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निःशुल्क शिक्षा देते है राजकुमार

Wed, 13 Nov 2019 12:54 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 13 Nov 2019 12:54 AM IST
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rajkumar give free education in jhansi to slum childrens
बाल दिवस 14 नवंबर पर विशेष
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झांसी। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जन्म दिन 14 नवंबर को मनाया जाएगा। इनके जयंती को बाल दिवस भी कहते हैं। बच्चे इन्हें चाचा नेहरू कहते हैं। आज समाज में कई ऐसे व्यक्तित्व हैं, जो चाचा नेहरू की तरह बच्चों के शैक्षिक विकास में योगदान दे रहे हैं। इन्हीं में से एक है राजकुमार आचार्य, जो कई वर्षों से महानगर की झुग्गी बस्तियों में बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं।
झुग्गी बस्तियों में इंदिरा नगर, जौहर नगर सीपरी, सहारिया बस्ती डेली गांव में कई आदिवासी परिवार रहते हैं, जो घुमंतू समुदाय से भी हैं। इनमें बाघरी, लोहापीटा, सहारिया, मौघिया समाज के अलावा कचरा बीनने वाले परिवार भी हैं। वर्ष 2000 में इंदिरा नगर झुग्गी बस्ती में राजकुमार आचार्य ने बच्चों को पढ़ाना जो शुरू किया। उन्हें शुरुआती कठिनाइयों के बाद धीरे - धीरे सफलता मिलने लगी। इनके पढ़ाए हुए बच्चे रेखा गुजराती, पूजा बाघरी, शिल्पी आज स्वयं इनके अभियान को आगे बढ़ा रही हैं और सरस्वती संस्कार केंद्र के अंतर्गत जौहर झुग्गी बस्तियों पढ़ा रही हैं।
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राजकुमार आचार्य का कहना है कि इंदिरा नगर में शिक्षा की स्थिति शून्य थी। बाल विवाह आम था। लेकिन आज बच्चियों के शिक्षित होने पर बाल विवाह की स्थिति लगभग समाप्त हो गई है। उनके अनुसार उनकी पत्नी सरकारी शिक्षिका हैं। घर संचालन में कोई आर्थिक कठिनाई नहीं आती है। ऐसे में उन्होंने अपना सारा जीवन बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने में लगा दिया। पठन पाठन की पुस्तकें उपलब्ध कराते हैं। उनके इस प्रयास को देखकर कोई अलमारी दे देता है, तो कोई फर्नीचर की व्यवस्था कर देता है।
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आचार्य जी के पास सुबह 8 बजे से पढ़ने आ जाती हूं। अभी गिनती और पहाडे़ पूरे याद है। हिंदी भी तेजी से पढ़ना सीख रही हूं।
लक्ष्मी छात्रा

आचार्य जी कहते हैं कि पढ़ने लिखने से जागरूकता आती है। तरक्की होती है। अब जौहर नगर बस्ती के सभी बच्चे पढ़ने लगे हैं।
आशा छात्रा

बस्ती में पढ़ने के लिए सरकारी सुविधा नहीं है। ऐसे में अन्य सभी बच्चों के साथ यहां पढ़ने आता हूं। बहुत अच्छा लगता है।
विष्णु छात्र

हिंदी की मात्राएं सीख चुका हूं। पढ़ना भी आ गया है। नियमित पढ़ाई करने से अच्छा लगता है। अन्य बच्चों से भी पढ़ने को कहता हूं।
संजय छात्र
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