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रक्सा की गलियों में जगह-जगह गड्ढे होने से चलना दुश्वार
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रक्सा में जगह- जगह गड्ढे होने से वाहन चालकों को बच- बचकर निकलना पड़ता है।
- फोटो : REPORTERS
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झांसी। रक्सा क्षेत्र की सात हजार आबादी कसबे की गलियों में जगह- जगह गड्ढों से परेशान हैं। इससे आवागमन के दौरान आए दिन दुर्घटनाएं हो रहीं हैं। यहां से राजापुर समेत 20 से अधिक गांवों की तरफ जाने वाले रास्ता भी खस्ताहाल है।
महानगर से दस किलोमीटर दूर शिवपुरी हाइवे पर स्थित रक्सा कस्बे में 50 से अधिक गलियां हैं। मगर सभी गलियों की सड़कों का बुरा हाल है। सड़क पर जगह- जगह गड्ढे होने से सभी गलियां ऊबड़- खाबड़ हो गई है। गड्ढों के कारण यहां के लोगों का गलियों से निकलना दूभर हो गया है। रक्सा से ही एक रास्ता राजापुर समेत 20 से अधिक गांवों के लिए जाता है। यह रास्ता भी खस्ताहाल है। जबकि राजापुर और आसपास गांवों से प्रतिदिन 200 से अधिक दूधवाले झांसी शहर में आते हैं।
मैं मेडिकल स्टोर का संचालन करता हूं। घर से स्टोर तक आने में बुरा हाल हो जाता है। यह समस्या कई सालों से बनी है। कई बार गिरकर घायल तक हो गया। पुनीत साहू।
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मेरी दुकान के सामने बहुत बड़ा गड्ढा हो गया है। हर वक्त उसमें पानी भरा रहता है। नाली जाम रहती है पास में कूड़ा घर बना रहता है। कई बार शिकायत की, लेकिन सफाई कभी नहीं हुई। राजेंद्र राजपूत।
मेरी चार पहिया गाड़ी गई बार गड्ढों में फंसने से खराब हो चुकी है। लोगों की मदद से गाड़ी को गड्ढे से बाहर निकालना पड़ा। सालों से सड़क की यही दुर्दशा है। अखिलेश गुप्ता।
मैं जब भी बाइक से बच्चों को स्कूल छोड़ने जाता हूं। हमेशा गिरने का डर बना रहता है। बहुत ही संभल कर गाड़ी चलानी पड़ती है। पूरा कस्बा उबड़- खाबड़ हो गया है। धर्मेंद्र अहिरवार।
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महानगर से दस किलोमीटर दूर शिवपुरी हाइवे पर स्थित रक्सा कस्बे में 50 से अधिक गलियां हैं। मगर सभी गलियों की सड़कों का बुरा हाल है। सड़क पर जगह- जगह गड्ढे होने से सभी गलियां ऊबड़- खाबड़ हो गई है। गड्ढों के कारण यहां के लोगों का गलियों से निकलना दूभर हो गया है। रक्सा से ही एक रास्ता राजापुर समेत 20 से अधिक गांवों के लिए जाता है। यह रास्ता भी खस्ताहाल है। जबकि राजापुर और आसपास गांवों से प्रतिदिन 200 से अधिक दूधवाले झांसी शहर में आते हैं।
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मैं मेडिकल स्टोर का संचालन करता हूं। घर से स्टोर तक आने में बुरा हाल हो जाता है। यह समस्या कई सालों से बनी है। कई बार गिरकर घायल तक हो गया। पुनीत साहू।
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मेरी दुकान के सामने बहुत बड़ा गड्ढा हो गया है। हर वक्त उसमें पानी भरा रहता है। नाली जाम रहती है पास में कूड़ा घर बना रहता है। कई बार शिकायत की, लेकिन सफाई कभी नहीं हुई। राजेंद्र राजपूत।
मेरी चार पहिया गाड़ी गई बार गड्ढों में फंसने से खराब हो चुकी है। लोगों की मदद से गाड़ी को गड्ढे से बाहर निकालना पड़ा। सालों से सड़क की यही दुर्दशा है। अखिलेश गुप्ता।
मैं जब भी बाइक से बच्चों को स्कूल छोड़ने जाता हूं। हमेशा गिरने का डर बना रहता है। बहुत ही संभल कर गाड़ी चलानी पड़ती है। पूरा कस्बा उबड़- खाबड़ हो गया है। धर्मेंद्र अहिरवार।