी होगी।
यूजीसी का सख्त निर्देश है कि रैगिंग से जुड़े किसी मामले में ढिलाई नहीं होनी चाहिए। शिकायत के तुरंत बाद ही रैगिंग से जुड़े आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि कोई शिक्षण संस्थान आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई करने में नाकाम साबित होता है तो उसके खिलाफ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एक्शन ले सकता है। नवीन फॉर्मेट में सबसे पहले पूर्ण ब्योरे के साथ पीड़ित का नाम दर्ज होगा।
उसके बाद क्रमश: अभियुक्त व उसकी पूरी डिटेल, शिकायत दर्ज होने की तिथि और दर्ज कर्ता का नाम, शिकायत की डिटेल और स्वभाव, शिक्षण संस्थान द्वारा शिकायत के बाद क्या कार्रवाई की गई समेत बिंदुवार रिपोर्ट देनी होगी। इसके साथ ही बीते तीन सालों में रैगिंग के कितने मामले सामने आए हैं और एंटी रैगिंग कमेटी ने सजा कि क्या सिफारिश की है आदि ब्योरा देना होगा। वहीं, सभी विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वह प्रचार प्रसार के जरिए रैगिंग विरोधी तंत्र के लिए कदम बढ़ाएं।
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शिक्षण संस्थानों में एंटी रैगिंग सेल, एंटी रैगिंग स्क्वॉड के गठन के साथ-साथ महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा, अलार्म बेल लगाई जानी चाहिए। मुसीबत उत्पन्न करने वालों का चिह्नीकरण होना चाहिए। संस्थान के उच्चाधिकारियों को हॉस्टल्स का औचक निरीक्षण कर व्यवस्था का जायजा लेना चाहिए।
छात्र-छात्राओं व उनके परिजनों को एंटी रैगिंग हेल्पलाइन, एंटी रैगिंग वेबसाइट, एंटी रैगिंग मॉनीटरिंग एजेंसी के बारे में जानकारी दी जाए। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को रैगिंग के गंभीर मामलों में पुलिस व कानूनी कार्रवाई के भी निर्देश हैं।
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यूजीसी का सख्त निर्देश है कि रैगिंग से जुड़े किसी मामले में ढिलाई नहीं होनी चाहिए। शिकायत के तुरंत बाद ही रैगिंग से जुड़े आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि कोई शिक्षण संस्थान आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई करने में नाकाम साबित होता है तो उसके खिलाफ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एक्शन ले सकता है। नवीन फॉर्मेट में सबसे पहले पूर्ण ब्योरे के साथ पीड़ित का नाम दर्ज होगा।
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उसके बाद क्रमश: अभियुक्त व उसकी पूरी डिटेल, शिकायत दर्ज होने की तिथि और दर्ज कर्ता का नाम, शिकायत की डिटेल और स्वभाव, शिक्षण संस्थान द्वारा शिकायत के बाद क्या कार्रवाई की गई समेत बिंदुवार रिपोर्ट देनी होगी। इसके साथ ही बीते तीन सालों में रैगिंग के कितने मामले सामने आए हैं और एंटी रैगिंग कमेटी ने सजा कि क्या सिफारिश की है आदि ब्योरा देना होगा। वहीं, सभी विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वह प्रचार प्रसार के जरिए रैगिंग विरोधी तंत्र के लिए कदम बढ़ाएं।
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शिक्षण संस्थानों में एंटी रैगिंग सेल, एंटी रैगिंग स्क्वॉड के गठन के साथ-साथ महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा, अलार्म बेल लगाई जानी चाहिए। मुसीबत उत्पन्न करने वालों का चिह्नीकरण होना चाहिए। संस्थान के उच्चाधिकारियों को हॉस्टल्स का औचक निरीक्षण कर व्यवस्था का जायजा लेना चाहिए।
छात्र-छात्राओं व उनके परिजनों को एंटी रैगिंग हेल्पलाइन, एंटी रैगिंग वेबसाइट, एंटी रैगिंग मॉनीटरिंग एजेंसी के बारे में जानकारी दी जाए। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को रैगिंग के गंभीर मामलों में पुलिस व कानूनी कार्रवाई के भी निर्देश हैं।